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Shahjahanpur News: दिनभर उड़ते धूल के गुबार, आगाह करने के संकेतक लाचार
Wed, 12 Apr 2023 01:14 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 12 Apr 2023 01:14 AM IST
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जलालाबाद (शाहजहांपुर)। कटरा-बिल्हौर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 730 पर अल्हागंज से कटरा तक करीब 60 किलोमीटर के निर्माणाधीन हाईवे का सफर खतरे से खाली नहीं है। हाईवे पर पटरी, नाला व पुलिया आदि के निर्माण कार्य एक साथ हो रहे हैं। दिनभर धूल-मिट्टी उड़ने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही हादसे की आशंका भी बनी रहती है। गड्ढों के आसपास लगे संकेतक पर धूल की परत जमने से चालकों को आगे खतरे का अंदाजा नहीं लगता है।
करीब दो साल पहले केंद्र सरकार ने मैनपुरी जिले के बेवर से जलालाबाद, कटरा व खुदागंज होते हुए पीलीभीत तक के स्टेट हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर इसे फोरलेन बनाने की मंजूरी दी थी। घोषणा के बाद पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को हस्तांतरित कर दिया था। इस हाईवे पर अल्हागंज से कटरा तक निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
इसी रास्ते पर यातायात का दबाव अधिक है। निर्माण कंपनी ने नई सड़क बिछाने को अल्हागंज से लेकर कटरा तक पहले की बनी सड़क को करीब एक महीने पहले ही मशीन से खुरच दिया था। रोड किनारे पटरी और नाला बनाने का भी काम चल रहा है। खुरचने से रोड पर बनी लाइनें बाइक चलाते समय संतुलन बिगाड़ देती हैं। जब सामने से वाहन गुजरता है तो हादसे का डर बना रहता है। इस पूरे रास्ते पर रेत मिली मिट्टी के उड़ते गुबार से राहगीर ही नहीं दुकानदार भी परेशान हैं।
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पुलियों के निर्माणस्थल के संकेतक बेकार
निर्माणाधीन हाईवे पर पानी न पहुंचे, इसको लेकर नाला निर्माण के साथ लगभग हर दो किलोमीटर पर पुलिया बनाई जा रही है। खोदी गई सड़क और पटरी पर पानी का छिड़काव न होने से हर समय धूल उड़ती रहती है। इस धूल से पुलिया निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों के चारों तरफ लगे संकेतक ढक जाते हैं। खासतौर पर रात में वाहन चालकों को ये संकेतक नहीं दिखाई देते हैं।
गड्ढे में गिर गया था ट्रक
कुछ दिन पहले ही संकेतक न दिख पाने के कारण एक ट्रक गड्ढे में गिर गया था। हाईवे पर गोरा महुआ गाड गांव की निर्माणाधीन पुलिया के पास आठ मार्च को ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार मां-बेटियों समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। तीन अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के बावजूद दुर्घटनास्थल पर न तो रूट डायवर्जन का संकेतक लगाया गया और न ही सड़क सुधार के कार्य कराने की जरूरत समझी गई।
लोगों की बातचीत
रोड बनाने का काम बेतरतीब ढंग से हो रहा है। कभी नाला बनाने के लिए सड़क किनारे खुदाई शुरू हो जाती है तो एक-दो दिन बाद उसे छोड़कर पटरी या पुलिया बनाने का काम होने लगता है। -अजय गुप्ता, दुकानदार
नई सड़क बनाने का काम अल्हागंज के पास चल रहा है, जबकि काफी समय पहले से ही आगे तक सड़क की ऊपरी परत हटा दी गई है। इस कारण वाहन निकलते समय दिन-रात महीन रेत सहित धूल उड़ती है। -नीतेश कटियार
कोलाघाट का पुल शुरू न होने और फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे की दुर्दशा होने से व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। बाहर से आने वाले व्यापारियों की तादाद कम हो गई है। माल आने और ले जाने में भी दिक्कत है। -विमल पांडेय, सब्जी आढ़ती
हाईवे निर्माण के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हादसों का भी खतरा बना रहता है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - वीरेंद्र वर्मा, समाजसेवी
हाईवे के निर्माण का कार्य जल्द पूरा हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। सभी तरह के कार्य एक साथ चल रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा। धूल-मिट्टी न उड़े, इसके लिए सड़क तथा पटरी पर पानी का छिड़काव बढ़ाने को कहा जाएगा। - मालिखान सिंह चौहान, साइट इंजीनियर हाईवे
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करीब दो साल पहले केंद्र सरकार ने मैनपुरी जिले के बेवर से जलालाबाद, कटरा व खुदागंज होते हुए पीलीभीत तक के स्टेट हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर इसे फोरलेन बनाने की मंजूरी दी थी। घोषणा के बाद पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को हस्तांतरित कर दिया था। इस हाईवे पर अल्हागंज से कटरा तक निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
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इसी रास्ते पर यातायात का दबाव अधिक है। निर्माण कंपनी ने नई सड़क बिछाने को अल्हागंज से लेकर कटरा तक पहले की बनी सड़क को करीब एक महीने पहले ही मशीन से खुरच दिया था। रोड किनारे पटरी और नाला बनाने का भी काम चल रहा है। खुरचने से रोड पर बनी लाइनें बाइक चलाते समय संतुलन बिगाड़ देती हैं। जब सामने से वाहन गुजरता है तो हादसे का डर बना रहता है। इस पूरे रास्ते पर रेत मिली मिट्टी के उड़ते गुबार से राहगीर ही नहीं दुकानदार भी परेशान हैं।
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पुलियों के निर्माणस्थल के संकेतक बेकार
निर्माणाधीन हाईवे पर पानी न पहुंचे, इसको लेकर नाला निर्माण के साथ लगभग हर दो किलोमीटर पर पुलिया बनाई जा रही है। खोदी गई सड़क और पटरी पर पानी का छिड़काव न होने से हर समय धूल उड़ती रहती है। इस धूल से पुलिया निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों के चारों तरफ लगे संकेतक ढक जाते हैं। खासतौर पर रात में वाहन चालकों को ये संकेतक नहीं दिखाई देते हैं।
गड्ढे में गिर गया था ट्रक
कुछ दिन पहले ही संकेतक न दिख पाने के कारण एक ट्रक गड्ढे में गिर गया था। हाईवे पर गोरा महुआ गाड गांव की निर्माणाधीन पुलिया के पास आठ मार्च को ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार मां-बेटियों समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। तीन अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के बावजूद दुर्घटनास्थल पर न तो रूट डायवर्जन का संकेतक लगाया गया और न ही सड़क सुधार के कार्य कराने की जरूरत समझी गई।
लोगों की बातचीत
रोड बनाने का काम बेतरतीब ढंग से हो रहा है। कभी नाला बनाने के लिए सड़क किनारे खुदाई शुरू हो जाती है तो एक-दो दिन बाद उसे छोड़कर पटरी या पुलिया बनाने का काम होने लगता है। -अजय गुप्ता, दुकानदार
नई सड़क बनाने का काम अल्हागंज के पास चल रहा है, जबकि काफी समय पहले से ही आगे तक सड़क की ऊपरी परत हटा दी गई है। इस कारण वाहन निकलते समय दिन-रात महीन रेत सहित धूल उड़ती है। -नीतेश कटियार
कोलाघाट का पुल शुरू न होने और फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे की दुर्दशा होने से व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। बाहर से आने वाले व्यापारियों की तादाद कम हो गई है। माल आने और ले जाने में भी दिक्कत है। -विमल पांडेय, सब्जी आढ़ती
हाईवे निर्माण के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हादसों का भी खतरा बना रहता है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - वीरेंद्र वर्मा, समाजसेवी
हाईवे के निर्माण का कार्य जल्द पूरा हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। सभी तरह के कार्य एक साथ चल रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा। धूल-मिट्टी न उड़े, इसके लिए सड़क तथा पटरी पर पानी का छिड़काव बढ़ाने को कहा जाएगा। - मालिखान सिंह चौहान, साइट इंजीनियर हाईवे