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जांच में फेल हो गईं शिक्षकों की बीमारियां
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शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों में तैनात जिन शिक्षकों ने अंतरजनदीय स्थानांतरण के आवेदन में असाध्य/गंभीर रोग का हवाला देकर भारांक का लाभ पाने का दावा किया था, उन दो दिन चली गहन जांच में उनकी असाध्य बीमारी साध्य में बदल गई और इस तरह लगभग डेढ़ शिक्षकों के आवेदन निरस्त कर दिए गए।
अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए शिक्षकों को पति, पत्नी, बच्चों के असाध्य और गंभीर बीमारी पर 10 अंक का भारांक दिया जाना था, जिसके लालच में करीब 200 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बीमारी का हवाला देकर आवेदन कर दिया था। डीएम की ओर से उनकी बीमारियों की जांच के लिए दो सदस्यीय चिकित्सकों की समिति गठित कर दी गई। समिति में शामिल जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमओ डॉ. नरेश पाल और जिला कारागार के डिप्टी सीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने आवेदक शिक्षकों के छह माह की दवाई के पर्चों और चिकित्सीय परामर्श का गहनता से परीक्षण किया, जिसमें लगभग डेढ़ सौ शिक्षकों की बीमारी गंभीर नहीं पाई गई। उनकी रिपोर्ट के आधार पर बीएसए राकेश कुमार ने उनके स्थानांतरण आवेदन निरस्त कर दिए।
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अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए शिक्षकों को पति, पत्नी, बच्चों के असाध्य और गंभीर बीमारी पर 10 अंक का भारांक दिया जाना था, जिसके लालच में करीब 200 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बीमारी का हवाला देकर आवेदन कर दिया था। डीएम की ओर से उनकी बीमारियों की जांच के लिए दो सदस्यीय चिकित्सकों की समिति गठित कर दी गई। समिति में शामिल जिला अस्पताल के डिप्टी सीएमओ डॉ. नरेश पाल और जिला कारागार के डिप्टी सीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने आवेदक शिक्षकों के छह माह की दवाई के पर्चों और चिकित्सीय परामर्श का गहनता से परीक्षण किया, जिसमें लगभग डेढ़ सौ शिक्षकों की बीमारी गंभीर नहीं पाई गई। उनकी रिपोर्ट के आधार पर बीएसए राकेश कुमार ने उनके स्थानांतरण आवेदन निरस्त कर दिए।
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