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संवादः जमीनी स्तर पर हो महिला उत्थान, भेदभाव छोड़कर मिले बराबरी

Fri, 04 Mar 2022 11:58 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:58 PM IST
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Efforts should be made to uplift women at the grassroots level, get equal
प्रियंका गुप्ता - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को समर्पित दिवस हर साल मनाया जाता है। तमाम दावों और वादों के बीच महिलाओं के हालात में सुधार नहीं हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि जब तक नारी उत्थान के प्रयास जमीनी स्तर पर नहीं होंगे, तब तक आमूल-चूल परिवर्तन संभव नहीं है। तभी उन्हें सही मायने में बराबरी का दर्जा मिल सकेगा। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण को लेकर अपने विचार रखे।
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आधी आबादी की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
महिलाओं को सुरक्षा प्रदान किया जाना सबसे बड़ा मुद्दा है। उनके लिए रोजगार के साधन भी उपलब्ध होने चाहिए। आधी आबादी को समान अधिकार दिए जाने के बाद ही तरक्की के रास्ते प्रशस्त हो सकते हैं। बेटियों की शिक्षा पर विशेष बल दिए जाना चाहिए। - रेखा गुप्ता, व्यापारी नेता
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महिलाओं को सशक्त होना चाहिए
महिलाओं को सशक्त होना चाहिए। अब महिला को अबला नहीं, बल्कि सबला बनकर काम करने की जरूरत है। वह अपने पैरों पर खड़ी हो। घर में ही नहीं, बाहर भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए। तभी आधी आबादी सशक्त हो सकेंगी। - अमृता दीक्षित, जिला कोऑर्डिनेटर, महिला कल्याण विभाग
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समाज में समान अवसर मिले
महिला दिवस हर साल मनाया जाता है। महिलाओं के हित में बातें होती हैं। इस दिन पर संकल्प लेना चाहिए कि महिलाओं को समाज में समान अवसर दिए जाएंगे। उनके साथ भेदभाव खत्म होना चाहिए। बेटियों की शिक्षा में किसी हालत में रोड़ा नहीं अटकना चाहिए। - नमिता यादव, मैनेजर, वन स्टाप सेंटर
पुरुषों के समान मिले अधिकार
वर्तमान में महिलाओं को हक देने की सिर्फ दावे होते हैं। बहुत-सी महिलाएं अपना हक के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। समय की मांग है कि पुरुषों के समान महिलाओं को अधिकार मिलें। महिलाओं को दावों में नहीं, बल्कि वास्तविकता में सशक्त किया जाए। -नेहा सक्सेना, आनंदपुरम कॉलोनी
जागरूकता की बड़ी आवश्यकता
सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अभी तक महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह से जागरूक नहीं हो सकी हैं। महिला परिवार की धुरी है, उस पर बहुत जिम्मेदारी होती है। सरकार को अधिक कारगर कदम उठाने की जरूरत है। -प्रियंका गुप्ता, मोहल्ला दातागंज तिलहर।
थोड़ा है, थोड़े की और जरूरत है
नारी सशक्तीकरण को लेकर महिलाओं में पहले से अधिक जागरूकता आई है। नारी को घर की चाहरदीवारी से निकलकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की आवश्यकता है। परिवार को सशक्त बनाने के लिए नारी को और अधिक जागरूक होने की जरूर है। - क्षमा अग्रवाल, मोहल्ला निजामगंज तिलहर।
मिट रहा है लिंग भेद
महिलाओं की स्थित में अब काफी सुधार हुआ है, लेकिन अभी काफी कुछ करना बाकी है। सरकारें भी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं। समाज में भी जागरूकता आ रही है। लड़का-लड़की का भेद मिट रहा है, यह सुखद परिवर्तन है। - सुहाती त्रिपाठी, शिक्षिका, बंडा।

महिला सम्मान निधि मिलनी चाहिए
महिलाओं की खराब स्थिति का कारण उनका अशिक्षित होना है। अब लड़कियां उच्च शिक्षित हो रही हैं और अपने हक के लिए आगे आ रही हैं। सरकार को लड़कियों की शिक्षा नि:शुल्क कर देनी चाहिए। किसान सम्मान निधि की तरह महिला सम्मान निधि भी दी जानी चाहिए। -रीता रानी गुप्ता, अधिवक्ता पुवायां

्षमा अग्रवाल

्षमा अग्रवाल- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

अमृता दीक्षित ।

अमृता दीक्षित ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

नमिता यादव।

नमिता यादव।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

रेखा गुप्ता।

रेखा गुप्ता।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

सुहाती त्रिपाठी, शिक्षिका आलमपुर पिपरिया बंडा

सुहाती त्रिपाठी, शिक्षिका आलमपुर पिपरिया बंडा- फोटो : POWAYAN

 

रीता रानी गुप्ता, अधिवक्ता पुवायां

रीता रानी गुप्ता, अधिवक्ता पुवायां- फोटो : POWAYAN

 

नेहा सक्सेना।

नेहा सक्सेना।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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