शाहजहांपुर। चित्रा टॉकीज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को व्यास डॉ. दामोदर दीक्षित ने श्रीकृष्ण और बलदाऊ के नामकरण का प्रसंग सुनाया। स्वामी गर्गाचार्य ने उनका नामकरण किया और बड़े होने के कारण बलदेव का नाम पहले रखा गया। इसके पश्चात भगवान की बाल लीलाओं का विस्तृत एवं मनमोहक वर्णन करते हुए माखन चोरी, चीर हरण आदि प्रसंग सुनाए।
गोचारण लीला में उन्होंने सुनाया कि जब एक दिन भगवान गोचारण के लिए गायों को लेकर गए तब ब्रह्माजी को शक हुआ कि यह ब्रह्म नहीं हो सकता जो गाय चरा रहा है। ऐसा ज्ञात होने पर भगवान ब्रह्माजी के आसन पर जाकर स्वयं बैठ गए हैं। ब्रह्माजी ने स्तुति की और क्षमा मांगी।
इसके बाद व्यास ने गोवर्धन लीला व गोपियों के साथ रासलीला का वर्णन किया। गोपी गीत और भ्रमर गीत के संबंध में बताया। पुरोहित अनन्तराम ने व्यास गद्दी पूजन कराया। रामानंद दीक्षित, सुमन, रमेश त्रिपाठी, पं. रामदुलारे, स्वामी सत्यानंद, स्वामी सूर्य प्रकाश आदि ने आशीर्वचन प्रदान किए। प्रसून त्रिपाठी व रामभली की संगत पर बहुत सुंदर हनुमान चालीसा प्रस्तुति की।