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डबल मर्डर : पिता-पुत्रों समेत छह आरोपियों पर केस दर्ज, गिरफ्तारी को तीन टीमें गठित
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जलालाबाद। थाना जलालाबाद के गांव डहर में बुधवार रात दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने पिता-पुत्र समेत छह आरोपियों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। एसपी के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं। इधर, पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजन के सुपुर्द कर दिया। बृहस्पतिवार को कोलाघाट पुल पर पास-पास चिता सजाकर अंतिम संस्कार कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिस बल तैनात किया गया।
डहर गांव निवासी ओमपाल की पत्नी ममता यादव दस साल पहले गांव के रमनपाल के साथ रहने लगी थी। ओमपाल के तीन बेटे और एक बेटी है। इस बीच ममता और रमनपाल पानीपत में काम करने चले गए थे। लॉकडाउन होने पर दो वर्ष पहले ही दोनों की वापसी हुई थी। रमनपाल के भाई सर्वेश यादव की ओर से हत्याकांड में छह लोगों को नामजद किया गया। आरोप है कि बुधवार शाम को करीब साढ़े पांच बजे उनका भाई रमनपाल और ममता घर से कुछ दूरी पर खेत पर काम कर रहे थे। इसी दौरान गांव निवासी ओमपाल कुशवाहा उनके पुत्र सोनू, दीपू व अमित के अलावा गांव के प्रमोद व विनोद लाठी-डंडे व कुल्हाड़ी आदि लेकर पहुंच गए। सभी ने रमनपाल पर हमला बोल दिया। शोर-शराबा सुनकर ममता भी वहां पहुंचकर बीच-बचाव करने लगी। तभी एक हमलावर ने रमनपाल के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। उसके बाद अन्य धारदार हथियारों से वार कर रमनपाल को गिरा दिया। हमलावरों ने ममता को गिराकर उसका दुपट्टे से गला घोट दिया।
सर्वेश ने बताया कि हमले की सूचना पर वह भी दौड़कर आया। दोनों को लेकर सीएचसी पहुंचे जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
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रमनपाल के परिजन ने किया ममता का भी अंतिम संस्कार
-ममता और रमनपाल ने भले ही शादी नही की थी लेकिन रमनपाल के भाई उसे भाभी का दर्जा देते थे। हत्याकांड के बाद ममता के पति और उसके पुत्र भाग गए। दोनों के शवों के साथ रमनपाल के भाई सर्वेश व अन्य परिजन पहुंचे। वे ही ममता के शव को साथ लेकर गए। सर्वेश ने बताया कि वह ही ममता का अंतिम संस्कार करेंगे, वह मेरे भाई के साथ रहती थी।
छह लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया, सर्विलांस टीम भी सक्रिय
-जलालाबाद थाने के प्रभारी जयशंकर सिंह ने संदेह के आधार पर छह लोगों को हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। इससे स्पष्ट होगा कि नामजद आरोपी ही थे या और भी लोग हत्याकांड में शामिल थे। पुलिस की सर्विलांस टीम भी अलर्ट हो गई, जो घटना के समय मौके पर मौजूद मोबाइल फोन को ट्रेस कर रही है।
-इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया। गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
एस आनंद, एसपी
जब तक पानीपत में थे सुरक्षित रहे, फिर मंडराया मौत का साया
जलालाबाद। ओमपाल की ममता के साथ करीब 35 साल पहले शादी हुई थी। ममता के एक बेटे की उम्र 32 साल है। रमनपाल और ओमपाल के बीच कभी गहरी दोस्ती थी। करीब एक दशक पहले दोनों ही पानीपात नौकरी करने गए थे। इस दौरान ओमपाल अपने चार बच्चे गांव में माता-पिता के साथ छोड़ गया था। जबकि पत्नी ममता को साथ ले गया था।
ग्रामीण बताते हैं कि करीब दस साल पहले पानीपत में रहने के दौरान ओमपाल और ममता के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद ओमपाल ने ममता को बुरी तरह से पीट दिया और गांव चला गया। इस बीच ममता और रमनपाल संपर्क में आ गए। वे दोनों दिल्ली में जाकर साथ रहने लगे और वहीं नौकरी कर ली। ओमपाल तमाम प्रयासों के बाद भी ममता से नहीं मिल सका। लंबा समय बीत जाने से ओमपाल और उसके परिजन के दिमाग से इस अपमान की यादें धुंधली जरूर हो गई, परंतु उसे भूले नहीं थे। दस साल में ओमपाल के बच्चे बड़े हो गए और उसने दो बेटों व एक बेटी की शादी भी कर दी थी। दस साल तक पानीपत में रहने के दौरान रमनपाल और ममता सुरक्षित थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान गांव में आने के बाद उनके सिर पर मौत का साया मंडराने लगा था। ओमपाल व उसके बेटे अपनी मां को गैर के घर में देखकर काफी खुन्नस रखते थे। इससे पहले भी कई बार दोनों परिवारों के बीच में नोकझोंक हुई, लेकिन ममता ने अपने बेटों का पक्ष लेते हुए रमनपाल को शांत कर दिया था।
घर दूर थे, खेत पास था
-रमनपाल और ओमपाल के घरों के बीच काफी दूरी थी, परंतु रमनपाल का खेत ओमपाल के घर के पास ही था। घटना के समय रमनपाल और ममता उसी खेत में थे, जहां घटना को अंजाम दिया गया।
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डहर गांव निवासी ओमपाल की पत्नी ममता यादव दस साल पहले गांव के रमनपाल के साथ रहने लगी थी। ओमपाल के तीन बेटे और एक बेटी है। इस बीच ममता और रमनपाल पानीपत में काम करने चले गए थे। लॉकडाउन होने पर दो वर्ष पहले ही दोनों की वापसी हुई थी। रमनपाल के भाई सर्वेश यादव की ओर से हत्याकांड में छह लोगों को नामजद किया गया। आरोप है कि बुधवार शाम को करीब साढ़े पांच बजे उनका भाई रमनपाल और ममता घर से कुछ दूरी पर खेत पर काम कर रहे थे। इसी दौरान गांव निवासी ओमपाल कुशवाहा उनके पुत्र सोनू, दीपू व अमित के अलावा गांव के प्रमोद व विनोद लाठी-डंडे व कुल्हाड़ी आदि लेकर पहुंच गए। सभी ने रमनपाल पर हमला बोल दिया। शोर-शराबा सुनकर ममता भी वहां पहुंचकर बीच-बचाव करने लगी। तभी एक हमलावर ने रमनपाल के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। उसके बाद अन्य धारदार हथियारों से वार कर रमनपाल को गिरा दिया। हमलावरों ने ममता को गिराकर उसका दुपट्टे से गला घोट दिया।
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सर्वेश ने बताया कि हमले की सूचना पर वह भी दौड़कर आया। दोनों को लेकर सीएचसी पहुंचे जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
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रमनपाल के परिजन ने किया ममता का भी अंतिम संस्कार
-ममता और रमनपाल ने भले ही शादी नही की थी लेकिन रमनपाल के भाई उसे भाभी का दर्जा देते थे। हत्याकांड के बाद ममता के पति और उसके पुत्र भाग गए। दोनों के शवों के साथ रमनपाल के भाई सर्वेश व अन्य परिजन पहुंचे। वे ही ममता के शव को साथ लेकर गए। सर्वेश ने बताया कि वह ही ममता का अंतिम संस्कार करेंगे, वह मेरे भाई के साथ रहती थी।
छह लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया, सर्विलांस टीम भी सक्रिय
-जलालाबाद थाने के प्रभारी जयशंकर सिंह ने संदेह के आधार पर छह लोगों को हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। इससे स्पष्ट होगा कि नामजद आरोपी ही थे या और भी लोग हत्याकांड में शामिल थे। पुलिस की सर्विलांस टीम भी अलर्ट हो गई, जो घटना के समय मौके पर मौजूद मोबाइल फोन को ट्रेस कर रही है।
-इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया। गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
एस आनंद, एसपी
जब तक पानीपत में थे सुरक्षित रहे, फिर मंडराया मौत का साया
जलालाबाद। ओमपाल की ममता के साथ करीब 35 साल पहले शादी हुई थी। ममता के एक बेटे की उम्र 32 साल है। रमनपाल और ओमपाल के बीच कभी गहरी दोस्ती थी। करीब एक दशक पहले दोनों ही पानीपात नौकरी करने गए थे। इस दौरान ओमपाल अपने चार बच्चे गांव में माता-पिता के साथ छोड़ गया था। जबकि पत्नी ममता को साथ ले गया था।
ग्रामीण बताते हैं कि करीब दस साल पहले पानीपत में रहने के दौरान ओमपाल और ममता के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद ओमपाल ने ममता को बुरी तरह से पीट दिया और गांव चला गया। इस बीच ममता और रमनपाल संपर्क में आ गए। वे दोनों दिल्ली में जाकर साथ रहने लगे और वहीं नौकरी कर ली। ओमपाल तमाम प्रयासों के बाद भी ममता से नहीं मिल सका। लंबा समय बीत जाने से ओमपाल और उसके परिजन के दिमाग से इस अपमान की यादें धुंधली जरूर हो गई, परंतु उसे भूले नहीं थे। दस साल में ओमपाल के बच्चे बड़े हो गए और उसने दो बेटों व एक बेटी की शादी भी कर दी थी। दस साल तक पानीपत में रहने के दौरान रमनपाल और ममता सुरक्षित थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान गांव में आने के बाद उनके सिर पर मौत का साया मंडराने लगा था। ओमपाल व उसके बेटे अपनी मां को गैर के घर में देखकर काफी खुन्नस रखते थे। इससे पहले भी कई बार दोनों परिवारों के बीच में नोकझोंक हुई, लेकिन ममता ने अपने बेटों का पक्ष लेते हुए रमनपाल को शांत कर दिया था।
घर दूर थे, खेत पास था
-रमनपाल और ओमपाल के घरों के बीच काफी दूरी थी, परंतु रमनपाल का खेत ओमपाल के घर के पास ही था। घटना के समय रमनपाल और ममता उसी खेत में थे, जहां घटना को अंजाम दिया गया।
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