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जिला पंचायती लड़ने का युवाओं में बढ़ा क्रेज
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 27 Sep 2015 09:19 PM IST
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग से जारी आंकड़े में युवाओं की रुचि सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य या अध्यक्षी का चुनाव लड़ने में बढ़ी है। इसमें लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। वर्ष 1995 में सूबे में निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों में से कुल 28.57 फीसदी अधिकतम 35 वर्ष तक की आयु वाले थे, जबकि यही संख्या वर्ष 2005 में बढ़कर 30 फीसदी तक हुई और वर्ष 2010 में 47.10 फीसदी तक पहुंच गई।
इसके उलट 36 से 50 वर्ष के आयु वर्ग में यही रुझान गिरावट की ओर रहा। वर्ष 1995 में इस आयु वर्ग वाले कुल 58.33 फीसदी जिला पंचायत अध्यक्ष पर निर्वाचित हुए थे, जो कि वर्ष 2005 में घटकर 52.85 फीसदी रह गए। वर्ष 2010 में जिला पंचायत सदस्य पद पर निर्वाचित होने वालों में इस आयु वर्ग की संख्या 42.33 फीसदी पर सिमट गई। बरेली मंडल में गत बार वर्ष 2010 में इस लिहाज से रोचक तस्वीर उभरी थी और जिला पंचायत में युवाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी बदायूं में दर्ज हुई थी। वहां निर्वाचित 49 जिला पंचायत सदस्यों में से 35 वर्ष तक के आयु वर्ग वालों की संख्या 27 थी। शाहजहांपुर में कुल 39 निर्वाचित सदस्यों में से 14 युवा थे, जबकि बरेली में निर्वाचित कुल 49 सदस्यों में 23 युवा थे। पीलीभीत में तब कुल निर्वाचित 29 सदस्यों में 11 की उम्र अधिकतम 35 थी।
ब्लाक प्रमुखी में युवाओं की भागीदारी बढ़ी
शाहजहांपुर। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संबंधी जारी आंकड़ों में ब्लाक प्रमुखी युवाओं को रास आती नजर आ रही है। वर्ष 1995 में पूरे प्रदेश में 35 वर्ष तक की आयु वाले निर्वाचित ब्लाक प्रमुखों का प्रतिशत 41.87 फीसदी था, जो कि गत बार वर्ष 2010 में बढ़कर 43.72 फीसदी हो गया। बरेली मंडल में गत बार शाहजहांपुर में प्रमुख बनने वाले युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा था। कुल 15 सीटों में से छह युवाओं के खाते में रही थी, जबकि पांच सीटों में 36 से 50 वर्ष की आयु वाले और चार सीटों पर 50 वर्ष से अधिक आयु वाले जीते थे। बदायूं में कुल 18 सीटों में से छह पर युवा जीते थे, जबकि 36 से 50 वर्ष के वर्ग में नौ और 50 से अधिक वालों में तीन जीते थे। बरेली में कुल 15 सीटों में से दो पर युवा, 36 से 50 वर्ष के वर्ग वाले में 12 और 50 वर्ष से अधिक वाले में एक ही विजेता बने थे।
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इसके उलट 36 से 50 वर्ष के आयु वर्ग में यही रुझान गिरावट की ओर रहा। वर्ष 1995 में इस आयु वर्ग वाले कुल 58.33 फीसदी जिला पंचायत अध्यक्ष पर निर्वाचित हुए थे, जो कि वर्ष 2005 में घटकर 52.85 फीसदी रह गए। वर्ष 2010 में जिला पंचायत सदस्य पद पर निर्वाचित होने वालों में इस आयु वर्ग की संख्या 42.33 फीसदी पर सिमट गई। बरेली मंडल में गत बार वर्ष 2010 में इस लिहाज से रोचक तस्वीर उभरी थी और जिला पंचायत में युवाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी बदायूं में दर्ज हुई थी। वहां निर्वाचित 49 जिला पंचायत सदस्यों में से 35 वर्ष तक के आयु वर्ग वालों की संख्या 27 थी। शाहजहांपुर में कुल 39 निर्वाचित सदस्यों में से 14 युवा थे, जबकि बरेली में निर्वाचित कुल 49 सदस्यों में 23 युवा थे। पीलीभीत में तब कुल निर्वाचित 29 सदस्यों में 11 की उम्र अधिकतम 35 थी।
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ब्लाक प्रमुखी में युवाओं की भागीदारी बढ़ी
शाहजहांपुर। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संबंधी जारी आंकड़ों में ब्लाक प्रमुखी युवाओं को रास आती नजर आ रही है। वर्ष 1995 में पूरे प्रदेश में 35 वर्ष तक की आयु वाले निर्वाचित ब्लाक प्रमुखों का प्रतिशत 41.87 फीसदी था, जो कि गत बार वर्ष 2010 में बढ़कर 43.72 फीसदी हो गया। बरेली मंडल में गत बार शाहजहांपुर में प्रमुख बनने वाले युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा रहा था। कुल 15 सीटों में से छह युवाओं के खाते में रही थी, जबकि पांच सीटों में 36 से 50 वर्ष की आयु वाले और चार सीटों पर 50 वर्ष से अधिक आयु वाले जीते थे। बदायूं में कुल 18 सीटों में से छह पर युवा जीते थे, जबकि 36 से 50 वर्ष के वर्ग में नौ और 50 से अधिक वालों में तीन जीते थे। बरेली में कुल 15 सीटों में से दो पर युवा, 36 से 50 वर्ष के वर्ग वाले में 12 और 50 वर्ष से अधिक वाले में एक ही विजेता बने थे।
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