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नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल होने के बाद भी दूर नहीं हुई गोमती की पीड़ा
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नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल होकर भी गोमती बदहाल
पुवायां (शाहजहांपुर)। गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट ने वर्ष 2016 में जिस नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी दी थी, उसमें गंगा की सहायक नदियों के रूप में गोमती, गंडक और शारदा को भी शामिल किया गया था। गंगा की तरह इन नदियों का भी विकास किया जाना था। घोषणा होने पर उम्मीद हो चली थी कि ‘आदिगंगा’ के नाम से पहचानी जाने वाली गोमती भी जल्द ही साफ स्वच्छ हो जाएगी और जलधार निरंतर प्रवाहित हो सकेगी। इससे मानव के साथ ही पशु, पक्षियों को भी बहुत लाभ होगा। हालांकि आज तक गोमती के लिए कुछ नहीं किया गया। इससे नमामि गंगे प्रोजेक्ट में सहायक नदियों को नया जीवन दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
सैकड़ों एकड़ जमीन कब्जाए बैठे हैं भूमाफिया
एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर जंगल की तरह पेड़ खड़े थे। समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली भी गायब होती गई। भूमाफिया ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। अब तो गोमती की धारा तक खेती की जा रही है। यह हाल गोमती के किनारों पर कहीं भी देखा जा सकता है। नमामि गंगे में शामिल होने से अवैध कब्जे हटने की उम्मीद थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
भैंसी नदी को निपटाने के बाद अब गोमती पर नजर
पुवायां क्षेत्र में जमीन की कीमतें बेहिसाब बढ़ी हैं, इस कारण जिसे जहां सरकारी जमीन नजर आती है, कब्जा कर लिया जाता है। यही कारण रहा कि गोमती की सहायक भैंसी नदी का लोगों ने अस्तित्व ही मिटा डाला और खेती करने लगे हैं। अब गोमती की भी यही हालत है, तमाम नदी भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है। गोमती की सहायक झुकना, कठिना नदी का भी यही हाल है।
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शुभारंभ के तीसरे दिन ही दम तोड़ गया था अभियान
वर्ष 2019 में जनपद के प्रभारी मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने डीएम, एसपी, सांसद, विधायक, सीडीओ सहित, सिंचाई विभाग, जल निगम, विकास विभाग के अधिकारियों के साथ गोमती नदी के पन्नघाट पर जल संरक्षण के तहत दोनों ओर पांच-पांच सौ मीटर खोदाई और पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया था। इस दौरान गोमती की अविरल धार बहे, इसके लिए तमाम प्रयास करने के दावे भी किए थे। यह अभियान तीसरे दिन ही दम तोड़ गया। खोदाई भी घाट के दोनों ओर केवल सौ-सौ मीटर तक हो सकी थी। इसके बाद किसी ने गोमती नदी की ओर देखने की जरूरत नहीं समझी।
जल्द ही बंडा क्षेत्र में बीडीओ को साथ लेकर गोमती नदी का मुआयना किया जाएगा और गोमती की धार किस तरह अविरल हो, इसकी जानकारी की जाएगी। इसके बाद कार्ययोजना बनाई जाएगी। गोमती को सदानीरा बनाने के प्रयास किए जाएंगे। - सुशांत श्रीवास्तव, एसडीएम पुवायां
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पुवायां (शाहजहांपुर)। गंगा को अविरल बनाने के लिए कैबिनेट ने वर्ष 2016 में जिस नमामि गंगे कार्ययोजना को मंजूरी दी थी, उसमें गंगा की सहायक नदियों के रूप में गोमती, गंडक और शारदा को भी शामिल किया गया था। गंगा की तरह इन नदियों का भी विकास किया जाना था। घोषणा होने पर उम्मीद हो चली थी कि ‘आदिगंगा’ के नाम से पहचानी जाने वाली गोमती भी जल्द ही साफ स्वच्छ हो जाएगी और जलधार निरंतर प्रवाहित हो सकेगी। इससे मानव के साथ ही पशु, पक्षियों को भी बहुत लाभ होगा। हालांकि आज तक गोमती के लिए कुछ नहीं किया गया। इससे नमामि गंगे प्रोजेक्ट में सहायक नदियों को नया जीवन दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
सैकड़ों एकड़ जमीन कब्जाए बैठे हैं भूमाफिया
एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर जंगल की तरह पेड़ खड़े थे। समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली भी गायब होती गई। भूमाफिया ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। अब तो गोमती की धारा तक खेती की जा रही है। यह हाल गोमती के किनारों पर कहीं भी देखा जा सकता है। नमामि गंगे में शामिल होने से अवैध कब्जे हटने की उम्मीद थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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भैंसी नदी को निपटाने के बाद अब गोमती पर नजर
पुवायां क्षेत्र में जमीन की कीमतें बेहिसाब बढ़ी हैं, इस कारण जिसे जहां सरकारी जमीन नजर आती है, कब्जा कर लिया जाता है। यही कारण रहा कि गोमती की सहायक भैंसी नदी का लोगों ने अस्तित्व ही मिटा डाला और खेती करने लगे हैं। अब गोमती की भी यही हालत है, तमाम नदी भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है। गोमती की सहायक झुकना, कठिना नदी का भी यही हाल है।
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शुभारंभ के तीसरे दिन ही दम तोड़ गया था अभियान
वर्ष 2019 में जनपद के प्रभारी मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने डीएम, एसपी, सांसद, विधायक, सीडीओ सहित, सिंचाई विभाग, जल निगम, विकास विभाग के अधिकारियों के साथ गोमती नदी के पन्नघाट पर जल संरक्षण के तहत दोनों ओर पांच-पांच सौ मीटर खोदाई और पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया था। इस दौरान गोमती की अविरल धार बहे, इसके लिए तमाम प्रयास करने के दावे भी किए थे। यह अभियान तीसरे दिन ही दम तोड़ गया। खोदाई भी घाट के दोनों ओर केवल सौ-सौ मीटर तक हो सकी थी। इसके बाद किसी ने गोमती नदी की ओर देखने की जरूरत नहीं समझी।
जल्द ही बंडा क्षेत्र में बीडीओ को साथ लेकर गोमती नदी का मुआयना किया जाएगा और गोमती की धार किस तरह अविरल हो, इसकी जानकारी की जाएगी। इसके बाद कार्ययोजना बनाई जाएगी। गोमती को सदानीरा बनाने के प्रयास किए जाएंगे। - सुशांत श्रीवास्तव, एसडीएम पुवायां