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मावा मंडी में एफएसडीए का छापा, गंदगी मिलने पर बिक्री पर लगाई रोक
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शाहजहांपुर। होली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, बाजारों मेें खान-पान की वस्तुओं मेें मिलावट बढ़ती जा रही है। मगर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी बोर्ड परीक्षा कराने में जुटे हैं। एफएसडीए के नोडल अधिकारी/एडीएम प्रशासन ने तहसील स्तर पर टीमें गठित कर छापे मारने के निर्देश दिए, लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी के बहाने मिलावटखोरी की ओर से आंखें फेरे हैं। मंगलवार को एफएसडीए के अधिकारियों ने केरूगंज मावा मंडी में छापा मारा तो वहां चबूतरों पर काफी गंदगी मिली। इसके चलते नया चबूतरा बनवाने तक बिक्री प्रतिबंधित की गई है।
एफएसडीए के अधिकारियों ने मंगलवार दोपहर केरूगंज खोया मंडी में अचानक छापा मारा। इस दौरान वहां विक्रेताओं के बैठने वाला चबूतरा जर्जर और गंदा मिला। शौचालय भी काफी गंदा था। मगर इसके बावजूद वहां से कोई सैंपल नहीं लिया गया। अधिकारियों ने मावा विक्रेताओं को शुद्धता और आसपास सफाई रखने का पाठ पढ़ाया। कार्रवाई के नाम पर अभिहित अधिकारी विजय कुमार वर्मा ने नया चबूतरा बनने और शौचालय की सफाई होने तक वहां मावा बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। उन्होंने कहा कि मावा बिक्री के लिए व्यापारी कोई वैकल्पिक स्थान चुन सकते हैं, लेकिन वहां किसी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए।
कार्रवाई के लिए परीक्षा ड्यूटी का बहाना
होली में अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और मिलावटखोर भी पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। मावा से लेकर सूजी, मैदा, बेसन, चीनी सरसों तेल, वनस्पति घी, रिफाइंड ऑयल और मसालों तक में अखाद्य वस्तुओं का घालमेल बढ़ गया है। कीमतों में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। मगर एफएसडीए को इन वस्तुओं की शुद्धता की कोई परवाह नहीं है। संबंधित अधिकारी डीएम के निर्देश का हवाला देकर बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के नाम पर परीक्षा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
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इस तरह पहचानें खाद्य वस्तुओं में मिलावट
दो साल पहले तत्कालीन खाद्य आयुक्त ने एडवायजरी जारी कर खाद्य वस्तुओं मेें मिलावट पहचानने के तरीके बताए थे। इसमें दूध की जांच लैक्टोमीटर से करने का सुझाव दिया गया, लेकिन सस्ता होने के बावजूद यह उपकरण सभी घरों में नहीं होता। ऐसे में फर्श पर दूध की बूंद गिराकर शुद्धता की पहचान की जा सकती है। अगर दूध फर्श पर टिका रहे और सूखने के बाद सफेद निशान छोड़े तो मानें कि वह प्रयोग करने योग्य है। मावा में आलू, शकरकंद आदि स्टार्च युक्त वस्तुओं की पहचान के लिए लिटमस पेपर के प्रयोग की सलाह दी गई है। मावा में यह चीजें मिलाई जाने पर लिटमस पेपर का कलर नीला हो जाएगा। इसी तरह चीनी में सूजी, दालों में रंग और पिसी लाल मिर्च, काली मिर्च में पपीता बीज की मिलावट की परख इन वस्तुओं को पानी में घोलकर करने की सलाह दी गई है।
मिलावट रोकने को टीमें गठित करने के बारे में एडीएम से वार्ता हो चुकी है। उन्हें बताया गया कि सभी एफएसओ यूपी बोर्ड परीक्षा की दोनों पालियों में निगरानी ड्यूटी कर रहे हैं। इसलिए विभागीय स्तर पर छापे और सैंपल लेने मेें कठिनाई हो रही है। फिलहाल, एफएसओ को परीक्षा ड्यूटी के बाद खाली समय में बाजारों की सर्विलांस कर संभावित ठिकाने चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। - विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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एफएसडीए के अधिकारियों ने मंगलवार दोपहर केरूगंज खोया मंडी में अचानक छापा मारा। इस दौरान वहां विक्रेताओं के बैठने वाला चबूतरा जर्जर और गंदा मिला। शौचालय भी काफी गंदा था। मगर इसके बावजूद वहां से कोई सैंपल नहीं लिया गया। अधिकारियों ने मावा विक्रेताओं को शुद्धता और आसपास सफाई रखने का पाठ पढ़ाया। कार्रवाई के नाम पर अभिहित अधिकारी विजय कुमार वर्मा ने नया चबूतरा बनने और शौचालय की सफाई होने तक वहां मावा बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। उन्होंने कहा कि मावा बिक्री के लिए व्यापारी कोई वैकल्पिक स्थान चुन सकते हैं, लेकिन वहां किसी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए।
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कार्रवाई के लिए परीक्षा ड्यूटी का बहाना
होली में अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और मिलावटखोर भी पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। मावा से लेकर सूजी, मैदा, बेसन, चीनी सरसों तेल, वनस्पति घी, रिफाइंड ऑयल और मसालों तक में अखाद्य वस्तुओं का घालमेल बढ़ गया है। कीमतों में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है। मगर एफएसडीए को इन वस्तुओं की शुद्धता की कोई परवाह नहीं है। संबंधित अधिकारी डीएम के निर्देश का हवाला देकर बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के नाम पर परीक्षा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
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इस तरह पहचानें खाद्य वस्तुओं में मिलावट
दो साल पहले तत्कालीन खाद्य आयुक्त ने एडवायजरी जारी कर खाद्य वस्तुओं मेें मिलावट पहचानने के तरीके बताए थे। इसमें दूध की जांच लैक्टोमीटर से करने का सुझाव दिया गया, लेकिन सस्ता होने के बावजूद यह उपकरण सभी घरों में नहीं होता। ऐसे में फर्श पर दूध की बूंद गिराकर शुद्धता की पहचान की जा सकती है। अगर दूध फर्श पर टिका रहे और सूखने के बाद सफेद निशान छोड़े तो मानें कि वह प्रयोग करने योग्य है। मावा में आलू, शकरकंद आदि स्टार्च युक्त वस्तुओं की पहचान के लिए लिटमस पेपर के प्रयोग की सलाह दी गई है। मावा में यह चीजें मिलाई जाने पर लिटमस पेपर का कलर नीला हो जाएगा। इसी तरह चीनी में सूजी, दालों में रंग और पिसी लाल मिर्च, काली मिर्च में पपीता बीज की मिलावट की परख इन वस्तुओं को पानी में घोलकर करने की सलाह दी गई है।
मिलावट रोकने को टीमें गठित करने के बारे में एडीएम से वार्ता हो चुकी है। उन्हें बताया गया कि सभी एफएसओ यूपी बोर्ड परीक्षा की दोनों पालियों में निगरानी ड्यूटी कर रहे हैं। इसलिए विभागीय स्तर पर छापे और सैंपल लेने मेें कठिनाई हो रही है। फिलहाल, एफएसओ को परीक्षा ड्यूटी के बाद खाली समय में बाजारों की सर्विलांस कर संभावित ठिकाने चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। - विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग