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रात से सुबह तक तीसरे दिन जारी रही बूंदाबादी, एक डिग्री लुढ़का पारा
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जैतीपुर के खेड़ा रठ में सरसों के खेत में भरा बारिश का पानी । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। गत तीन दिन से हो रही बूंदाबांदी और बारिश का दौर रविवार रात से सोमवार सुबह तक जारी रहा। इस दौरान 1.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश से गेहूं और गन्ना की फसलों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा, लेकिन जिन किसानों ने लाही-सरसों, आलू, मसूर आदि फसलें बोई हैं, वह लगातार बारिश से फसलें खराब होते देख चिंतित होने लगे हैं। उन्हें अब मौसम सामान्य होने का बेसब्री से इंतजार है।
कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इन फसलों के लिए ज्यादा बारिश नुकसान पैदा करेगी। इस वर्ष 2.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 20 हजार हेक्टेयर में आलू, 7800 हेक्टेयर में राई-सरसों और लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसूर की फसलें बोई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में नमी की अधिकता और तापमान में गिरावट से तिलहन श्रेणी की लाही-सरसों में माहू कीट और आलू में पिछैती झुलता का प्रकोप होने की आशंका बढ़ जाएगी।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार यह स्थिति आलू समेत फूल रही सरसों के लिए घातक होगी। उनका कहना है कि रासायनिक उपचार से फसलों को कीट-रोग से भले ही सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाए, प्राकृतिक माहौल ज्यादा समय तक फसलों के अनुकूल नहीं रहने पर उनकी उत्पादकता प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह भी मानते हैं कि बीते तीन दिन में हुई बारिश को मिलाकर जनवरी मेें अब तक हुई 21 मिमी बरसात फसलों के लिए पर्याप्त हो चुकी है।
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सोमवार शाम बैरोमीटर सूचकांक में 19 अंक का उछाल मंगलवार को पछुआ हवा चलने के साथ धूप निकलने का संकेत है और ऐसी दशा में बुधवार से कोहरा-पाला की समस्या बढ़ने के साथ आलू ओर सरसों की फसलों पर संकट भी गहराएगा। जैतीपुर। बारिश से गेहूं और गन्ना की फसल बोने वाले किसान खुश हैं, लेकिन सरसों, मसूर, आलू की खेती को नुकसान पहुंचा है। तेल की बढ़ती हुई कीमतों को देखते हुए इस बार क्षेत्र के किसानों ने सरसों का रकबा बढ़ा दिया है। बारिश ने इन किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तराई के क्षेत्र में जो खेत निचले स्थान पर हैं, वहां पानी भर गया है। मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो किसानों की करीब एक हजार बीघा क्षेत्र में बोई गई सरसों, मसूर, आलू की फसल खराब हो सकती ह।
किसानों की बात
करीब दस बीघा आलू के खेत में पानी भर गया है। मौसम साफ नहीं हुआ तो फसल को झुलसा रोग से बचाना मुश्किल हो जाएगा। -कुलदीप मिश्रा, सुरजूपुर (जैतीपुर)
18 बीघा खेत में सरसों और मसूर की सहफसली खेती इस उम्मीद में की कि ज्यादा लाभ होगा। पानी भरने से मसूर चौपट होने लगी है। -धनवीर, खेड़ा रठ (जैतीपुर)
मौसम जल्दी सामान्य नहीं हुआ तो दस बीघा खेत मेें बोई सरसों की फसल बरबाद हो जाएगी। बारिश से फूल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। -राकेश कश्यप, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
तराई इलाके के मेरे गेहूं के खेत में बारिश का पानी भरा है। कुछ दिन पहले सिंचाई की थी। बारिश नहीं थमी तो गेहूं को नुकसान होगा। -हरिओम श्रीवास्तव, खेड़ा बझेड़ा (जैतीपुर)
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कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इन फसलों के लिए ज्यादा बारिश नुकसान पैदा करेगी। इस वर्ष 2.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 20 हजार हेक्टेयर में आलू, 7800 हेक्टेयर में राई-सरसों और लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसूर की फसलें बोई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में नमी की अधिकता और तापमान में गिरावट से तिलहन श्रेणी की लाही-सरसों में माहू कीट और आलू में पिछैती झुलता का प्रकोप होने की आशंका बढ़ जाएगी।
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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी के अनुसार यह स्थिति आलू समेत फूल रही सरसों के लिए घातक होगी। उनका कहना है कि रासायनिक उपचार से फसलों को कीट-रोग से भले ही सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाए, प्राकृतिक माहौल ज्यादा समय तक फसलों के अनुकूल नहीं रहने पर उनकी उत्पादकता प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह भी मानते हैं कि बीते तीन दिन में हुई बारिश को मिलाकर जनवरी मेें अब तक हुई 21 मिमी बरसात फसलों के लिए पर्याप्त हो चुकी है।
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सोमवार शाम बैरोमीटर सूचकांक में 19 अंक का उछाल मंगलवार को पछुआ हवा चलने के साथ धूप निकलने का संकेत है और ऐसी दशा में बुधवार से कोहरा-पाला की समस्या बढ़ने के साथ आलू ओर सरसों की फसलों पर संकट भी गहराएगा। जैतीपुर। बारिश से गेहूं और गन्ना की फसल बोने वाले किसान खुश हैं, लेकिन सरसों, मसूर, आलू की खेती को नुकसान पहुंचा है। तेल की बढ़ती हुई कीमतों को देखते हुए इस बार क्षेत्र के किसानों ने सरसों का रकबा बढ़ा दिया है। बारिश ने इन किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तराई के क्षेत्र में जो खेत निचले स्थान पर हैं, वहां पानी भर गया है। मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो किसानों की करीब एक हजार बीघा क्षेत्र में बोई गई सरसों, मसूर, आलू की फसल खराब हो सकती ह।
किसानों की बात
करीब दस बीघा आलू के खेत में पानी भर गया है। मौसम साफ नहीं हुआ तो फसल को झुलसा रोग से बचाना मुश्किल हो जाएगा। -कुलदीप मिश्रा, सुरजूपुर (जैतीपुर)
18 बीघा खेत में सरसों और मसूर की सहफसली खेती इस उम्मीद में की कि ज्यादा लाभ होगा। पानी भरने से मसूर चौपट होने लगी है। -धनवीर, खेड़ा रठ (जैतीपुर)
मौसम जल्दी सामान्य नहीं हुआ तो दस बीघा खेत मेें बोई सरसों की फसल बरबाद हो जाएगी। बारिश से फूल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। -राकेश कश्यप, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
तराई इलाके के मेरे गेहूं के खेत में बारिश का पानी भरा है। कुछ दिन पहले सिंचाई की थी। बारिश नहीं थमी तो गेहूं को नुकसान होगा। -हरिओम श्रीवास्तव, खेड़ा बझेड़ा (जैतीपुर)