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एंबुलेंस का इंतजार.....निकल गई बीमार की जान
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खुटार (शाहजहांपुर)। जिला अस्पताल रेफर किए गए एक रोगी को परिवार के लोग काफी देर तक लेकर अस्पताल में पड़े रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। आखिरकार रोगी की तड़पकर जान चली गई। उधर, डॉक्टर का कहना है कि परिवार के लोग रोगी को निजी अस्पताल लेकर चले गए थे।
गांव कुंभिया माफी निवासी 46 वर्षीय भगवानदीन को बेहद गंभीर हालत में लेकर उसका भाई आशाराम खुटार के सरकारी अस्पताल पहुंचा। भगवानदीन काफी दिनों से बीमार चल रहा था और बुधवार को उसे खून की कई उल्टियां होने से हालत ज्यादा बिगड़ गई थी। पीएचसी प्रभारी डॉ. संजीव कुमार ने भगवानदीन का प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। आशाराम ने 108 सेवा की एंबुलेंस को कॉल की, जिससे भाई को शाहजहांपुर ले जा सके। आशाराम का आरोप है कि तीन घंटे तक इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई तो वह भाई को खुटार में ही निजी डॉक्टर के यहां ले गया।
डॉक्टर ने भगवानदीन को भर्ती करने से मना कर दिया तो वह फिर से भाई को लेकर सरकारी अस्पताल आया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग बिना किसी कार्रवाई के शव को घर ले गए हैं।
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भगवानदीन को अस्पताल लाया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर करते हुए मैंने खुद एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन इस बीच भगवानदीन को उसके तीमारदार कहीं लेकर चले गए। वापस लेकर आए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
संजीव कुमार, प्रभारी पीएसची पुवायां
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गांव कुंभिया माफी निवासी 46 वर्षीय भगवानदीन को बेहद गंभीर हालत में लेकर उसका भाई आशाराम खुटार के सरकारी अस्पताल पहुंचा। भगवानदीन काफी दिनों से बीमार चल रहा था और बुधवार को उसे खून की कई उल्टियां होने से हालत ज्यादा बिगड़ गई थी। पीएचसी प्रभारी डॉ. संजीव कुमार ने भगवानदीन का प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। आशाराम ने 108 सेवा की एंबुलेंस को कॉल की, जिससे भाई को शाहजहांपुर ले जा सके। आशाराम का आरोप है कि तीन घंटे तक इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई तो वह भाई को खुटार में ही निजी डॉक्टर के यहां ले गया।
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डॉक्टर ने भगवानदीन को भर्ती करने से मना कर दिया तो वह फिर से भाई को लेकर सरकारी अस्पताल आया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग बिना किसी कार्रवाई के शव को घर ले गए हैं।
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भगवानदीन को अस्पताल लाया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर करते हुए मैंने खुद एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन इस बीच भगवानदीन को उसके तीमारदार कहीं लेकर चले गए। वापस लेकर आए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
संजीव कुमार, प्रभारी पीएसची पुवायां