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धान केंद्रों पर सन्नाटा, कागजों पर सैकड़ों क्विंटल खरीद
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तलिहर मंडी परिसर में क्रय केंद्रों के बाहर पसरा सन्नाटा। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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तिलहर। मंडी में स्थापित धान खरीद केंद्रों पर धान की आवक न होने के कारण सन्नाटा पसरा है। इसके बावजूद सभी केंद्रों पर 500 से 700 क्विंटल की आवक प्रतिदिन दर्शाई जा रही है। पिछले महीने तक केंद्रों की आवक लगभग नगण्य थी, लेकिन कुछ दिनों में आवक दो लाख कुंटल से ऊपर हो चुकी है। प्रतिदिन सैकड़ों कुंटल खरीद कागजों पर दर्शाई जा रही है, जिसका कोई ध्यान नहीं देने वाला नहीं है।
मंडी परिसर में किसानों को धान की उपज का वाजिब मूल्य देने के लिए सरकार ने 17 क्रय केंद्र खोले हैं। इन सभी केंद्रों पर अब तक दो लाख क्विंटल से ऊपर की खरीद हो चुकी है। प्रारंभिक दौर में मंडी में किसानों के धान की आवक बहुत तेजी से हुई। इस दौरान केंद्रों पर धान खरीद लगभग शून्य रही। किसानों का कहना है कि धान केंद्रों में खरीद न होने के कारण मजबूरी में 11 से 12 सौ रुपये में आढ़तियों को बेच दिया।
केंद्र प्रभारियों ने धान खराब बताकर खरीद नहीं की। कुछ किसान संगठनों के नेताओं ने मंडी गेट पर अपना तंबू गाड़कर विरोध-प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में सब कुछ ठंडा पड़ गया। लगभग एक सप्ताह से अधिक समय से मंडी में सन्नाटा पसरा है, लेकिन धान खरीद केंद्रों पर प्रतिदिन 300 क्विंटल धान खरीद न होने के निर्देश के बावजूद 600 से 700 क्विंटल प्रतिदिन धान की खरीद कागजों पर चढ़ रही है।
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मंडी में सन्नाटा पसरे होने और धान खरीद केंद्रों पर प्रतिदिन हो रही तौल के बारे में मैं कुछ भी नहीं बता सकता हूं। कहां से कैसे तौल हो रही है यह केंद्र प्रभारी ही बताएंगे।
जगदीश प्रसाद वर्मा, सचिव मंडी समिति तिलहर।
मंडी में सन्नाटे के बीच केंद्रों पर हो रही तौल के बारे में मंडी सचिव से बात करता हूं। मंडी में सन्नाटा है और केंद्रों पर तौल दर्शाई जा रही है तो इस मामले की जांच की जाएगी।
हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम तिलहर।
मैं अपना धान लेकर मंडी आया हूं। सरकारी खरीद केंद्र पर धान खराब बताकर लेने से मना कर दिया है। मेरा टोकन भी नहीं काटा गया। बाजार में आढ़त पर 14 सौ रुपये में धान बेचना पड़ा है। केंद्र प्रभारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। वीरेंद्र कुमार, गांव वमनुआ।
सेंटर पर कोई धान लेने को तैयार नहीं है। सरकारी खरीद केंद्र दिखावा बने हुए हैं नेताओं के धान तौले जाते हैं। हम गरीब लोगों का धान बाजार में ही विकता है। कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। बाजार में 1250 रुपए में धान खरीदा गया है। लागत मूल्य भी नहीं निकल पाया।
भगवान दास, गांव वमनुआ।
मैं कई सेंटरों पर धान लेकर गया लेकिन किसी ने भी मेरा धान नहीं खरीदा। खरीद केंद्र माफियाओं के कब्जे में है। मजबूरी में मुझे अपना धान व्यापारी को बेचना पड़ा है। कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। सरकार के आदेश को कोई सुनने वाला नहीं है।
विशाल कुमार, गांव भिटारा।
मैंने धान बेचने के लिए सेंटरों पर कई दिन चक्कर लगाए लेकिन किसी भी केंद्र प्रभारी ने धान नहीं खरीदा। मुझे अपना धान खुले बाजार में ओने पौने दामों में बेचने को मजबूर होना पड़ा है। खरीद केंद्र माफियाओं के चंगुल में है। बाजार में सन्नाटा है लेकिन केंद्र प्रभारी सैकडों कुंटल धान रोज कागजों पर चढ़ा रहे हैं।
राजेश कुमार मौर्य, पूर्व प्रधान गांव रुजवारी।
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मंडी परिसर में किसानों को धान की उपज का वाजिब मूल्य देने के लिए सरकार ने 17 क्रय केंद्र खोले हैं। इन सभी केंद्रों पर अब तक दो लाख क्विंटल से ऊपर की खरीद हो चुकी है। प्रारंभिक दौर में मंडी में किसानों के धान की आवक बहुत तेजी से हुई। इस दौरान केंद्रों पर धान खरीद लगभग शून्य रही। किसानों का कहना है कि धान केंद्रों में खरीद न होने के कारण मजबूरी में 11 से 12 सौ रुपये में आढ़तियों को बेच दिया।
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केंद्र प्रभारियों ने धान खराब बताकर खरीद नहीं की। कुछ किसान संगठनों के नेताओं ने मंडी गेट पर अपना तंबू गाड़कर विरोध-प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में सब कुछ ठंडा पड़ गया। लगभग एक सप्ताह से अधिक समय से मंडी में सन्नाटा पसरा है, लेकिन धान खरीद केंद्रों पर प्रतिदिन 300 क्विंटल धान खरीद न होने के निर्देश के बावजूद 600 से 700 क्विंटल प्रतिदिन धान की खरीद कागजों पर चढ़ रही है।
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मंडी में सन्नाटा पसरे होने और धान खरीद केंद्रों पर प्रतिदिन हो रही तौल के बारे में मैं कुछ भी नहीं बता सकता हूं। कहां से कैसे तौल हो रही है यह केंद्र प्रभारी ही बताएंगे।
जगदीश प्रसाद वर्मा, सचिव मंडी समिति तिलहर।
मंडी में सन्नाटे के बीच केंद्रों पर हो रही तौल के बारे में मंडी सचिव से बात करता हूं। मंडी में सन्नाटा है और केंद्रों पर तौल दर्शाई जा रही है तो इस मामले की जांच की जाएगी।
हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम तिलहर।
मैं अपना धान लेकर मंडी आया हूं। सरकारी खरीद केंद्र पर धान खराब बताकर लेने से मना कर दिया है। मेरा टोकन भी नहीं काटा गया। बाजार में आढ़त पर 14 सौ रुपये में धान बेचना पड़ा है। केंद्र प्रभारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। वीरेंद्र कुमार, गांव वमनुआ।
सेंटर पर कोई धान लेने को तैयार नहीं है। सरकारी खरीद केंद्र दिखावा बने हुए हैं नेताओं के धान तौले जाते हैं। हम गरीब लोगों का धान बाजार में ही विकता है। कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। बाजार में 1250 रुपए में धान खरीदा गया है। लागत मूल्य भी नहीं निकल पाया।
भगवान दास, गांव वमनुआ।
मैं कई सेंटरों पर धान लेकर गया लेकिन किसी ने भी मेरा धान नहीं खरीदा। खरीद केंद्र माफियाओं के कब्जे में है। मजबूरी में मुझे अपना धान व्यापारी को बेचना पड़ा है। कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। सरकार के आदेश को कोई सुनने वाला नहीं है।
विशाल कुमार, गांव भिटारा।
मैंने धान बेचने के लिए सेंटरों पर कई दिन चक्कर लगाए लेकिन किसी भी केंद्र प्रभारी ने धान नहीं खरीदा। मुझे अपना धान खुले बाजार में ओने पौने दामों में बेचने को मजबूर होना पड़ा है। खरीद केंद्र माफियाओं के चंगुल में है। बाजार में सन्नाटा है लेकिन केंद्र प्रभारी सैकडों कुंटल धान रोज कागजों पर चढ़ा रहे हैं।
राजेश कुमार मौर्य, पूर्व प्रधान गांव रुजवारी।

आरएफसी खरीद केंद्र प्रथम और तृतीय पर लटकता फटा बैनर और खाली पड़ी मेज । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR