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जिले की जलवायु के अनुकूल पाई गई ज्यादा प्रोटीन वाली गेहूं की एचडी-3226 प्रजाति
सार
करनाल (हरियाणा) के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ली रिसर्च के वैज्ञानिकों द्वारा गेहूं की हाल ही में विकसित नई प्रजाति एचडी-3226 (पूसा यशस्वी) को जिले की जलवायु के अनुकूल पाया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र पर छमाही खोजपरक परीक्षण में यह प्रजाति वर्तमान में प्रचलित गेहूं की अन्य प्रजातियों से कई मायने में बेहतर सिद्ध हुई है। एचडी-3226 में प्रोटीन अंश ज्यादा होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण इस प्रजाति का गेहूं कुपोषण विरोधी अभियान में भी परोक्ष तौर पर मदद करेगा।
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विस्तार
शाहजहांपुर। करनाल (हरियाणा) के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ली रिसर्च के वैज्ञानिकों द्वारा गेहूं की हाल ही में विकसित नई प्रजाति एचडी-3226 (पूसा यशस्वी) को जिले की जलवायु के अनुकूल पाया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र पर छमाही खोजपरक परीक्षण में यह प्रजाति वर्तमान में प्रचलित गेहूं की अन्य प्रजातियों से कई मायने में बेहतर सिद्ध हुई है। प्रोटीन ज्यादा होने से गेहूं कुपोषण मिटाने में भी सहायक होगा। आईवीआईआर की 2947 प्रजाति की तुलना में डीबीडब्ल्यू-187 प्रजाति प्रक्षेत्र परीक्षण के दौरान उपज देने में ज्यादा अच्छी पाई गई है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की डीवीडब्ल्यू-183, डीवीडब्ल्यू-303, आईवीआईआर की 2967 आदि पहले से प्रचलित प्रजातियों से शुरुआत में प्रति हेक्टेयर करीब 60 क्विंटल गेहूं उत्पादन मिला। प्रजातियां पुरानी होते जाने के साथ बीज की जमाव क्षमता में कमी से अब उत्पादन घटकर 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गया है।
केंद्र के 1.25 हेक्टेयर कृषि प्रक्षेत्र में एचडी-3226 और इतने ही अन्य क्षेत्रफल में पुरानी प्रजाति एचडी-2967 बोई गई। केंद्र प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य विज्ञानी डॉ. एनसी त्रिपाठी और पादप रोग विज्ञानी डॉ. नूतन वर्मा ने पाया कि एचडी-3226 प्रजाति से प्रति हेक्टेयर 57.5 क्विंटल गेहूं मिला जबकि एचडी-2967 प्रजाति से सिर्फ 49.7 क्विंटल उपज प्राप्त हुई। नई प्रजाति ने 12 प्रतिशत अधिक उत्पादन दिया। नई प्रजाति से किसानों को प्रति हेक्टेयर 12 हजार रुपये अधिक आय होने का आकलन किया गया। 2019 में विकसित एचडी-3226 प्रजाति पीले-भूरे रोग, करनाल बंट, पाउडर की तरह लगने वाली फफूंदी, तना गलन आदि रोगों के प्रति अत्यंत प्रतिरोधी है।
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गुणवत्ता के मापदंडों पर खरी साबित हुई एचडी-3226 प्रजाति
इस प्रजाति में उच्च प्रोटीन सामग्री 12.8 प्रतिशत है और उच्च शुष्क क्षमता होने के कारण इसका भंडारण अधिक समय तक किया जा सकता है। इस प्रजाति में जस्ता 36.8 पीपीएम मात्रा में है। इस प्रजाति को उच्चतम रोटी गुणवत्ता अंक 6.7 प्रतिशत दिए गए हैं क्योंकि उसमें पाव रोटी के लिए ग्लूटोन की आदर्श मात्रा (दस प्रतिशत) पाई गई है।
डीबीडब्ल्यू-187 प्रजाति उत्पादन देने में बेहतर
कृषक प्रक्षेत्रों पर गेहूं प्रजातीय परीक्षण ऑन फॉर्म ट्रायल में नई प्रजाति डीबीडब्ल्यू-187 का एचडी-2967 से तुलनात्मक परीक्षण करने पर पाया गया कि नवीन प्रजाति डीबीडब्ल्यू-187 की उपज 60.90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि एचडी-2967 की उपज 55.35 क्विंटल तक सीमित रही। केंद्र के प्रभारी अधिकारी के अनुसार नवीन प्रजाति डीबीडब्ल्यू 187 का दाना बड़ा एवं चमकदार निकला। इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 11,100 रुपये पुरानी प्रजाति की तुलना में अधिक मिलेंगे।
एचडी-3226 में प्रोटीन अंश ज्यादा होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण इस प्रजाति का गेहूं कुपोषण विरोधी अभियान में भी परोक्ष तौर पर मदद करेगा। डीबीडब्ल्यू-187 अन्य प्रजातियों की तुलना में ज्यादा उत्पादन देगी। इन दोनों प्रजातियों की जिले में बुआई को बढ़ावा दिया जाएगा। -डॉ. एनसी त्रिपाठी, प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
केंद्र के माध्यम से किसानों तक खाद्यान्न की ऐसी प्रजातियां पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जो कृषि पर उनकी लागत कम करके उन्हें ज्यादा मुनाफा दे सकें। परीक्षण में प्रजाति 2967 का लागत लाभ अनुपात 2.71 एवं डीबीडब्ल्यू 187 का लागत लाभ अनुपात 2.99 पाया गया है जो कि पुरानी प्रजातियों की तुलना में बेहतर है। - डॉ. नूतन वर्मा, पादप रोग विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र
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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की डीवीडब्ल्यू-183, डीवीडब्ल्यू-303, आईवीआईआर की 2967 आदि पहले से प्रचलित प्रजातियों से शुरुआत में प्रति हेक्टेयर करीब 60 क्विंटल गेहूं उत्पादन मिला। प्रजातियां पुरानी होते जाने के साथ बीज की जमाव क्षमता में कमी से अब उत्पादन घटकर 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गया है।
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केंद्र के 1.25 हेक्टेयर कृषि प्रक्षेत्र में एचडी-3226 और इतने ही अन्य क्षेत्रफल में पुरानी प्रजाति एचडी-2967 बोई गई। केंद्र प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य विज्ञानी डॉ. एनसी त्रिपाठी और पादप रोग विज्ञानी डॉ. नूतन वर्मा ने पाया कि एचडी-3226 प्रजाति से प्रति हेक्टेयर 57.5 क्विंटल गेहूं मिला जबकि एचडी-2967 प्रजाति से सिर्फ 49.7 क्विंटल उपज प्राप्त हुई। नई प्रजाति ने 12 प्रतिशत अधिक उत्पादन दिया। नई प्रजाति से किसानों को प्रति हेक्टेयर 12 हजार रुपये अधिक आय होने का आकलन किया गया। 2019 में विकसित एचडी-3226 प्रजाति पीले-भूरे रोग, करनाल बंट, पाउडर की तरह लगने वाली फफूंदी, तना गलन आदि रोगों के प्रति अत्यंत प्रतिरोधी है।
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गुणवत्ता के मापदंडों पर खरी साबित हुई एचडी-3226 प्रजाति
इस प्रजाति में उच्च प्रोटीन सामग्री 12.8 प्रतिशत है और उच्च शुष्क क्षमता होने के कारण इसका भंडारण अधिक समय तक किया जा सकता है। इस प्रजाति में जस्ता 36.8 पीपीएम मात्रा में है। इस प्रजाति को उच्चतम रोटी गुणवत्ता अंक 6.7 प्रतिशत दिए गए हैं क्योंकि उसमें पाव रोटी के लिए ग्लूटोन की आदर्श मात्रा (दस प्रतिशत) पाई गई है।
डीबीडब्ल्यू-187 प्रजाति उत्पादन देने में बेहतर
कृषक प्रक्षेत्रों पर गेहूं प्रजातीय परीक्षण ऑन फॉर्म ट्रायल में नई प्रजाति डीबीडब्ल्यू-187 का एचडी-2967 से तुलनात्मक परीक्षण करने पर पाया गया कि नवीन प्रजाति डीबीडब्ल्यू-187 की उपज 60.90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। जबकि एचडी-2967 की उपज 55.35 क्विंटल तक सीमित रही। केंद्र के प्रभारी अधिकारी के अनुसार नवीन प्रजाति डीबीडब्ल्यू 187 का दाना बड़ा एवं चमकदार निकला। इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 11,100 रुपये पुरानी प्रजाति की तुलना में अधिक मिलेंगे।
एचडी-3226 में प्रोटीन अंश ज्यादा होने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण इस प्रजाति का गेहूं कुपोषण विरोधी अभियान में भी परोक्ष तौर पर मदद करेगा। डीबीडब्ल्यू-187 अन्य प्रजातियों की तुलना में ज्यादा उत्पादन देगी। इन दोनों प्रजातियों की जिले में बुआई को बढ़ावा दिया जाएगा। -डॉ. एनसी त्रिपाठी, प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
केंद्र के माध्यम से किसानों तक खाद्यान्न की ऐसी प्रजातियां पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जो कृषि पर उनकी लागत कम करके उन्हें ज्यादा मुनाफा दे सकें। परीक्षण में प्रजाति 2967 का लागत लाभ अनुपात 2.71 एवं डीबीडब्ल्यू 187 का लागत लाभ अनुपात 2.99 पाया गया है जो कि पुरानी प्रजातियों की तुलना में बेहतर है। - डॉ. नूतन वर्मा, पादप रोग विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र