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रातें जागकर काट रहे बाढ़ से घिरे तटवर्ती गांवों के बाशिंदे
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गांव आजाद नगर के घरों में भरा बाढ़ का पानी । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। कलान तहसील में परौर से लेकर मिर्जापुर और अल्हागंज तक गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांवों के ग्रामीण बाढ़ की आशंका में रातें जागकर काट रहे है। इस बीच, सिंचाई विभाग में अधीक्षण अभियंता प्रभाकर प्रसाद ने हरदोई जाते समय कुछ देर यहां रुककर अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर से जिले में बाढ़ के बचाव से संबंधित कार्यों का ब्योरा लिया और उनमें तेजी लाने के निर्देश दिए।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा के जलस्तर में बुधवार को तीन सेमी की मामूली कमी आई, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं। रामगंगा का जलस्तर भी मात्र दो सेमी कम हुआ है। फिलहाल, गंगा किनारे के गांव आजादनगर के कई घरों में अब भी पानी भरा होने से घरों में ईंधन भीग जाने से खाना बनाने में दिक्कत हो रही है।
ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को पके-पकाए भोजन की दरकार है, लेकिन अब तक उन्हें भोजन-पानी सुलभ कराने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। गंगा के खादर में बसे पैलानी उत्तर ग्राम पंचायत के मजरा इस्लामनगर, मस्जिद नगला तथा इन गांवों से लगे हुए फर्रुखाबाद जिले के ग्राम कमथरी और चितार अब भी बाढ़ से घिरे हैं। बाढ़ प्रभावित आजानगर निवासी सत्तार, बुधुआ, मो. खलील, नदीम आदि ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन से मिली नाव की मदद से बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने में सहूलियत हुई है, लेकिन घरों में खाना नहीं पकने से परिवारों को भूखा रहना पड़ रहा है। संवाद
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा के जलस्तर में बुधवार को तीन सेमी की मामूली कमी आई, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं। रामगंगा का जलस्तर भी मात्र दो सेमी कम हुआ है। फिलहाल, गंगा किनारे के गांव आजादनगर के कई घरों में अब भी पानी भरा होने से घरों में ईंधन भीग जाने से खाना बनाने में दिक्कत हो रही है।
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ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को पके-पकाए भोजन की दरकार है, लेकिन अब तक उन्हें भोजन-पानी सुलभ कराने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। गंगा के खादर में बसे पैलानी उत्तर ग्राम पंचायत के मजरा इस्लामनगर, मस्जिद नगला तथा इन गांवों से लगे हुए फर्रुखाबाद जिले के ग्राम कमथरी और चितार अब भी बाढ़ से घिरे हैं। बाढ़ प्रभावित आजानगर निवासी सत्तार, बुधुआ, मो. खलील, नदीम आदि ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन से मिली नाव की मदद से बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने में सहूलियत हुई है, लेकिन घरों में खाना नहीं पकने से परिवारों को भूखा रहना पड़ रहा है। संवाद
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