{"_id":"662ae8e89f442f5f6701be18","slug":"despite-the-ban-planting-of-satha-paddy-in-banda-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1038-117460-2024-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: प्रतिबंध के बाद भी बंडा में साठा धान की रोपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: प्रतिबंध के बाद भी बंडा में साठा धान की रोपाई
विज्ञापन
बंडा क्षेत्र में लगाया गया साठा धान। संवाद
फोटो- 17
-संपन्न किसानों की मनमानी से घट सकता है जल स्तर, लेखपाल भी नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। प्रतिबंध के बाद भी बंडा के कई गांवों में साठा धान की रोपाई धड़ल्ले से की जा रही है। संपन्न किसानों की मनमानी से क्षेत्र में जलस्तर घटने का खतरा है। लेखपाल ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
तहसील क्षेत्र में कृषि भू-भाग के कुल 35 प्रतिशत भाग पर साठा धान की खेती की जाने लगी थी। कहने को तो यह साठा 60 दिन में तैयार होने वाली फसल है, लेकिन इसके तैयार होने में लगभग 90 दिन का समय लग जाता है। इसकी सिंचाई के लिए पानी के अंधाधुंध दोहन से भू-गर्भीय जलस्तर घटने लगता है। हैंडपंप सूखने लगते हैं।
खरीफ सीजन में बोई जाने वाली फसलों की उत्पादकता नहरों या फिर संरक्षित भूगर्भ जल की उपलब्धता पर आश्रित होती है। साठा धान में पानी में सर्वाधिक खपत प्रति स्क्वायर वर्ग मीटर 50 से 60 गैलन तक होती थी। इससे भू-गर्भ जल का अत्यधिक दोहन होता है। जल स्तर नीचे जा रहा था।
विज्ञापन
मामला तूल पकड़ने पर 2019-20 में डीएम ने साठा धान लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। प्रतिबंध के बाद भू-गर्भ जलस्तर बढ़ने लगा। अब बंडा ब्लॉक के कई गांवों में कुछ संपन्न किसान मनमानी पर उतर आए हैं। किसानों ने साठा की रोपाई करा दी है और तमाम किसान साठा की रोपाई करा रहे हैं।
संबंधित क्षेत्र के लेखपालों ने अभी तक साठा धान पर रोक लगाने के लिए कोई कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। बंडा की देखादेखी में दूसरे क्षेत्रों में साठा धान लगने लगा तो भूगर्भ जलस्तर फिर से गिरने की आशंका है। साठा धान की रोपाई से भविष्य में पेयजल संकट हो सकता है।
-- -- -
राइस मिल मालिक और किसान दे रहा बढ़ावा
पुवायां क्षेत्र में साठा धान की रोपाई के लिए कुछ राइस मिल मालिकों का नाम चर्चा में है। कारण है कि साठा धान नहीं लगने से राइस मिल को धान कम मिल पाता है। राइस मिल मालिक और बड़े किसान लखीमपुर में साठा धान पर प्रतिबंध न होने का हवाला देते हुए शाहजहांपुर में भी साठा धान की रोपाई कर रहे हैं।
-- -- -
सिर्फ आदेश तक ही रह गए सीमित
गांव बरीबरा के पीसी सिंह ने डीएम को संबोधित पत्र एसडीएम को देकर बंडा के गांव गहलुइया, बरीबरा, भांवी, नवदिया बंकी, अखत्यारपुर, फगुुनिहाई, महोलिया, मकसूदापुर, अजोधापुर में प्रतिबंध के बाद भी साठा रोपाई की शिकायत की थी।
एसडीएम प्रशासन संजय कुमार ने जिला कृषि अधिकारी को साठा धान की रोपाई के संबंध में पत्र भेजा था। इस पर जिला कृषि अधिकारी सतीश चंद्र पाठक ने अपर जिला कृषि अधिकारी, पुवायां, बंडा, खुटार, सिंधौली के सहायक विकास अधिकारी कृषि, पुवायां, बंडा, खुटार, सिंधौली के तकनीकी सहायक और उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय के विषय वस्तु विशेषज्ञ को पत्र आदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी अपने क्षेत्र में भ्रमण कर डीएम के साठा धान पर रोक का पालन कराएं और रिपोर्ट उनके साथ ही एसडीएम को भी दें। बावूजद साठा की रोपाई पर रोक नहीं लग सकी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अधिकारी और कर्मचारियों को आदेशित किया गया है। साठा पर रोक लगवाई जाएगी।
विज्ञापन
-संपन्न किसानों की मनमानी से घट सकता है जल स्तर, लेखपाल भी नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। प्रतिबंध के बाद भी बंडा के कई गांवों में साठा धान की रोपाई धड़ल्ले से की जा रही है। संपन्न किसानों की मनमानी से क्षेत्र में जलस्तर घटने का खतरा है। लेखपाल ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
तहसील क्षेत्र में कृषि भू-भाग के कुल 35 प्रतिशत भाग पर साठा धान की खेती की जाने लगी थी। कहने को तो यह साठा 60 दिन में तैयार होने वाली फसल है, लेकिन इसके तैयार होने में लगभग 90 दिन का समय लग जाता है। इसकी सिंचाई के लिए पानी के अंधाधुंध दोहन से भू-गर्भीय जलस्तर घटने लगता है। हैंडपंप सूखने लगते हैं।
विज्ञापन
खरीफ सीजन में बोई जाने वाली फसलों की उत्पादकता नहरों या फिर संरक्षित भूगर्भ जल की उपलब्धता पर आश्रित होती है। साठा धान में पानी में सर्वाधिक खपत प्रति स्क्वायर वर्ग मीटर 50 से 60 गैलन तक होती थी। इससे भू-गर्भ जल का अत्यधिक दोहन होता है। जल स्तर नीचे जा रहा था।
विज्ञापन
मामला तूल पकड़ने पर 2019-20 में डीएम ने साठा धान लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। प्रतिबंध के बाद भू-गर्भ जलस्तर बढ़ने लगा। अब बंडा ब्लॉक के कई गांवों में कुछ संपन्न किसान मनमानी पर उतर आए हैं। किसानों ने साठा की रोपाई करा दी है और तमाम किसान साठा की रोपाई करा रहे हैं।
संबंधित क्षेत्र के लेखपालों ने अभी तक साठा धान पर रोक लगाने के लिए कोई कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। बंडा की देखादेखी में दूसरे क्षेत्रों में साठा धान लगने लगा तो भूगर्भ जलस्तर फिर से गिरने की आशंका है। साठा धान की रोपाई से भविष्य में पेयजल संकट हो सकता है।
राइस मिल मालिक और किसान दे रहा बढ़ावा
पुवायां क्षेत्र में साठा धान की रोपाई के लिए कुछ राइस मिल मालिकों का नाम चर्चा में है। कारण है कि साठा धान नहीं लगने से राइस मिल को धान कम मिल पाता है। राइस मिल मालिक और बड़े किसान लखीमपुर में साठा धान पर प्रतिबंध न होने का हवाला देते हुए शाहजहांपुर में भी साठा धान की रोपाई कर रहे हैं।
सिर्फ आदेश तक ही रह गए सीमित
गांव बरीबरा के पीसी सिंह ने डीएम को संबोधित पत्र एसडीएम को देकर बंडा के गांव गहलुइया, बरीबरा, भांवी, नवदिया बंकी, अखत्यारपुर, फगुुनिहाई, महोलिया, मकसूदापुर, अजोधापुर में प्रतिबंध के बाद भी साठा रोपाई की शिकायत की थी।
एसडीएम प्रशासन संजय कुमार ने जिला कृषि अधिकारी को साठा धान की रोपाई के संबंध में पत्र भेजा था। इस पर जिला कृषि अधिकारी सतीश चंद्र पाठक ने अपर जिला कृषि अधिकारी, पुवायां, बंडा, खुटार, सिंधौली के सहायक विकास अधिकारी कृषि, पुवायां, बंडा, खुटार, सिंधौली के तकनीकी सहायक और उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय के विषय वस्तु विशेषज्ञ को पत्र आदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी अपने क्षेत्र में भ्रमण कर डीएम के साठा धान पर रोक का पालन कराएं और रिपोर्ट उनके साथ ही एसडीएम को भी दें। बावूजद साठा की रोपाई पर रोक नहीं लग सकी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अधिकारी और कर्मचारियों को आदेशित किया गया है। साठा पर रोक लगवाई जाएगी।