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चुनाव प्रचार का थमा शोर, एक-एक वोटर को साधने में जुटे प्रत्याशी
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शाहजहांपुर में शनिवार को चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद टाउन हाल रोड पर खड़े प्रचार वाहन । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। शनिवार शाम छह बजे से चुनाव प्रचार का शोर थम गया। मगर प्रत्याशी रविवार को मतदाताओं को साधने के लिए हर जतन करेंगे। सोशल मीडिया के साथ ही मोबाइल से कॉल कर अपने मतदान के लिए आग्रह करेंगे। वहीं चुनाव से जुड़े अधिकारी इस बात पर नजर रख रहे हैं कि रविवार को वोटरों को प्रलोभन देने का प्रयास कोई प्रत्याशी तो नहीं कर रहा है।
31 जनवरी को प्रत्याशियों को सिंबल मिलने के साथ ही चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया था। बड़े दलों के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया था। तमाम जनसभाओं और रैलियों के बाद चुनाव प्रचार खत्म होने के दो दिन पहले से सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सभी बड़े नेताओं की चुनावी रैलियां चुनाव प्रचार की समाप्ति के अंतिम दो दिनों में हुईं। शनिवार को भी कई दलों के बड़े नेताओं ने आकर प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जोर लगाया। शाम छह बजे से प्रचार का शोर थम गया। हालांकि प्रत्याशी बगैर लावलश्कर के एक-एक मतदाता से मिल सकते हैं। मगर प्रत्याशी मतदान के समय तक पूरा जोर लगाए रखना चाहते हैं। इसके मद्देनजर प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात लोगों तक पहुंचाने पर अपना फोकस कर दिया। ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिये भी प्रत्याशी वोटर तक पहुंचकर वोट मांग रहे हैं।
शराब या अन्य प्रलोभन पर प्रशासन की नजर
कई बार प्रत्याशी पुरुषों को शराब या नकद रुपये देकर और महिलाओं को साड़ी-पायल बांटकर मतदान करने के लिए प्रलोभित करते हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में प्रत्याशी अंतिम समय में वोटरों को प्रलोभन देने का प्रयास करते हैं। प्रत्याशियों पर साड़ी और पायल बांटने के आरोप लगते रहते हैं। घर-घर पहुंचकर चुनाव आयोग इसको लेकर सख्ती बरत रहा है। नजर रखी जा रही है कि कोई वोटर को प्रलोभित न कर पाए। मतदान के लिए प्रलोभन दिए जाने की हर हरकत पर चुनाव से जुड़े अधिकारी संजीदा हैं।
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प्रत्याशियों का जोर, समर्थकों का ठंडा न पड़े उत्साह
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद प्रत्याशियों का जोर इस बात पर है कि उनके समर्थकों का जोश ठंडा न पड़ जाए। बाहरी तौर पर प्रत्याशी या समर्थक प्रचार नहीं कर सकते लेकिन सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिये वोटरों तक संपर्क कर सकते हैं। इसी के मद्देनजर प्रत्याशी अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रत्याशियों की पूरी कोशिश है कि मतदान के समय तक मतदाता का मिजाज भांपते रहें और उन्हें अपने पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करते रहें।
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31 जनवरी को प्रत्याशियों को सिंबल मिलने के साथ ही चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया था। बड़े दलों के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया था। तमाम जनसभाओं और रैलियों के बाद चुनाव प्रचार खत्म होने के दो दिन पहले से सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सभी बड़े नेताओं की चुनावी रैलियां चुनाव प्रचार की समाप्ति के अंतिम दो दिनों में हुईं। शनिवार को भी कई दलों के बड़े नेताओं ने आकर प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जोर लगाया। शाम छह बजे से प्रचार का शोर थम गया। हालांकि प्रत्याशी बगैर लावलश्कर के एक-एक मतदाता से मिल सकते हैं। मगर प्रत्याशी मतदान के समय तक पूरा जोर लगाए रखना चाहते हैं। इसके मद्देनजर प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात लोगों तक पहुंचाने पर अपना फोकस कर दिया। ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिये भी प्रत्याशी वोटर तक पहुंचकर वोट मांग रहे हैं।
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शराब या अन्य प्रलोभन पर प्रशासन की नजर
कई बार प्रत्याशी पुरुषों को शराब या नकद रुपये देकर और महिलाओं को साड़ी-पायल बांटकर मतदान करने के लिए प्रलोभित करते हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में प्रत्याशी अंतिम समय में वोटरों को प्रलोभन देने का प्रयास करते हैं। प्रत्याशियों पर साड़ी और पायल बांटने के आरोप लगते रहते हैं। घर-घर पहुंचकर चुनाव आयोग इसको लेकर सख्ती बरत रहा है। नजर रखी जा रही है कि कोई वोटर को प्रलोभित न कर पाए। मतदान के लिए प्रलोभन दिए जाने की हर हरकत पर चुनाव से जुड़े अधिकारी संजीदा हैं।
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प्रत्याशियों का जोर, समर्थकों का ठंडा न पड़े उत्साह
चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद प्रत्याशियों का जोर इस बात पर है कि उनके समर्थकों का जोश ठंडा न पड़ जाए। बाहरी तौर पर प्रत्याशी या समर्थक प्रचार नहीं कर सकते लेकिन सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिये वोटरों तक संपर्क कर सकते हैं। इसी के मद्देनजर प्रत्याशी अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रत्याशियों की पूरी कोशिश है कि मतदान के समय तक मतदाता का मिजाज भांपते रहें और उन्हें अपने पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करते रहें।