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ऊंची उड़ान पर हैं शहर की बेटियां

Sat, 10 Oct 2015 11:41 PM IST
अजय अवस्थी/शाहजहांपुर।
अजय अवस्थी/शाहजहांपुर। Updated Sat, 10 Oct 2015 11:41 PM IST
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Flying high on the daughters of the town
कहते हैं कि आज के दौर में लड़कियां भी किसी से कम नहीं हैं। उनकी प्रतिभा को कमतर आकना भूल ही कही जाएगी। क्रांतिकारियों की नगरी भी अपनी बेटियों को लेकर गर्व करता है। यहां की अपूर्वा विश्वकर्मा, वैशाली लाल ने जहां खेल की दुनियां में जनपद को गौरवांवित किया है, वहीं दीपा सिंह ने मॉडलिंग की दुनिया से होते हुए छोटे परदे तक का सफर तय किया है।
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इसी कड़ी में एक नाम और आता है वह शालू यादव का। शालू यादव रंगमंच की स्थापित कलाकार बन चुकी हैं और उनका चयन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली में हो गया है। जहां वह अभिनय की बारीकियों से रूबरू हो रही हैं। गायन के क्षेत्र में बात करें तो अंकिता कपूर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अंकिता कपूर मंच का वह नाम है, जिसने सुरों के माध्यम से जनपद को नई पहचान दी है।
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उदित नारायण के संग मंच साझा करती है अंकिता
चौक क्षेत्र में पटी गली निवासी अंकिता कपूर सधे कदमों से मंजिल की ओर बढ़ चली हैं। अंकिता के गले में मां सरस्वती का वास है, यह उन्होंने सिद्ध भी किया है। बचपन से ही गाने की शौकीन अंकिता इन दिनों स्टेज शो में मशगूल हैं। वह लखनऊ में ही ग्वालियर घराने के पंडित ऋषिकेश गानगुड़े से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीख रही हैं। अंकिता बताती हैं कि वह देश के लगभग सभी महानगरों में स्टेज शो कर चुकी हैं। पार्श्व गायक उदित नारायण, विनोद राठौर आदि के साथ स्टेज शो करने में काफी अच्छा अनुभव रहा। सीनियर्स के साथ बहुत कुछ सीखने को मिलता है। अंकिता की सफलता से पिता सुनील कपूर और माता रचना कपूर बहुत गदगद हैं।
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रंगमंच की अदाकारा शालू पहुंची एनएसडी
शालू यादव अपने अभिनय से नाटकों के किरदारों को जीवित कर देती हैं। शालू को चाहे जैसा किरदार मिला हो, उसने अपने अभिनय से उसे जिया है और ढेरों पुरस्कार भी झटके हैं। अॅाल इंडिया महोत्सवों में शालू ने ‘यहूदी की लड़की’,‘कथा एक कंस की’, ‘कथा कही एक जले पेड़ ने’,‘रुस्तम-सोहराब’, ‘कह रैदास खलास चमारा’ आदि नाटकों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता है। गुड़गांव में उन्होंने लगातार तीन साल यह पुरस्कार लेकर हैट्रिक ही नहीं जमाई, बल्कि अपने अभिनय का लोहा भी मनवाया है। एकल नाटक ‘नाचनी’ केे लिए वह बनारस में सम्मानित की जा चुकी हैं। वर्ष 2013 में छोटे परदे पर शुरू हुए अभिनय के पहले रियलिटी शो बिग फेम अवार्ड में शालू ने अभिनय के झंडे गाड़ते हुए विजेता बनने का भी गौरव हासिल किया और जनपद की पहचान बढ़ाई। शालू यादव की दमदार भूमिकाओं के सभी कायल हैं।
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