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डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज रहे बेहाल
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 08 May 2015 11:06 PM IST
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डॉक्टरोें के साथ मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के विरोध में आईएमए के आह्वान पर शुक्रवार को को शहर के सभी निजी अस्पताल बंद रहे। सुबह सभी डॉक्टर पुराने जिला अस्पताल में एकत्र हुए। वहां से पैदल मार्च कर कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां धरना-प्रदर्शन किया। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। शहर के सभी नर्सिंग होम और क्लीनिक बंद रहने से मरीजों को खासी दिक्कत हुई।
सुबह दस बजे शहर के लगभग सभी निजी डॉक्टर पुराने जिला अस्पताल में इकट्ठे हुए। यहां से हाथों में झंडा-बैनर लेकर डॉक्टरों ने कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान वे ‘डॉक्टराें पर अत्याचार बंद करो’, ‘अस्पताल तोड़ना बंद करो’ और ‘डॉक्टरों के साथ मारपीट अब नहीं सहेंगे’ आदि नारे लगाते हुए चल रहे थे। कलक्ट्रेट परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए आईएमए के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. पवन अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों को मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ी है। डॉक्टरों पर हो रहे अत्याचार सरकार को दिखाई नहीं दे रहे हैं। इलाहाबाद में डॉ. रोहित गुप्ता पर हमला, गाजीपुर में डॉ. अनुपमा सिंह के खिलाफ लिखी गई एफआईआर और इसी तरह से शहर में फरवरी में शेखर अस्पताल में मारपीट और तोड़फोड़, फरवरी में ही कमला नर्सिंग होम में स्टाफ से मारपीट और तोड़फोड़, इन सभी मामलों में दोषियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। मजबूरन डॉक्टरों को सड़क पर आना पड़ा है।
उन्होंने तोड़फोड़ और मारपीट करने वालों के खिलाफ मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई करने, पीसीपी एवं डीटी एक्ट डॉक्टरों पर नहीं वरन गर्भवती महिला और उसके परिवार पर लागू करने की मांग की। कहा, कानपुर में मेडिकल छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान डॉ. विजय पाठक, डॉ. दीपा सक्सेना, डॉ. वसीम हसन खां, डॉ. सोम शेखर दीक्षित, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. एपी मिश्रा, डॉ. आरसी अस्थाना, डॉ.पीएन रस्तोगी आदि ने भी विचार रखे। मेडिकल रिपेजेंटेटिव एसोसिएशन के अध्यक्ष मुरारी लाल दीक्षित एवं समस्त दवा प्रतिनिधि, नीमा के अध्यक्ष केडी सिंह, डॉ. सुशील मिश्रा, डॉ. परवेज, डॉ. मृदुल सक्सेना, डॉ. रवि मोहन आदि भी मौजूद रहे। अंत में आईएमए के अध्यक्ष अनिल सूद ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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शहर में निजी अस्पतालों में नहीं हुई ओपीडी
शहर में अंटा चौराहा के पास डॉ. वाईके सिंह के अस्पताल में सुबह से मरीजों की भीड़ थी, लेकिन डॉक्टर के नहीं मौजूद होने पर मरीज धीरे-धीरे वापस हो गए। इसके बार शिशु रोग चिकित्सक डॉ. हिकतम उल्ला के नर्सिंग होम में सिंधौली क्षेत्र के रघुवीर अपनी पत्नी सावित्री के साथ पांच माह के बेटे की तबीयत खराब होने पर उसे दिखाने के लिए डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे, लेकिन स्टाफ ने उन्हें मना कर दिया था कि डॉक्टर आज नहीं देखेंगे। यहीं हाल शेखर और वसीम अस्पताल का था। वहां पहले से भर्ती मरीजों के अलावा नए मरीजों की ओपीडी नहीं की गई। मरीजों को अस्पताल के बाहर से घर भेज दिया गया। पुराने अस्पताल के पास डॉ.यूडी कपूर के अस्पताल में मरीजों की भीड़ तो थी, लेकिन वहां भी ओपीडी नहीं हो रही थी। पाठक अस्पताल में भी मरीजों को बाहर से ही लौटा दिया गया। कनौजिया मोड़ स्थित डॉ.परविंदर सिंह के अस्पताल में बाहर से ताला डाल दिया गया था। यहीं हाल शीला ट्रामा सेंटर का था। इसी क्षेत्र में डॉ. बिजेंद्र सक्सेना के नर्सिंग हो पर मरीजों को बाहर से लौटाया जा रहा था। घंटाघर रोड पर डॉ.राकेश दीक्षित के नर्सिंग होम में भी मरीजों को बाहर से लौटाया जा रहा था, यहां तिलहर क्षेत्र के गां हटा दलेलपुर निवासी मिश्रीलाल अपनी पौत्री रुचि के पैर के में चोट लगने पर उसे किराए की गाड़ी करके डॉक्टर को दिखाने आए थे, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बाहर से लौटा दिया। यहीं हाल उनके पड़ोस में बने निपुण नर्सिंग होम का था।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी
निजी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलने पर जिला अस्पताल में ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई। दूसरे दिनों की अपेक्षा शुक्रवार में मरीजों की संख्या अधिक रही। शाम तक अस्पताल में 80 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं। जो कि अन्य दिनों अपेक्षा अधिक है। रात तक भर्ती होने वाले मरीजों सौ से पार कर जाएगा। अस्पताल में बैड नहीं होने की वजह से अस्पताल प्रशासन के समाने मरीजों को भर्ती करने में समस्या खड़ी हो रही है। अस्पताल पहले से ही मरीजों से फुल है।
बंद रहे पुवायां केे अस्पताल
पुवायां। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को पुवायां के सभी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर बंद रहे। इससे रोगियों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डॉक्टरों की बैठक में डॉ. राजीव पांडे ने कहा कि डॉक्टरों के ऊपर हमले होना बेहद निंदनीय है और हमला करने के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर हो रहे हमलों पर सरकार गंभीर नीं हुई तो देश्व्यापी बंदी की जाएगी। डॉ. गीता पांडे, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ. अनूप मिश्र ने भी हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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सुबह दस बजे शहर के लगभग सभी निजी डॉक्टर पुराने जिला अस्पताल में इकट्ठे हुए। यहां से हाथों में झंडा-बैनर लेकर डॉक्टरों ने कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान वे ‘डॉक्टराें पर अत्याचार बंद करो’, ‘अस्पताल तोड़ना बंद करो’ और ‘डॉक्टरों के साथ मारपीट अब नहीं सहेंगे’ आदि नारे लगाते हुए चल रहे थे। कलक्ट्रेट परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए आईएमए के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. पवन अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों को मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ी है। डॉक्टरों पर हो रहे अत्याचार सरकार को दिखाई नहीं दे रहे हैं। इलाहाबाद में डॉ. रोहित गुप्ता पर हमला, गाजीपुर में डॉ. अनुपमा सिंह के खिलाफ लिखी गई एफआईआर और इसी तरह से शहर में फरवरी में शेखर अस्पताल में मारपीट और तोड़फोड़, फरवरी में ही कमला नर्सिंग होम में स्टाफ से मारपीट और तोड़फोड़, इन सभी मामलों में दोषियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। मजबूरन डॉक्टरों को सड़क पर आना पड़ा है।
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उन्होंने तोड़फोड़ और मारपीट करने वालों के खिलाफ मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई करने, पीसीपी एवं डीटी एक्ट डॉक्टरों पर नहीं वरन गर्भवती महिला और उसके परिवार पर लागू करने की मांग की। कहा, कानपुर में मेडिकल छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान डॉ. विजय पाठक, डॉ. दीपा सक्सेना, डॉ. वसीम हसन खां, डॉ. सोम शेखर दीक्षित, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. एपी मिश्रा, डॉ. आरसी अस्थाना, डॉ.पीएन रस्तोगी आदि ने भी विचार रखे। मेडिकल रिपेजेंटेटिव एसोसिएशन के अध्यक्ष मुरारी लाल दीक्षित एवं समस्त दवा प्रतिनिधि, नीमा के अध्यक्ष केडी सिंह, डॉ. सुशील मिश्रा, डॉ. परवेज, डॉ. मृदुल सक्सेना, डॉ. रवि मोहन आदि भी मौजूद रहे। अंत में आईएमए के अध्यक्ष अनिल सूद ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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शहर में निजी अस्पतालों में नहीं हुई ओपीडी
शहर में अंटा चौराहा के पास डॉ. वाईके सिंह के अस्पताल में सुबह से मरीजों की भीड़ थी, लेकिन डॉक्टर के नहीं मौजूद होने पर मरीज धीरे-धीरे वापस हो गए। इसके बार शिशु रोग चिकित्सक डॉ. हिकतम उल्ला के नर्सिंग होम में सिंधौली क्षेत्र के रघुवीर अपनी पत्नी सावित्री के साथ पांच माह के बेटे की तबीयत खराब होने पर उसे दिखाने के लिए डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे, लेकिन स्टाफ ने उन्हें मना कर दिया था कि डॉक्टर आज नहीं देखेंगे। यहीं हाल शेखर और वसीम अस्पताल का था। वहां पहले से भर्ती मरीजों के अलावा नए मरीजों की ओपीडी नहीं की गई। मरीजों को अस्पताल के बाहर से घर भेज दिया गया। पुराने अस्पताल के पास डॉ.यूडी कपूर के अस्पताल में मरीजों की भीड़ तो थी, लेकिन वहां भी ओपीडी नहीं हो रही थी। पाठक अस्पताल में भी मरीजों को बाहर से ही लौटा दिया गया। कनौजिया मोड़ स्थित डॉ.परविंदर सिंह के अस्पताल में बाहर से ताला डाल दिया गया था। यहीं हाल शीला ट्रामा सेंटर का था। इसी क्षेत्र में डॉ. बिजेंद्र सक्सेना के नर्सिंग हो पर मरीजों को बाहर से लौटाया जा रहा था। घंटाघर रोड पर डॉ.राकेश दीक्षित के नर्सिंग होम में भी मरीजों को बाहर से लौटाया जा रहा था, यहां तिलहर क्षेत्र के गां हटा दलेलपुर निवासी मिश्रीलाल अपनी पौत्री रुचि के पैर के में चोट लगने पर उसे किराए की गाड़ी करके डॉक्टर को दिखाने आए थे, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बाहर से लौटा दिया। यहीं हाल उनके पड़ोस में बने निपुण नर्सिंग होम का था।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी
निजी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलने पर जिला अस्पताल में ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई। दूसरे दिनों की अपेक्षा शुक्रवार में मरीजों की संख्या अधिक रही। शाम तक अस्पताल में 80 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं। जो कि अन्य दिनों अपेक्षा अधिक है। रात तक भर्ती होने वाले मरीजों सौ से पार कर जाएगा। अस्पताल में बैड नहीं होने की वजह से अस्पताल प्रशासन के समाने मरीजों को भर्ती करने में समस्या खड़ी हो रही है। अस्पताल पहले से ही मरीजों से फुल है।
बंद रहे पुवायां केे अस्पताल
पुवायां। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को पुवायां के सभी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर बंद रहे। इससे रोगियों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डॉक्टरों की बैठक में डॉ. राजीव पांडे ने कहा कि डॉक्टरों के ऊपर हमले होना बेहद निंदनीय है और हमला करने के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों पर हो रहे हमलों पर सरकार गंभीर नीं हुई तो देश्व्यापी बंदी की जाएगी। डॉ. गीता पांडे, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ. अनूप मिश्र ने भी हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।