फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   dilapidated school

राजकीय विद्यालयों की जर्जर हालत सुधारने को शासन के लिए मांगे प्रस्ताव

Tue, 05 Oct 2021 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 01:54 AM IST
विज्ञापन
dilapidated school
कलान का जीआईसी भवन - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जनपद में दशकों पूर्व बने जिन राजकीय विद्यालयों के भवन खस्ताहाल हो चुके हैं, उनकी हालत में जल्द सुधार होगा। इसके लिए शासन ने विद्यालय भवनों की मरम्मत के लिए शासन से प्रस्ताव मांगे हैं। शासनादेश का अनुपालन करते हुए डीएम ने तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में तीन-तीन सदस्यीय कमेटियां गठित कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार ये कमेटियां विद्यालय भवनों का सर्वे करके उनकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी और उसी आधार पर शासन को अनुमानित बजट की मांग भेजी जाएगी।
विज्ञापन

जनपद में राजकीय श्रेणी के आठ इंटर कॉलेज और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 से अधिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं। शहर में बालक-बालिकाओं के दो इंटर कॉलेज, कांट, चांदापुर व कलान में बालकों के राजकीय इंटर कॉलेज और पुवायां व तिलहर में बालिकाओं के दो कॉलेज हैं। इनमें से कई विद्यालयों के भवन दशकों पुराने होने के कारण अब जर्जर हालत में पहुंच गए हैं।
विज्ञापन

कहीं कमरों में दीवारों और छतों का प्लास्टर छूट रहा है तो कहीं मौसम की मार से दीवारें दरक रही हैं। इसके बावजूद उन्हीं में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं क्योंकि छात्र-छात्राओं को बिठाने के लिए वहां अन्य कोई सुरक्षित स्थान नहीं हैं। बारिश के सीजन में छतें टपकने पर कमरों में रखा फर्नीचर और अन्य सामान खराब हो जाता है। ऐसे में बड़े आकार वाले हॉल जैसे कमरों में एक साथ कई कक्षाएं लगानी पड़ जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शहर में बालिकाओं का खस्ताहाल हो चुका दशकों पुराना भवन ढहाकर उसे नए सिरे से बनाया जा रहा है, लेकिन कचहरी के पास बालकों के राजकीय इंटर कॉलेज के भवन की अभी तक कोई सुधि नहीं ली गई थी। जीआईसी के पूर्व प्रधानाचार्य रणवीर सिंह का मजबूती के लिहाज से मुख्य भवन की दीवारें और बरामदें नवनिर्मित ब्लॉक वाले कमरों की तुलना में आज भी ज्यादा मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में भी मुख्य भवन की मरम्मत के लिए एक-दो बार प्रस्ताव मांगे गए, लेकिन उसकी मजबूती देख उसे नए सिरे से बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया।
शासन से आदेश मिलने के बाद डीएम ने तहसील स्तर पर राजकीय विद्यालयों के भवनों की गुणवत्ता परख के लिए जो कमेटियां गठित की हैं, उनमें अपेक्षित तकनीकी कार्यों का आकलन करने के लिए लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता और आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराने के लिए क्षेत्रीय राजकीय कॉलेज के एक प्रधानाचार्य को सदस्य नामित किया गया है।
कलान जीआईसी के कई कमरे हुए खस्ताहाल
कलान मेें करीब चार दशक पहले बनाए गए राजकीय इंटर कॉलेज भवन के लगभग आधा दर्जन कमरे खस्ताहाल हो चुके हैं। उनका प्लास्टर छूटकर गिर रहा है जिससे शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन में काफी परेशानी हो रही है और उनके साथ हर समय कोई अप्रिय घटना होने का खतरा बना रहता है। प्रधानाचार्य सियाराम का कहना है कि इससे निजात पाने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि कॉलेज भवन का निर्माण सन 1985 में हुआ था और तबसे अभी तक कोई मरम्मत नहीं हुई पर इस बार शासन ने मरम्मत कराने के लिए प्रस्ताव मांगा है। प्रधानाचार्य के अनुसार लोक निर्माण विभाग के अभियंता और ठेकेदार द्वारा कॉलेज भवन का निरीक्षण किया जा चुका है। साथ ही कॉलेज के मुख्य गेट पर नाला से हो रहे जलभराव की समस्या को लेकर एसडीएम से पत्राचार किया गया है।

शासन के आदेश पर जनपद में राजकीय श्रेणी के सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवनों की मरम्मत के लिए उनकी भौतिक दशा का सर्वे कराया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि भवन कब निर्मित हुआ और उसके जर्जर होने के कोई अन्य कारण तो नहीं हैं। यदि कहीं किसी कॉलेज को अतिरिक्त कक्षाओं की आवश्यकता है तो प्रस्ताव में उसे भी शामिल किया जाएगा। इन प्रस्तावों के आधार पर लोक निर्माण विभाग के अभियंता अनुमानित लागत का इस्टीमेट तैयार कर प्रस्तुत करेंगे। सभी एसडीएम को यह कार्य वरीयता के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं।
-रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed