फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Displaced families reached Shahjahanpur, hiding barefoot from Pakistan

पाकिस्तान से नंगे पांव भागकर छिपते हुए शाहजहांपुर पहुंचे विस्थापित परिवार

Sun, 19 Jun 2022 02:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 02:45 AM IST
विज्ञापन
Displaced families reached Shahjahanpur, hiding barefoot from Pakistan
गुरुवचन सिंह - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। देश को आजादी मिले 75 वर्ष ही चुके हैं, लेकिन बटवारे के दौरान पाकिस्तान से नंगे पांव भागकर छिपते हुए यहां पहुंचे विस्थापित परिवार दंगों से मिली पीड़ा अभी तक भूल नहीं सके हैं। चाहे मोहल्ला मोहम्मद जई में कारोबारी परिवार के मुखिया महेंद्र सिंह दुआ हों या फिर तेल टंकी मार्ग निवासी सरदार सुलक्षण सिंह, दोनों के परिवार सन 1947 के दंगों में बुरी तरह टूट-बिखरकर यहां पहुंचे, लेकिन बाद में अपनी मेहनत के बल पर समाज में अलग पहचान बनाई। अब न महेंद्र सिंह रहे और न ही सुलक्षण सिंह, लेकिन उनके परिवार के सदस्य दंगों से मिले दंश याद कर सिहर उठते हैं।
विज्ञापन

मालगाड़ी के नीचे पति के साथ छिपकर बिताई पूरी रात
विभाजन के दौरान पाकिस्तान के लायलपुर से यहां आकर बसे महेंद्र सिंह दुआ को शुरुआती दिन बेहद कठिनाइयों में बिताने पड़े, लेकिन आज उनके पांचों बेटों ने संयुक्त परिवार में रहते हुए इतना कारोबार बढ़ा लिया है कि दुआ परिवार किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनकी 84 वर्षीय पत्नी अमृत कौर दुआ ने बताया कि पाकिस्तान में उनका हैंडपंप का शोरूम था और अच्छी कमाई होती थी, लेकिन बटवारे के दंगों में सब कुछ बिखर गया। एक दिन सब कुछ छोड़कर वहां से निकलना पड़ा। घर की चाबियां पड़ोस के एक परिवार को दे दीं। लेकिन वह नौबत ही नहीं आई। बताया कि पाकिस्तान से रात में अमृतसर पहुंची ट्रेन से उतरने की हिम्मत नहीं पड़ी। दूसरी पटरी पर खड़ी मालगाड़ी के एक वैगन के नीचे छिपकर पति के साथ पूरी रात गुजारी। अगले दिन फरीदपुर (बरेली) जाकर एक रिश्तेदारी में शरण ली। वर्ष 1984 में दंगों के दौरान खलीलशर्की में कपड़े की दुकान जला दी गई तो परिवार को नए सिरे से मेहनत-मशक्कत करनी पड़ी। छुट्टियों में बच्चों के साथ लुधियाना से अपने मायके आईं अमृत कौर की बेटी जगजीत कौर बोलीं: मम्मी काो जीवन में दो बार दंगों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह हिम्मती बहुत हैं।
विज्ञापन

पूरे कपड़े पहने बगैर पाकिस्तान से चले आए सुलक्षण सिंह
तेल टंकी के पास रहने वाले सुलक्षण सिंह भी मूलत: पाकिस्तान के लाहौर शहर के रहने वाले थे। वर्ष 1978 में हृदयगति रुक जाने से उनका निधन हो गया था। तब उनकी उम्र करीब 55 वर्ष रही होगी। वह वर्ष 1951 में पत्नी शीलावंती के साथ लाहौर से यहां पहुंचे थे। शीलावंती वर्ष 2011 में स्वर्ग सिधार चुकी हैं, लेकिन दंगों की जो पीड़ा उन्होंने झेली, वह बच्चों के जेहन में बसी है। उनके तीन बेटों में सबसे बड़े गुरुवचन सिंह बताते हैं कि दंगे भड़कने पर जान बचाने को कपड़े का जमा-जमाया कारोबार और खेती की जमीनें छोड़कर पाकिस्तान से भागना पड़ा। सब कुछ इतना अकस्मात हुआ कि पिता जी कपड़े भी नहीं पहन पाए और सिर्फ अंडरवियर और बनियान पहनकर नंगे पांव माता जी को साथ लेकर भारत चल पड़े। उनके साथ ताऊ मक्खन सिंह और चाचा सौतन सिंह भी थे। यहां आकर आजीविका के लिए ताऊ की मदद से कपड़ों की फेरी लगाने का काम शुरू किया। आज गुरुवचन कपड़े के अपने शोरूम की देखभाल करते हैं और दोनों छोटे भाई क्रॉकरी स्टोर संभालते हैं। सुलक्षण की दो बेटियां भी हैं जो कृमश: सहारनुपर और अंबाला के अच्छे परिवारों में ब्याही हैं।

अमृत कौर दुआ ।

अमृत कौर दुआ ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed