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गंगा का जलस्तर बढ़ा, रामगंगा कर रही कटान
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शाहजहांपुर के परौर में बाढ़ से हो रहे कटान को रोकने के लिए बालू की बोरियां डालकर अस्थायी ठोकरें ब?
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। उत्तराखंड और आसपास हुई बारिश के कारण बीते 24 घंटों में कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा दस सेमी बढ़ गई। अन्य बैराजों से पानी का निकास अभी उतना ही है। ऐसे में बुधवार को रामगंगा 25 सेमी घट गई, बावजूद इसके जलस्तर में कमी आने से अब उसने परौर क्षेत्र से लेकर कोलाघाट पुल तक भूमि कटान शुरू कर दिया है। इधर, शहर के समीप गर्रा का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन खन्नौत स्थिर है।
सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बुधवार को परौर क्षेत्र में रामगंगा के तटीय इलाकों का भ्रमण कर भूमि कटान वाले स्थानों का नजरी नक्शा तैयार किया।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को बुधवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से 51740 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। यह मात्रा बीते दिन की तुलना में करीब आठ हजार क्यूसेक कम थी, लेकिन कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा में पानी कम होने के बजाय दस सेमी बढ़कर नदी का जलस्तर 142.77 मीटर हो गया।
इसी तरह कालागढ़, खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से रामगंगा में 15769 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। ऐसे में बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन 25 सेमी कम होकर 159.70 मीटर हो गया। ड्यूनी डाम से पानी की निकासी घटकर मात्र 306 क्यूसेक रह जाने से शहर के समीप गर्रा 50 सेमी कम हो गई, लेकिन रात में हुई बारिश के कारण खन्नौत नदी का जलस्तर 143.45 मीटर पर स्थिर रहा।
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सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र का कहना है कि गंगा में पानी बदायूं होकर यहां तक आने में 24 से 36 घंटे लगते हैं। चूंकि, बीते दिन नरौरा बैराज से पानी की निकासी आठ हजार क्यूसेक ज्यादा हुई और रात में वर्षा भी हुई है। इसलिए नरौरा से एक दिन पहले जारी हो चुका पानी यहां अब पहुंचने से गंगा का जलस्तर बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि गंगा समेत जिले की सभी नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रहीं हैं। इसलिए उनके तटवर्ती गांवों में बाढ़ का कोई खतरा नहीं होने के बावजूद विभागीय अभियंता पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। परौर क्षेत्र में रामगंगा से हो रहे भूमि कटान को रोकने के लिए सहायक अभियंता अनूप कुमार के नेतृत्व में अवर अभियंताओं की टीम परौर क्षेत्र में कैंप कर रही है।
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रामगंगा के निशाने पर आया नारायणनगर पश्चिमी
परौर। उतार पर बह रही रामगंगा तटवर्ती गांव नारायणनगर पश्चिमी को अपने निशाने पर लेकर वहां तेजी से भूमि कटान कर रही है। इससे आसपास के कई अन्य गांवों के लोग बाढ़ को लेकर बेहद तनावग्रस्त हैं क्योंकि दो दशक पहले भी नदी इस गांव को तबाह कर चुकी है। नारायणनगर पश्चिमी के बुजुर्गों के अनुसार सन 1894 के करीब रामगंगा राजमहल परौर के सामने बहती थी, जो अब कूड़ा ताल के नाम से जाना जाता है।
किवदंती है कि परौर रियासत के तत्कालीन राजा नरायन सिह ने रामगंगा को गुप्त दान दिया और उसी रात नदी ने परौर को छोड़कर अपनी धारा दहिलिया गांव की ओर मोड़ ली। तब से कोना याकूबपुर, बिरिया, बोझी, कुड़रिया, चपरा, रठेली, अमृतापुर, चचुआपुर, गदाई शरीफ आदि गांवों की कृषि भूमि रामगंगा में समा चुकी है। वर्ष 2000 में आई बाढ़ में नारायणनगर पूर्वी और मंझा गांव की काफी जमीनें कट चुकी हैं और अब नारायणनगर पश्चिमी रामगंगा के निशाने पर है। कटान रोकने को पहले बम्बू क्रेट लगाए गए। तेज कटान के सामने बम्बू क्रेट फेल हो गए तो बालू की बोरियों की ठोकरें बनाई गईं, लेकिन वह भी बह गईं। अब जिओ ट्यूब की ठोकरें लगाई गई हैं, लेकिन तेज धारा के सामने वह भी टिक नहीं रही हैं। कटान का जायजा लेने के लिए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर ने जेई मोहित कुमार, श्याम कुमार और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ परौर में कटान वाले स्थान का भ्रमण कर वहां के फौरी मानचित्र बनवाए। साथ ही अधीनस्थों को कटान रोकने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान क्षेत्र के ओमकार मिश्रा, रामगोपाल मिश्रा, जयवीर सिंह, राजीव सिंह, संतेाष कुमार गुप्ता, आनन्द गुप्ता, विपिन कुमार दीक्षित, अवधेश कश्यप, अजय कुमार सिंह आदि ने उनसे कटान रोकने के ठोस उपाय करने की मांग की।
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बाढ़ प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थान चिन्हित
डीएम इंद्र विक्रम सिंह के अनुसार नदियों की अब तक की स्थिति के अनुसार अभी बाढ़ के हालात नहीं बने हैं, लेकिन यदि आने वाले समय में बाढ़ का और पानी आता है तो कुछ गांवों का आबादी और कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त एवं समुचित प्रबंध कर लिए गए हैं। इसके तहत ऊंचे स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को घरों से निकालकर वहां ठहराया जा सके। डीएम के अनुसार बाढ़ चौकियां अलर्ट की जा चुकी हैं। राजस्व विभाग टीमों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों का भ्रमण भी कर लिया गया है और बाढ़ की चेतावनी पर भी निगाह रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ निरोधक कार्य समय से पूर्व ही पूरे कर लिए गए हैं। रामगंगा के बहाव क्षेत्र में कुछ नए स्थानों पर कटान की सूचना मिली है। इन ठिकानों को बाढ़ प्रबंधन योजना में शामिल कर वहां तटबंध बनाने का कार्य कराया जाएगा।
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केसीनगला में रामगंगा की भेंट चढ़ रही कृषि भूमि
जैतीपुर। राम गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव केसीनगला के ग्रामीण भूमि कटान से जूझ रहे हैं। नदी काफी तेजी से उपजाऊ जमीनें काट कर रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण किसान तटीय खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। जानवरों के चारा को लेकर भी ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से इस समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा चुके, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। गांव के रतीराम का कहना है कि कटान इसी तरह जारी रहा तो कई किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इसी गांव के अनिल के अनुसार गांव के नजदीक नदी की धारा आने से बच्चों का उधर जाना खतरे से खाली नहीं रहा है। तिलहर के एसडीएम सुरेंद्र कुमार ने बताया कि केसीनगला गांव कर्मचारियों को भेजकर कटान दिखवाकर जरूरी व्यवस्था कराई जाएगी। संवाद
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डीएम के निर्देश पर बुधवार को विभागीय अभियंताओं की पूरी टीम के साथ परौर जाकर वहां भूमि कटान वाले स्थान देखे हैं। उनके नजरी नक्शा बनवाए गए हैं, जिससे कि कटान की रोकथाम के लिए जरूरी कार्य कराए जा सकें। अभी बाढ़ की स्थिति नहीं हैं, लेकिन कटान रोकने के लिए तटबंध बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा और अनुमति मिलते ही उस पर काम शुरू करा दिया जाएगा।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बुधवार को परौर क्षेत्र में रामगंगा के तटीय इलाकों का भ्रमण कर भूमि कटान वाले स्थानों का नजरी नक्शा तैयार किया।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को बुधवार सुबह मिली सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से 51740 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। यह मात्रा बीते दिन की तुलना में करीब आठ हजार क्यूसेक कम थी, लेकिन कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा में पानी कम होने के बजाय दस सेमी बढ़कर नदी का जलस्तर 142.77 मीटर हो गया।
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इसी तरह कालागढ़, खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से रामगंगा में 15769 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। ऐसे में बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन 25 सेमी कम होकर 159.70 मीटर हो गया। ड्यूनी डाम से पानी की निकासी घटकर मात्र 306 क्यूसेक रह जाने से शहर के समीप गर्रा 50 सेमी कम हो गई, लेकिन रात में हुई बारिश के कारण खन्नौत नदी का जलस्तर 143.45 मीटर पर स्थिर रहा।
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सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र का कहना है कि गंगा में पानी बदायूं होकर यहां तक आने में 24 से 36 घंटे लगते हैं। चूंकि, बीते दिन नरौरा बैराज से पानी की निकासी आठ हजार क्यूसेक ज्यादा हुई और रात में वर्षा भी हुई है। इसलिए नरौरा से एक दिन पहले जारी हो चुका पानी यहां अब पहुंचने से गंगा का जलस्तर बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि गंगा समेत जिले की सभी नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रहीं हैं। इसलिए उनके तटवर्ती गांवों में बाढ़ का कोई खतरा नहीं होने के बावजूद विभागीय अभियंता पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। परौर क्षेत्र में रामगंगा से हो रहे भूमि कटान को रोकने के लिए सहायक अभियंता अनूप कुमार के नेतृत्व में अवर अभियंताओं की टीम परौर क्षेत्र में कैंप कर रही है।
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रामगंगा के निशाने पर आया नारायणनगर पश्चिमी
परौर। उतार पर बह रही रामगंगा तटवर्ती गांव नारायणनगर पश्चिमी को अपने निशाने पर लेकर वहां तेजी से भूमि कटान कर रही है। इससे आसपास के कई अन्य गांवों के लोग बाढ़ को लेकर बेहद तनावग्रस्त हैं क्योंकि दो दशक पहले भी नदी इस गांव को तबाह कर चुकी है। नारायणनगर पश्चिमी के बुजुर्गों के अनुसार सन 1894 के करीब रामगंगा राजमहल परौर के सामने बहती थी, जो अब कूड़ा ताल के नाम से जाना जाता है।
किवदंती है कि परौर रियासत के तत्कालीन राजा नरायन सिह ने रामगंगा को गुप्त दान दिया और उसी रात नदी ने परौर को छोड़कर अपनी धारा दहिलिया गांव की ओर मोड़ ली। तब से कोना याकूबपुर, बिरिया, बोझी, कुड़रिया, चपरा, रठेली, अमृतापुर, चचुआपुर, गदाई शरीफ आदि गांवों की कृषि भूमि रामगंगा में समा चुकी है। वर्ष 2000 में आई बाढ़ में नारायणनगर पूर्वी और मंझा गांव की काफी जमीनें कट चुकी हैं और अब नारायणनगर पश्चिमी रामगंगा के निशाने पर है। कटान रोकने को पहले बम्बू क्रेट लगाए गए। तेज कटान के सामने बम्बू क्रेट फेल हो गए तो बालू की बोरियों की ठोकरें बनाई गईं, लेकिन वह भी बह गईं। अब जिओ ट्यूब की ठोकरें लगाई गई हैं, लेकिन तेज धारा के सामने वह भी टिक नहीं रही हैं। कटान का जायजा लेने के लिए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर ने जेई मोहित कुमार, श्याम कुमार और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ परौर में कटान वाले स्थान का भ्रमण कर वहां के फौरी मानचित्र बनवाए। साथ ही अधीनस्थों को कटान रोकने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान क्षेत्र के ओमकार मिश्रा, रामगोपाल मिश्रा, जयवीर सिंह, राजीव सिंह, संतेाष कुमार गुप्ता, आनन्द गुप्ता, विपिन कुमार दीक्षित, अवधेश कश्यप, अजय कुमार सिंह आदि ने उनसे कटान रोकने के ठोस उपाय करने की मांग की।
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बाढ़ प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थान चिन्हित
डीएम इंद्र विक्रम सिंह के अनुसार नदियों की अब तक की स्थिति के अनुसार अभी बाढ़ के हालात नहीं बने हैं, लेकिन यदि आने वाले समय में बाढ़ का और पानी आता है तो कुछ गांवों का आबादी और कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त एवं समुचित प्रबंध कर लिए गए हैं। इसके तहत ऊंचे स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को घरों से निकालकर वहां ठहराया जा सके। डीएम के अनुसार बाढ़ चौकियां अलर्ट की जा चुकी हैं। राजस्व विभाग टीमों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों का भ्रमण भी कर लिया गया है और बाढ़ की चेतावनी पर भी निगाह रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ निरोधक कार्य समय से पूर्व ही पूरे कर लिए गए हैं। रामगंगा के बहाव क्षेत्र में कुछ नए स्थानों पर कटान की सूचना मिली है। इन ठिकानों को बाढ़ प्रबंधन योजना में शामिल कर वहां तटबंध बनाने का कार्य कराया जाएगा।
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केसीनगला में रामगंगा की भेंट चढ़ रही कृषि भूमि
जैतीपुर। राम गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव केसीनगला के ग्रामीण भूमि कटान से जूझ रहे हैं। नदी काफी तेजी से उपजाऊ जमीनें काट कर रही है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण किसान तटीय खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। जानवरों के चारा को लेकर भी ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से इस समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा चुके, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। गांव के रतीराम का कहना है कि कटान इसी तरह जारी रहा तो कई किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इसी गांव के अनिल के अनुसार गांव के नजदीक नदी की धारा आने से बच्चों का उधर जाना खतरे से खाली नहीं रहा है। तिलहर के एसडीएम सुरेंद्र कुमार ने बताया कि केसीनगला गांव कर्मचारियों को भेजकर कटान दिखवाकर जरूरी व्यवस्था कराई जाएगी। संवाद
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डीएम के निर्देश पर बुधवार को विभागीय अभियंताओं की पूरी टीम के साथ परौर जाकर वहां भूमि कटान वाले स्थान देखे हैं। उनके नजरी नक्शा बनवाए गए हैं, जिससे कि कटान की रोकथाम के लिए जरूरी कार्य कराए जा सकें। अभी बाढ़ की स्थिति नहीं हैं, लेकिन कटान रोकने के लिए तटबंध बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा और अनुमति मिलते ही उस पर काम शुरू करा दिया जाएगा।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग