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Shahjahanpur News: डाॅक्टर साहब... दिमाग में सनसनाहट होती है... लगता है सब मार देंगे
Fri, 28 Mar 2025 12:49 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:49 AM IST
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शाहजहांपुर। डाॅक्टर साहब दिमाग में सनसनाहट होती है, लगता है सब मार देंगे... यह बात रोजा के मानपुर चचरी गांव निवासी राजवीर ने उपचार करने वाले चिकित्सक से कही थी। परिजनों ने एक साल पूर्व हुए हादसे के बाद राजवीर को बरेली के मानसिक चिकित्सालय में दिखाया था, तब चिकित्सक ने पर्चे पर उसकी कही बात लिखकर उसका उपचार शुरू किया था।
वारदात के बाद घटनास्थल पर पहुंचे एडीजी रमित शर्मा व आईजी डाॅ. राकेश सिंह ने जांच पड़ताल की। पुलिस ने अलमारी से एक थैला बरामद किया। थैले से उसकी दवाई, डाॅक्टर के पर्चे व इलाज से संबंधित अन्य दस्तावेज मिले। पूरा क्राइम सीन देखने के बाद एडीजी मकान के बाहर आए। पाकड़ के पेड़ के नीचे खड़े ग्राम प्रधान अशोक कुमार व राजवीर के रिश्तेदारों से बात की।
सभी का कहना था कि हादसे से पहले राजीव बिल्कुल सामान्य था। वह आठवीं तक पढ़ा था, लेकिन बहुत होशियार था। सबसे हंसकर बोलता था। कभी किसी से उसका झगड़ा नहीं हुआ। एक साल पूर्व हुए हादसे के बाद से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। राजवीर को जरा-जरा सी बात पर गुस्सा आ जाता था।
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पत्नी से भी झगड़ा करने लगा था। चिड़चिड़ा होने के साथ ही वह अपने में ही सीमित हो गया था। कभी काम करता तो कभी नहीं करता था।
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38 मिनट तक एडीजी व आईजी ने बारीकी से जांच की
घटना के बाद दोपहर को एडीजी-आईजी ने करीब 38 मिनट तक कमरे में बारीकी से जांच की। घर का एक-एक सामान देखा। बरामदे में आईजी को एक मोबाइल फोन चार्जिंग पर लगा मिला। उसे पुलिस ने कब्जे में लिया। बच्चों की चप्पलें इधर-उधर पड़ी हुईं थीं। कमरे में अंधेरा होने के चलते आईजी ने टार्च मंगवाई। राजवीर ने जिस कमरे में फांसी लगाई, उसकी बारीकी से जांच की।
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वारदात के बाद घटनास्थल पर पहुंचे एडीजी रमित शर्मा व आईजी डाॅ. राकेश सिंह ने जांच पड़ताल की। पुलिस ने अलमारी से एक थैला बरामद किया। थैले से उसकी दवाई, डाॅक्टर के पर्चे व इलाज से संबंधित अन्य दस्तावेज मिले। पूरा क्राइम सीन देखने के बाद एडीजी मकान के बाहर आए। पाकड़ के पेड़ के नीचे खड़े ग्राम प्रधान अशोक कुमार व राजवीर के रिश्तेदारों से बात की।
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सभी का कहना था कि हादसे से पहले राजीव बिल्कुल सामान्य था। वह आठवीं तक पढ़ा था, लेकिन बहुत होशियार था। सबसे हंसकर बोलता था। कभी किसी से उसका झगड़ा नहीं हुआ। एक साल पूर्व हुए हादसे के बाद से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। राजवीर को जरा-जरा सी बात पर गुस्सा आ जाता था।
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पत्नी से भी झगड़ा करने लगा था। चिड़चिड़ा होने के साथ ही वह अपने में ही सीमित हो गया था। कभी काम करता तो कभी नहीं करता था।
38 मिनट तक एडीजी व आईजी ने बारीकी से जांच की
घटना के बाद दोपहर को एडीजी-आईजी ने करीब 38 मिनट तक कमरे में बारीकी से जांच की। घर का एक-एक सामान देखा। बरामदे में आईजी को एक मोबाइल फोन चार्जिंग पर लगा मिला। उसे पुलिस ने कब्जे में लिया। बच्चों की चप्पलें इधर-उधर पड़ी हुईं थीं। कमरे में अंधेरा होने के चलते आईजी ने टार्च मंगवाई। राजवीर ने जिस कमरे में फांसी लगाई, उसकी बारीकी से जांच की।