हत्यारे चार भाइयों को उम्रकैद
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शाहजहांपुर। अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम गोपाल उपाध्याय ने दोहरी हत्या के मुकद्दमे में सोमवार को फैसला सुनाते हुए चार भाइयों को उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह घटना करीब 17 साल पहले बंडा थाना क्षेत्र के गांव मुड़िया छावन में हुई थी। इस झगड़े की शुरूआत ट्रैक्टर की टक्कर लगने से यूके लिप्टस के पेड़ टूटने को लेकर हुई थी। सजा पाने वाले चार भाइयों में दो संत कुमार और राजेश की मुकद्दमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। जबकि सजा सुनाए जाने के दौरान तीसरा मुजरिम विनोद गैरहाजिर रहा। उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर कुर्की का आदेश दिया गया है। चौथा मुजरिम प्रमोद को जेल भेज दिया गया।
कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के अनुसार यह वारदात 17 अगस्त 1998 को हुई थी। इससे तीन दिन पहले बंडा के गांव मुड़िया छावन में चंद्रभाल तिवारी का लिप्टस का पेड़ सेवाराम के ट्रैक्टर की टक्कर से टूट गया था। पर गुस्साए चंद्रभाल के चारों बेटे एकजुट होकर घटना वाली सुबह करीब नौ बजे सेवाराम के दरवाजे पर लाठी, बंदूक, तमंचे लेकर जा धमके और गालियां देना शुरू कर दिया। इसका चाचा नन्हेंलाल ने विरोध किया तो आरोपी पक्ष ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें गोली लगने से नन्हेंलाल की मौके पर मौत गई थी। गोली से जख्मी मंगरेलाल की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। जबकि तमंचे के छर्रे से वीरपाल, गोवर्धनलाल, राजरानी, देवकी रानी और नीलकंठ घायल हुए थे। रामऔतार और बाबूराम को लाठी डंडे से पीटा गया था। सरकारी वकील बंशीलाल की ओर से सुनवाई के दौरान 13 गवाह पेश किए। कोर्ट ने साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद 22 जनवरी को कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली और सोमवार 25 जनवरी को फैसला सुना दिया।