सजा रह गया मंडप: बरात की जगह आई दूल्हे समेत पांच लोगों की मौत की खबर, सिसकियों में बदलीं खुशियां
शाहजहांपुर के गांव अभायन में रमेश कुमार के घर में शुक्रवार रात बेटी की शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। दूल्हे समेत पांच लोगों की मौत की खबर आने के बाद रमेश और उनकी बेटी की आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। जिस घर में शुक्रवार शाम तक मंगलगीत गूंज रहे थे, वहां अब सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
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शाहजहांपुर के कांट थाना क्षेत्र के अभायन गांव में शुक्रवार की रात रमेश चंद्र की बेटी 19 वर्षीय रिमना की बरात आनी था। रिमना बरात के इंतजार में दुल्हन बनकर बैठी थी। मंडप सजा था। बरात के स्वागत के लिए सारी तैयारियां थीं। लोग दावत भी खा रहे थे। रात करीब साढ़े नौ बजे हादसे में दूल्हे समेत पांच लोगों की मौत की खबर आने के बाद खलबली मच गई। पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई तो बरात में आए लोगों की आंखें भी भर आईं।
खेतीबाड़ी और मेहनत मजदूरी करने वाले रमेश चंद्र की पांच बेटियां व एक बेटा है। दूसरे नंबर की बेटी रिमना की शादी के लिए वह रिश्ता तलाश कर रहे थे। हरदोई में ब्याही उनकी भतीजी ने थाना हरपालपुर के गांव कुड़हा निवासी देवेश के यहां रिश्ता तय कराया था। आठ महीने पहले रमेश ने देवेश के बाबा सियाराम, पिता मेवाराम और बड़े भाई नरवीर से संपर्क कर शादी की बात तय कर दी थी। देवेश और रिमना को भी दोनों पसंद आ गए। शुक्रवार को बरात आनी थी।
रात साढ़े नौ बजे आई हादसे की खबर
रमेश ने बेटी की शादी को धूमधाम से करने के लिए घर के सामने ही पंडाल लगाया था। शाम करीब सात दावत शुरू हो गई थी। लोगों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। रिमना भी अपने कमरे में सहेलियों के बीच बैठकर बरात का इंतजार कर रही थी। रात करीब साढ़े नौ बजे के आसपास दूल्हे के भाई नरवीर ने रमेश को फोन कर हादसे की खबर सुनाई तो रमेश चंद्र का दिल बैठने लगा।
आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला। रमेश ने खुद देवेश के परिवार के अन्य सदस्यों को फोन लगाकर बात की। पता चला कि वह दूल्हे की गाड़ी में सवार दूल्हे समेत पांच लोगों की मौत हो गई। रमेश के घर पर खबर पहुंची तो मंगलगीत की जगह पर चीख-पुकार मच गई। डीजे को भी बंद करा दिया गया। शादी-समारोह में शिरकत करने आए लोग भी बिना खाना खाए लौट गए।
कर्ज लेकर बेटी की बरात का किया था इंतजाम
रमेश चंद्रा का इकलौता बेटा धर्मवीर अभी छोटा है। उनके परिवार में पांच बेटियां हैं। रमेश की कमाई से घर का खर्च पूरा होता था। बेटी रिमना की बरात के लिए उन्होंने कर्ज लेकर तैयारियां की थी। 70 बरातियों समेत 250 लोगों का खाना बनवाया था। बरात चलने से पहले शाम करीब साढ़े छह बजे देवेश के भाई नरवीर से उनकी बात हुई थी। उन्होंने जल्द ही पहुंचने की बात कही थी। लेकिन, दूल्हे, उसके पिता समेत पांच लोगों की मौत के बाद रमेश के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
घर के बाहर लगी भीड़, गांव में पसरा सन्नाटा
आमतौर पर हमेशा अभायन गांव में चहल-पहल रहती है, लेकिन शनिवार को गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था। सिर्फ रमेश के घर के बाहर ही भीड़ लगी थी। उनके दुख में शामिल होने के लिए लोग पहुंच रहे थे। उन्हें सांत्वना दे रहे थे। रमेश के घर के अंदर भी सन्नाटा पसरा था। रिमना को भी लोग समझाने में जुटे थे।