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पांच एकड़ का गन्ना 70 हजार में नीलाम
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां।
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:56 PM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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अवैध कब्जा कर बोई गई फसल, कब्जेदार के नाम कर दी नीलामी
पांच लाख बताई जा रही गन्ने की कीमत
एक नेता के दबाव में हुई दोबारा हुई नीलामी
राजस्व कर्मियों की मिलीभगत और एक नेता के दबाव में लगभग पांच लाख रुपये का गन्ना मात्र 71 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया। खास बात यह है कि पहले यही गन्ना मात्र 20 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया था और नीलामी की राशि जमा होने के साथ ही पुलिस को गन्ना कटवाने का आदेश भी दे दिया गया था।
गांव फरेंदा बरा में चारागाह की आठ एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर कई लोगों ने गन्ना, मसूर आदि फसलें बोईं। इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई तो जांच में आरोप सही पाए जाने पर फसल को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की। लेकिन इसी बीच अवैध कब्जेदारों ने मसूर की फसल को काट लिया। पांच एकड़ भूमि पर गन्ने की फसल खड़ी रह गई, जिसे सात नवंबर को मात्र 20 हजार रुपये में गांव बेला छेदा के शशबिंद के नाम नीलाम कर दिया गया। शशबिंद ने रुपये जमा कर दिए और एसडीएम ने 12 नवंबर को शशबिंद के प्रार्थनापत्र पर पुलिस को गन्ने की फसल कटवाए जाने और बाधा पहुंचाने वालों पर कार्रवाई का आदेश भी दे दिया गया।
पांच लाख रुपये की गन्ने की फसल मात्र 20 हजार रुपये में नीलाम कर दिए जाने की जानकारी एक नेताजी को हुई तो उन्होंने मामले में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। 16 नवंबर को गन्ने की नीलामी निरस्त कर 17 नवंबर को गांव में फिर से नीलामी किए जाने का ढिढोरा पिटवाया गया। नीलामी की तारीख 17 नवंबर बताई गई। गांव के तमाम लोग नीलामी में भाग लेने तहसील पहुंचे तो बताया गया कि नीलामी गांव में होगी, गांव पहुंचने पर नीलामी के बारे में कोई सूचना नहीं मिली और कोई अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद 18 नवंबर को नीलामी हो जाने की जानकारी दे दी गई। बताया गया कि नीलामी 71 हजार रुपये में हो गई है। पांच लाख रुपये का गन्ना मात्र 71 हजार रुपये में नीलाम किए जाने पर अधिकारियों पर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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दो सगे भाइयों सहित चार ने लिया नीलामी में भाग
पुवायां। नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि 18 नवंबर को उनकी अध्यक्षता में तहसील में गन्ने की नीलामी की गई। इसमें गांव फरेंदा बरा के सगे भाई छन्ने, शीतलाचरण इसी गांव के पूरन और सुआलाल ने भाग लिया। शीतलाचरण ने सबसे ऊंची 71 हजार रुपये की बोली लगाई। नीलामी उनके पक्ष में कर दी गई। पांच एकड़ गन्ने की बोली मात्र 71 रुपये रहने पर उन्होंने कहा कि काफी गन्ना लोग काट चुके हैं। बड़ा सवाल है कि प्रशासन के कब्जे में लिया गया गन्ना जिन्होंने काटा उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
पहले मात्र 20 हजार में नीलामी हुई थी जिस कारण नीलामी को निरस्त कर दिया गया था। आज की नीलामी के बारे में जानकारी नहीं है। यदि बोली कम लगी है तो गन्ने की फिर से नीलामी कराई जाएगी। -- जयपाल सिंह, एसडीएम पुवायां
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पांच लाख बताई जा रही गन्ने की कीमत
एक नेता के दबाव में हुई दोबारा हुई नीलामी
राजस्व कर्मियों की मिलीभगत और एक नेता के दबाव में लगभग पांच लाख रुपये का गन्ना मात्र 71 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया। खास बात यह है कि पहले यही गन्ना मात्र 20 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया था और नीलामी की राशि जमा होने के साथ ही पुलिस को गन्ना कटवाने का आदेश भी दे दिया गया था।
गांव फरेंदा बरा में चारागाह की आठ एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर कई लोगों ने गन्ना, मसूर आदि फसलें बोईं। इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई तो जांच में आरोप सही पाए जाने पर फसल को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की। लेकिन इसी बीच अवैध कब्जेदारों ने मसूर की फसल को काट लिया। पांच एकड़ भूमि पर गन्ने की फसल खड़ी रह गई, जिसे सात नवंबर को मात्र 20 हजार रुपये में गांव बेला छेदा के शशबिंद के नाम नीलाम कर दिया गया। शशबिंद ने रुपये जमा कर दिए और एसडीएम ने 12 नवंबर को शशबिंद के प्रार्थनापत्र पर पुलिस को गन्ने की फसल कटवाए जाने और बाधा पहुंचाने वालों पर कार्रवाई का आदेश भी दे दिया गया।
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पांच लाख रुपये की गन्ने की फसल मात्र 20 हजार रुपये में नीलाम कर दिए जाने की जानकारी एक नेताजी को हुई तो उन्होंने मामले में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। 16 नवंबर को गन्ने की नीलामी निरस्त कर 17 नवंबर को गांव में फिर से नीलामी किए जाने का ढिढोरा पिटवाया गया। नीलामी की तारीख 17 नवंबर बताई गई। गांव के तमाम लोग नीलामी में भाग लेने तहसील पहुंचे तो बताया गया कि नीलामी गांव में होगी, गांव पहुंचने पर नीलामी के बारे में कोई सूचना नहीं मिली और कोई अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद 18 नवंबर को नीलामी हो जाने की जानकारी दे दी गई। बताया गया कि नीलामी 71 हजार रुपये में हो गई है। पांच लाख रुपये का गन्ना मात्र 71 हजार रुपये में नीलाम किए जाने पर अधिकारियों पर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
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दो सगे भाइयों सहित चार ने लिया नीलामी में भाग
पुवायां। नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि 18 नवंबर को उनकी अध्यक्षता में तहसील में गन्ने की नीलामी की गई। इसमें गांव फरेंदा बरा के सगे भाई छन्ने, शीतलाचरण इसी गांव के पूरन और सुआलाल ने भाग लिया। शीतलाचरण ने सबसे ऊंची 71 हजार रुपये की बोली लगाई। नीलामी उनके पक्ष में कर दी गई। पांच एकड़ गन्ने की बोली मात्र 71 रुपये रहने पर उन्होंने कहा कि काफी गन्ना लोग काट चुके हैं। बड़ा सवाल है कि प्रशासन के कब्जे में लिया गया गन्ना जिन्होंने काटा उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
पहले मात्र 20 हजार में नीलामी हुई थी जिस कारण नीलामी को निरस्त कर दिया गया था। आज की नीलामी के बारे में जानकारी नहीं है। यदि बोली कम लगी है तो गन्ने की फिर से नीलामी कराई जाएगी। -- जयपाल सिंह, एसडीएम पुवायां