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Shahjahanpur News: साध्य एवं रवियोग में हरिशयनी एकादशी कल
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शाहजहांपुर। इस बार देवशयनी एकादशी छह जुलाई को होगी। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
श्री रुद्र बालाजी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी 6 जुलाई यानि रविवार को है।
महावीर पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि पांच जुलाई शनिवार को सायं 06 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। 6 जुलाई रविवार को रात 08:22 तक रहेगी। एकादशी का पारण 7 जुलाई सोमवार को होगा। पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। जब सूर्य मिथुन राशि में आते हैं तब यह एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से भगवान श्री विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर लगभग चार माह बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर भगवान को उठाया जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है।
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श्री रुद्र बालाजी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी 6 जुलाई यानि रविवार को है।
महावीर पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि पांच जुलाई शनिवार को सायं 06 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। 6 जुलाई रविवार को रात 08:22 तक रहेगी। एकादशी का पारण 7 जुलाई सोमवार को होगा। पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 24 एकादशी होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।
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आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं इस तिथि को ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। जब सूर्य मिथुन राशि में आते हैं तब यह एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से भगवान श्री विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और फिर लगभग चार माह बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर भगवान को उठाया जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है।
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