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सर्वे अभिलेखों में गड़बड़ी मिलने पर 260 गन्ना किसानों को नोटिस जारी, जवाब तलब
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शाहजहांपुर। पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ना रकबा के सर्वे अभिलेखों की जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर जिले की विभिन्न चीनी मिलों से संबद्ध 260 किसानों को गन्ना विकास विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। किसी किसान की अभिलेख में जमीन कम दर्ज मिली तो कई किसानों का गन्ना रकबा खड़ी फसल की तुलना में अधिक मिला। अपर मुख्य सचिव (गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग) संजय आर भूसरेड्डी के निर्देश पर शुरू किए गन्ना रकबा के सत्यापन के विशेष अभियान से खामियों की पोल खुली है। तीन गन्ना पर्यवेक्षकों को दाषी मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जनपद में 1.80 लाख गन्ना किसान हैं। इनमें 1.50 लाख किसान जिले की विभिन्न गन्ना समितियों से, दस हजार किसान चीनी मिल समितियों से और करीब 20 हजार किसान पड़ोसी जनपद हरदोई, लखीमपुर खीरी और फरीदपुर (बरेली) की चीनी मिलों से जुड़े हैं। किसानों को गन्ना रकबा सर्वे के समय इस काम में लगे पर्यवेक्षकों को गन्ना क्षेत्रफल का घोषणा पत्र जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी लगभग 30 फीसदी से ज्यादा किसानों ने घोषणा पत्र भरकर जमा नहीं किए हैं। घोषणा पत्र जमा करने की अंतिम तिथि एक बार फिर 15 दिन बढ़ाकर 30 नवंबर की जा चुकी है।
विभागीय अधिकारी पहले ही चेतावनी जारी कर चुके हैं कि नियत तिथि तक घोषणा पत्र जमा नही करने वाले किसानों का सट्टा लॉक कर दिया जाएगा और ऐसी स्थिति में उन्हें चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति करने का मौका नहीं मिलेगा। इस बीच, अधिकारियों में यह संदेह भी गहराया कि जिन किसानों ने अभिलेखों में रकबा ज्यादा दर्ज कराया, वही घोषणा पत्र देने से कतरा रहे हैं। इसी आशंका को मिटाने के लिए गत 15 नवंबर से चीनी मिलों और गन्ना विकास परिषदों के पर्यवेक्षकों की संयुक्त टीमों ने अभिलेखों से गन्ना रकबा का गाटावार मिलान करने का अभियान शुरू किया जो दस दिसंबर तक चलेगा, लेकिन अभी तक की जांच में ही तमाम किसानों के सट्टा में गड़बड़ी सामने आ गई।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि ऐसे सभी किसानों को नोटिस जारी किए हैं, जिनकी सर्वे अभिलेखों में जमीन कम चढ़ी है या फिर खतौनी में दर्ज रकबा की तुलना में गन्ना रकबा अधिक दर्शाया है। बताया कि इन खामियों के लिए निगोही गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक राकेश कुमार, टेकचंद्र और राम अवतार को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित पत्राचार किया है।
किसानों को नोटिस जारी करने का मकसद यह पता लगाना है कि सर्वे अभिलेखों में गड़बड़ी जानबूझकर की गई है अथवा लिपिकीय त्रुटि का परिणाम है। घोषणा पत्र जमा करने की अंतिम अवधि बीतने के बाद ऐसे किसानों की मिलों को गन्ना आपूर्ति रोक दी जाएगी जो घोषणा पत्र जमा नहीं करेंगे। नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं देने वाले किसानों का सट्टा भी लॉक कर दिया जाएगा और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी होंगे।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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जनपद में 1.80 लाख गन्ना किसान हैं। इनमें 1.50 लाख किसान जिले की विभिन्न गन्ना समितियों से, दस हजार किसान चीनी मिल समितियों से और करीब 20 हजार किसान पड़ोसी जनपद हरदोई, लखीमपुर खीरी और फरीदपुर (बरेली) की चीनी मिलों से जुड़े हैं। किसानों को गन्ना रकबा सर्वे के समय इस काम में लगे पर्यवेक्षकों को गन्ना क्षेत्रफल का घोषणा पत्र जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी लगभग 30 फीसदी से ज्यादा किसानों ने घोषणा पत्र भरकर जमा नहीं किए हैं। घोषणा पत्र जमा करने की अंतिम तिथि एक बार फिर 15 दिन बढ़ाकर 30 नवंबर की जा चुकी है।
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विभागीय अधिकारी पहले ही चेतावनी जारी कर चुके हैं कि नियत तिथि तक घोषणा पत्र जमा नही करने वाले किसानों का सट्टा लॉक कर दिया जाएगा और ऐसी स्थिति में उन्हें चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति करने का मौका नहीं मिलेगा। इस बीच, अधिकारियों में यह संदेह भी गहराया कि जिन किसानों ने अभिलेखों में रकबा ज्यादा दर्ज कराया, वही घोषणा पत्र देने से कतरा रहे हैं। इसी आशंका को मिटाने के लिए गत 15 नवंबर से चीनी मिलों और गन्ना विकास परिषदों के पर्यवेक्षकों की संयुक्त टीमों ने अभिलेखों से गन्ना रकबा का गाटावार मिलान करने का अभियान शुरू किया जो दस दिसंबर तक चलेगा, लेकिन अभी तक की जांच में ही तमाम किसानों के सट्टा में गड़बड़ी सामने आ गई।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि ऐसे सभी किसानों को नोटिस जारी किए हैं, जिनकी सर्वे अभिलेखों में जमीन कम चढ़ी है या फिर खतौनी में दर्ज रकबा की तुलना में गन्ना रकबा अधिक दर्शाया है। बताया कि इन खामियों के लिए निगोही गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक राकेश कुमार, टेकचंद्र और राम अवतार को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित पत्राचार किया है।
किसानों को नोटिस जारी करने का मकसद यह पता लगाना है कि सर्वे अभिलेखों में गड़बड़ी जानबूझकर की गई है अथवा लिपिकीय त्रुटि का परिणाम है। घोषणा पत्र जमा करने की अंतिम अवधि बीतने के बाद ऐसे किसानों की मिलों को गन्ना आपूर्ति रोक दी जाएगी जो घोषणा पत्र जमा नहीं करेंगे। नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं देने वाले किसानों का सट्टा भी लॉक कर दिया जाएगा और इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी होंगे।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी