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फोरलेन के बदले ग्रामीणों ने मांगे आवासीय भूमि पट्टे
शाहजहांपुर।
Updated Thu, 04 Jun 2015 10:59 PM IST
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नेशनल हाईवे को फोरलेन बनाए जाने पर अटसलिया गांव के तमाम बाशिंदों के मकानों और कृषि भूमि पर अधिग्रहण का साया मंडरा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को भविष्य में बेघर हो जाने का डर सताने लगा है। इसी आशंका को मिटाने के लिए अटसलिया के ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को फिर मुख्यालय पर आकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। बाद में ग्रामीणों का शिष्टमंडल एसडीएम सदर से मिला और उन्हें ज्ञापन देकर अधिग्रहीत जमीन के बदले रहने के लिए आवासीय पट्टे दिए जाने की मांग की।
लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को शाहजहांपुर-सीतापुर के बीच फोरलेन बनाने के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन का चिन्हांकन कार्य शुरू होने के बाद से एनएच-24 के किनारे बसे अटसलिया गांव के बाशिंदे बेहद परेशान हैं। उन्हें यह चिंता सता रही है कि उनके मकान और खेत फोरलेन में समाने पर उनके आगे परिवारों की गुजर-बसर का संकट पैदा हो जाएगा। इसी फिक्र को लेकर ग्रामीणों ने बीते मंगलवार को भी कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया था।
उस वक्त डीएम समेत सभी प्रमुख अधिकारी सदर तहसील में आयोजित तहसील दिवस में फरियादियों की सुनवाई करने में व्यस्त थे। इस पर ग्रामीणों ने तहसील जाकर प्रदर्शन किया और डीएम शुभ्रा सक्सेना को ज्ञापन देकर रहने के लिए आवासीय पट्टे दिलाने की मांग की थी। डीएम ने उचित निर्णय करने का आश्वासन भी दिया, लेकिन ग्रामीणों की चिंता उन्हें बृहस्पतिवार को फिर कलक्ट्रेट खींच लाई।
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प्रदर्शन के बाद ग्रामीण एसडीएम सदर एपी श्रीवास्तव से मिले और उन्हें ज्ञापन देकर बताया कि वे सभी बेहद गरीब परिवारों के हैं और फोरलेन में मकान जाने के बाद इतना मुआवजा भी नहीं मिल पाएगा कि अपने बूते जमीन खरीदने के बाद मकान बना सकें। इसलिए अधिग्रहीत होने वाले मकानों और कृषि जमीन के बदले ग्राम समाज की नवीन परती भूमि के आवासीय पट्टे जल्द दिलाएं जाएं। प्रदर्शन में रामसनेही, बटेश्वर, बंशी लाल, गंगा राम, फूलमती, अंगने लाल, दिनेश कुमार, मलिखान आदि शामिल रहे।
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लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को शाहजहांपुर-सीतापुर के बीच फोरलेन बनाने के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन का चिन्हांकन कार्य शुरू होने के बाद से एनएच-24 के किनारे बसे अटसलिया गांव के बाशिंदे बेहद परेशान हैं। उन्हें यह चिंता सता रही है कि उनके मकान और खेत फोरलेन में समाने पर उनके आगे परिवारों की गुजर-बसर का संकट पैदा हो जाएगा। इसी फिक्र को लेकर ग्रामीणों ने बीते मंगलवार को भी कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया था।
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उस वक्त डीएम समेत सभी प्रमुख अधिकारी सदर तहसील में आयोजित तहसील दिवस में फरियादियों की सुनवाई करने में व्यस्त थे। इस पर ग्रामीणों ने तहसील जाकर प्रदर्शन किया और डीएम शुभ्रा सक्सेना को ज्ञापन देकर रहने के लिए आवासीय पट्टे दिलाने की मांग की थी। डीएम ने उचित निर्णय करने का आश्वासन भी दिया, लेकिन ग्रामीणों की चिंता उन्हें बृहस्पतिवार को फिर कलक्ट्रेट खींच लाई।
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प्रदर्शन के बाद ग्रामीण एसडीएम सदर एपी श्रीवास्तव से मिले और उन्हें ज्ञापन देकर बताया कि वे सभी बेहद गरीब परिवारों के हैं और फोरलेन में मकान जाने के बाद इतना मुआवजा भी नहीं मिल पाएगा कि अपने बूते जमीन खरीदने के बाद मकान बना सकें। इसलिए अधिग्रहीत होने वाले मकानों और कृषि जमीन के बदले ग्राम समाज की नवीन परती भूमि के आवासीय पट्टे जल्द दिलाएं जाएं। प्रदर्शन में रामसनेही, बटेश्वर, बंशी लाल, गंगा राम, फूलमती, अंगने लाल, दिनेश कुमार, मलिखान आदि शामिल रहे।