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ब्लड कैंस से जूझ रहे बच्चे को नहीं मिल पा रहा इलाज, कबिना मंत्री का लेटर भी नहीं आया काम
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जलालाबाद। ब्लड कैंसर से जूझ रहे 11 वर्षीय बालक को इलाज की जरूरत है लेकिन लॉक डाउन के चलते किसी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं किया। इस मामले में प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना की सिफारिश भी काम नहीं आई और पीजीआई से उसे बैरंग लौटा दिया गया।
नलवाली गली निवासी प्रमोद गुप्ता के 11 इकलौते वर्षीय बेटे चिराग गुप्ता को दूसरे चरण के लॉक डाउन के दौरान अचानक बुखार आने के बाद परिजन ने जिले से लेकर बरेली के कई अस्पतालों में इलाज करवाया। मगर उसकी तबियत लगातार बिगड़ती चली गई। घरवालों के अनुसार इस दौरान उन्होंने चिराग को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए तमाम प्रयास किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। कई दिनों से बिस्तर पर पड़े चिराग के गले में अब सूजन आ गई है और वह कुछ भी निगल नहीं पा रहा है। कहीं से कोई आसरा न देख परेशान पिता ने वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से मिला और मदद की गुहार लगाई। वित्तमंत्री ने लखनऊ के पीजीआई के मुख्य चिकित्साधीक्षक को बच्चे को भर्ती कर इलाज करने का पत्र लिख दिया। इसके बाद परिजन उसे नौ मई को लेकर पीजीआई पहुंचे लेकिन वहां उसे भर्ती करने से मना कर दिया। निराश होकर परिजन उसे लेकर घर लौट आए। प्रमोद गुप्ता ने बताया कि इलाज के दौरान चिराग की बरेली में जांच की गई थी, जिसमें उसे ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई थी। इस गंभीर बीमारी के बाद भी सही इलाज न मिल पाने से घरवाले बहुत ही निराश हैं और वे बीमार बच्चे को घर ले आए हैं।
ब्लड कैंसर से पीड़ित बालक को इलाज मिलने में कठिनाई होने का मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया। यदि परिवार के लोग संपर्क करेंगे तो सीएमओ को दिशा निर्देश दिए जाएंगे, जिससे कि स्वास्थ्य निदेशालय स्तर से बालक के उपचार की समुचित व्यवस्था हो सके।
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- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
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नलवाली गली निवासी प्रमोद गुप्ता के 11 इकलौते वर्षीय बेटे चिराग गुप्ता को दूसरे चरण के लॉक डाउन के दौरान अचानक बुखार आने के बाद परिजन ने जिले से लेकर बरेली के कई अस्पतालों में इलाज करवाया। मगर उसकी तबियत लगातार बिगड़ती चली गई। घरवालों के अनुसार इस दौरान उन्होंने चिराग को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए तमाम प्रयास किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। कई दिनों से बिस्तर पर पड़े चिराग के गले में अब सूजन आ गई है और वह कुछ भी निगल नहीं पा रहा है। कहीं से कोई आसरा न देख परेशान पिता ने वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से मिला और मदद की गुहार लगाई। वित्तमंत्री ने लखनऊ के पीजीआई के मुख्य चिकित्साधीक्षक को बच्चे को भर्ती कर इलाज करने का पत्र लिख दिया। इसके बाद परिजन उसे नौ मई को लेकर पीजीआई पहुंचे लेकिन वहां उसे भर्ती करने से मना कर दिया। निराश होकर परिजन उसे लेकर घर लौट आए। प्रमोद गुप्ता ने बताया कि इलाज के दौरान चिराग की बरेली में जांच की गई थी, जिसमें उसे ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई थी। इस गंभीर बीमारी के बाद भी सही इलाज न मिल पाने से घरवाले बहुत ही निराश हैं और वे बीमार बच्चे को घर ले आए हैं।
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ब्लड कैंसर से पीड़ित बालक को इलाज मिलने में कठिनाई होने का मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया। यदि परिवार के लोग संपर्क करेंगे तो सीएमओ को दिशा निर्देश दिए जाएंगे, जिससे कि स्वास्थ्य निदेशालय स्तर से बालक के उपचार की समुचित व्यवस्था हो सके।
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- रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन