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धान की खरीद और भुगतान के लिए भटक रहे किसान
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मिर्जापुर में बाढ़ के बाद फसलों के सड़ने से फैली दुर्गंध से लोगों का खेतों से निकलना मुश्किल
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। दिवाली का त्योहार नजदीक है, लेकिन किसानों के धान की न तो ठीक से खरीद हो पा रही और न ही भुगतान हो रहा है। भारी बारिश और बाढ़ की से फसलें पहले ही तबाह हो चुकी हैं। जिन किसानों के धान नष्ट होने से बच गए वो बेचने के लिए भटक रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद के नाम पर किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। नमी और खराबी किसानों के धान क्रय केंद्र से लौटा दिए जाते हैं। जिन किसानों के धान की तौल हो रही है, उन्हें भुगतान देर से मिल रहा है।
शासन से जनपद को समर्थन मूल्य पर 46.81 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 2.50 लाख क्विंटल ज्यादा है। कहने को सरकारी खरीद गत एक अक्तूबर से शुरू हो गई थी, लेकिन शुरुआती एक पखवाड़े तक तमाम क्रय केंद्र अस्तित्व में ही नहीं आए थे। बाद में भारी वर्षा हुई और उसके बाद कई इलाकों में बाढ़ कहर बरपाने लगी। इस कारण सरकारी केंद्रों पर धान खरीद न के बराबर हुई।
यही वजह है कि अभी तक बमुश्किल 1.60 लाख क्विंटल धान खरीदा जा सका है। शासन ने तौल होने के 72 घंटे अर्थात तीन दिन में भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किसानों के खातों में पहुंचाने के आदेश दिए हैं, लेकिन इस नियम का पालन ही नहीं हो रहा है। मजबूरन, किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर गल्ला आढ़तों पर बेचनी पड़ रही है।
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मेरे पास करीब 1200 क्विंटल धान है, जिसमें करीब 700 क्विंटल धान क्षेत्र की एक राइस मिल में देना पड़ा। कई अधिकारियों से फोन पर शिकायत भी की, मगर धान समर्थन मूल्य पर नहीं बिक सका। - जगराज सिंह, शाहबाद
मेरी धान की फसल कट चुकी है। करीब दो सौ क्विंटल धान एक आढ़ती को बेचना पड़ा। करीब 100 क्विंटल धान बिक्री को पड़ा है। जांच में नमी सिर्फ 16 प्रतिशत है, लेकिन बिक्री कहां करें। - आनंद ठाकुर, शंकरपुर पिटरहाई
मैं अपना 50 क्विंटल धान लेकर तिलहर मंडी स्थित खरीद केंद्र पर आया, लेकिन केंद्र प्रभारी ने धान में कमी बताकर तोल नहीं कराई। मजबूरी में मुझे 880 रुपये के भाव पर धान आढ़त पर बेचना पड़ा है। - मनमोहन, उमरसड़
मेरा 24 क्विंटल धान था, लेकिन क्रय केंद्र प्रभारी ने धान में डैमेज ज्यादा बताकर खरीदने से मना कर दिया जबकि मेरा धान साफ सुथरा अच्छी क्वालिटी में था। मजबूरी में आढ़त पर 1280 के भाव बेचना पड़ा। - विश्राम, खमरिया
खरीद केंद्र किसानों का शोषण कर रहे हैं, क्योंकि वहां सरकार के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। मैं अपना 55 क्विंटल धान सुखाकर लाया, लेकिन सेंटर पर नहीं तौला गया। उसे कम कीमत पर बेचना पड़ा। - राजेंद्र, उमरसड़
मैं अपने धान लेकर आज तिलहर मंडी में क्रय केंद्रों पर घूमता रहा, लेकिन किसी भी केंद्र प्रभारी ने धान खरीदने की स्वीकृति नहीं दी है। मजबूरी में मुझे धान आढ़त पर कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। - चंद्रशेखर, चाहरपुर
धान सेंटरों पर नहीं बिक पा रहा है। आढ़तों और राइस मिलों पर रेट 13 से 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ने का भुगतान नहीं मिल रहा है। ऐसे में त्योहार की खरीदारी कैसे करें। - प्रेमशंकर, उमरिया पुवायां
महंगाई आसमान पर पहुंच गई है। ऐसे में दिवाली भी आम दिनों की तरह की मनानी पड़ेगी। धान को राइस मिलों पर बेचना पड़ रहा है। सरसों का तेल बेहद महंगा है, इस कारण लोग दिये भी कम ही जला पाएंगे। - अविरल कुमार, गंगसरा पुवायां
जनपद में अभी तक लगभग 16000 टन धान खरीद हो चुकी है। इसमें 13000 टन धान का भुगतान किसानों के बैंक खाते में भेजा जा चुका है। शासन ने तीन दिन मेें भुगतान के आदेश दिए हैं, लेकिन सत्यापन की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में समय ज्यादा लग रहा है। निर्धारित नमी मानक वाला धान खरीदने से यदि कोई केंद्र प्रभारी इनकार करे तो किसान संबंधित एसडीएम, तहसीलदार अथवा मंडी सचिव से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- कमलेश पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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शासन से जनपद को समर्थन मूल्य पर 46.81 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 2.50 लाख क्विंटल ज्यादा है। कहने को सरकारी खरीद गत एक अक्तूबर से शुरू हो गई थी, लेकिन शुरुआती एक पखवाड़े तक तमाम क्रय केंद्र अस्तित्व में ही नहीं आए थे। बाद में भारी वर्षा हुई और उसके बाद कई इलाकों में बाढ़ कहर बरपाने लगी। इस कारण सरकारी केंद्रों पर धान खरीद न के बराबर हुई।
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यही वजह है कि अभी तक बमुश्किल 1.60 लाख क्विंटल धान खरीदा जा सका है। शासन ने तौल होने के 72 घंटे अर्थात तीन दिन में भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किसानों के खातों में पहुंचाने के आदेश दिए हैं, लेकिन इस नियम का पालन ही नहीं हो रहा है। मजबूरन, किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर गल्ला आढ़तों पर बेचनी पड़ रही है।
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मेरे पास करीब 1200 क्विंटल धान है, जिसमें करीब 700 क्विंटल धान क्षेत्र की एक राइस मिल में देना पड़ा। कई अधिकारियों से फोन पर शिकायत भी की, मगर धान समर्थन मूल्य पर नहीं बिक सका। - जगराज सिंह, शाहबाद
मेरी धान की फसल कट चुकी है। करीब दो सौ क्विंटल धान एक आढ़ती को बेचना पड़ा। करीब 100 क्विंटल धान बिक्री को पड़ा है। जांच में नमी सिर्फ 16 प्रतिशत है, लेकिन बिक्री कहां करें। - आनंद ठाकुर, शंकरपुर पिटरहाई
मैं अपना 50 क्विंटल धान लेकर तिलहर मंडी स्थित खरीद केंद्र पर आया, लेकिन केंद्र प्रभारी ने धान में कमी बताकर तोल नहीं कराई। मजबूरी में मुझे 880 रुपये के भाव पर धान आढ़त पर बेचना पड़ा है। - मनमोहन, उमरसड़
मेरा 24 क्विंटल धान था, लेकिन क्रय केंद्र प्रभारी ने धान में डैमेज ज्यादा बताकर खरीदने से मना कर दिया जबकि मेरा धान साफ सुथरा अच्छी क्वालिटी में था। मजबूरी में आढ़त पर 1280 के भाव बेचना पड़ा। - विश्राम, खमरिया
खरीद केंद्र किसानों का शोषण कर रहे हैं, क्योंकि वहां सरकार के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। मैं अपना 55 क्विंटल धान सुखाकर लाया, लेकिन सेंटर पर नहीं तौला गया। उसे कम कीमत पर बेचना पड़ा। - राजेंद्र, उमरसड़
मैं अपने धान लेकर आज तिलहर मंडी में क्रय केंद्रों पर घूमता रहा, लेकिन किसी भी केंद्र प्रभारी ने धान खरीदने की स्वीकृति नहीं दी है। मजबूरी में मुझे धान आढ़त पर कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। - चंद्रशेखर, चाहरपुर
धान सेंटरों पर नहीं बिक पा रहा है। आढ़तों और राइस मिलों पर रेट 13 से 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ने का भुगतान नहीं मिल रहा है। ऐसे में त्योहार की खरीदारी कैसे करें। - प्रेमशंकर, उमरिया पुवायां
महंगाई आसमान पर पहुंच गई है। ऐसे में दिवाली भी आम दिनों की तरह की मनानी पड़ेगी। धान को राइस मिलों पर बेचना पड़ रहा है। सरसों का तेल बेहद महंगा है, इस कारण लोग दिये भी कम ही जला पाएंगे। - अविरल कुमार, गंगसरा पुवायां
जनपद में अभी तक लगभग 16000 टन धान खरीद हो चुकी है। इसमें 13000 टन धान का भुगतान किसानों के बैंक खाते में भेजा जा चुका है। शासन ने तीन दिन मेें भुगतान के आदेश दिए हैं, लेकिन सत्यापन की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में समय ज्यादा लग रहा है। निर्धारित नमी मानक वाला धान खरीदने से यदि कोई केंद्र प्रभारी इनकार करे तो किसान संबंधित एसडीएम, तहसीलदार अथवा मंडी सचिव से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- कमलेश पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी