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मेडिकल कॉलेज में किशोरी की मौत, लापरवाही का आरोप
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान एक बालिका की मौत हो गई। पिता का आरोप है कि मरीज को तीन-चार बार ऑक्सीजन का खाली सिलिंडर लगा दिया गया। डॉक्टरों और स्टाफ की इसी लापरवाही की वजह से उसकी बेटी की मौत हो गई। वहीं प्राचार्य ने कहा कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। हालांकि मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला एमनजई जलालनगर निवासी ताहेर ई-रिक्शा चालक हैं। ताहेर ने बताया कि पिछले तीन दिन से उनकी बड़ी बेटी शाजिया (15) को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बुधवार रात करीब दो बजे शाजिया की हालत बिगड़ गई। उसे एंबुलेंस से राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर गए। जहां पर एक कर्मचारी ने शाजिया को इंजेक्शन लगाया। आरोप है कि कर्मचारी ने शाजिया को जो सिलिंडर लगाया उसमें ऑक्सीजन कम थी। इससे पांच मिनट में सिलिंडर खाली हो गया। शाजिया की हालत बिगड़ती चली गई। बार- बार कहने के बाद तीन-चार सिलिंडर बदले गए, लेकिन सभी सिलिंडर खाली थे। तब कर्मचारी ने कहा कि ऑक्सीजन नहीं है, मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दे रहे हैं। आरोप है कि ऑक्सीजन न मिलने पर वार्ड में ले जाने के बाद शाजिया की सुबह करीब पांच बजे मौत हो गई।
शाजिया के पिता का आरोप है कि उन्होंने वार्ड में तैनात एक कर्मचारी से कहा तो उसने देखने से इनकार कर दिया। अन्य कर्मचारी सो रहे थे। उस समय उन्होंने सीएमएस और प्राचार्य के आवास का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन लेकिन किसी ने नहीं बताया। पिता का कहना है कि वह शाजिया की मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे। ताकि अन्य मरीजों के साथ लापरवाही न बरती जाए। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी नहीं है। हो सकता है मौत का कारण कोई दूसरा रहा हो। मामले की जानकारी भी नहीं है।
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सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला एमनजई जलालनगर निवासी ताहेर ई-रिक्शा चालक हैं। ताहेर ने बताया कि पिछले तीन दिन से उनकी बड़ी बेटी शाजिया (15) को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बुधवार रात करीब दो बजे शाजिया की हालत बिगड़ गई। उसे एंबुलेंस से राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर गए। जहां पर एक कर्मचारी ने शाजिया को इंजेक्शन लगाया। आरोप है कि कर्मचारी ने शाजिया को जो सिलिंडर लगाया उसमें ऑक्सीजन कम थी। इससे पांच मिनट में सिलिंडर खाली हो गया। शाजिया की हालत बिगड़ती चली गई। बार- बार कहने के बाद तीन-चार सिलिंडर बदले गए, लेकिन सभी सिलिंडर खाली थे। तब कर्मचारी ने कहा कि ऑक्सीजन नहीं है, मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दे रहे हैं। आरोप है कि ऑक्सीजन न मिलने पर वार्ड में ले जाने के बाद शाजिया की सुबह करीब पांच बजे मौत हो गई।
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शाजिया के पिता का आरोप है कि उन्होंने वार्ड में तैनात एक कर्मचारी से कहा तो उसने देखने से इनकार कर दिया। अन्य कर्मचारी सो रहे थे। उस समय उन्होंने सीएमएस और प्राचार्य के आवास का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन लेकिन किसी ने नहीं बताया। पिता का कहना है कि वह शाजिया की मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे। ताकि अन्य मरीजों के साथ लापरवाही न बरती जाए। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी नहीं है। हो सकता है मौत का कारण कोई दूसरा रहा हो। मामले की जानकारी भी नहीं है।
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