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विश्व कैंसर दिवस : मजबूत संकल्प से कैंसर को दी मात, बिता रहे सामान्य जीवन
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अरविंद कुमार शर्मा। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
आले नबी
शाहजहांपुर। शुक्रवार को विश्व कैंसर दिवस है। हौसले, जज्बे और मजबूत संकल्प से कैंसर जैसी घातक बीमारी को मात दी जा सकती है। समय से इलाज शुरू कर एक नहीं, बल्कि कई लोगों ने कैंसर को शिकस्त दी है। मौत की दहशत से गुजर चुके कैंसर के यह मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। हालांकि, जीवन के ट्रैक पर दौड़ते रहने के लिए रूटीन चेकअप हर दो महीने में कराना पड़ता है।
दहशत में नहीं खोया धैर्य, अरविंद ने दो बार दी कैंसर को शिकस्त
ओसीएफ फैक्टरी में कार्यरत मोहल्ला झंडा कलां निवासी रंगकर्मी अरविंद कुमार शर्मा (चोला) ने दो बार कैंसर को हराया। 2016 में अरविंद कुमार शर्मा ने बात करने में दिक्कत होने पर डाक्टर को दिखाया। दवा खाने के बाद भी फायदा न होने पर बरेली में डाक्टर को दिखाया। जांच में मुंह के कैंसर की शुरुआती स्टेज सामने आई। कैंसर का नाम सुनकर पत्नी अलका और बच्चे घबरा गए। अरविंद ने खुद को संभाला और मुंबई में टेस्ट कराया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में ऑपरेशन कराया। रेडिएशन और कीमोथैरेपी के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए, लेकिन पांच साल बाद 2021 में एक बार फिर कैंसर ने उनकी राह में रोड़ा बनने की कोशिश की। अरविंद बताते हैं कि एक मार्च 2021 को फिर से सर्जरी कराई। पति को कैंसर से बचाते हुए पत्नी अलका कोविड पॉजिटिव हो गईं और अप्रैल में जिंदगी की जंग हार गईं। अरविंद चोला कहते हैं कि बीमारी से डरने की नहीं, बल्कि लड़ने की जरूरत है।
कैंसर पर विजय पाकर जिंदगी के ट्रैक पर दौड़ रहीं गिरीशा
शहर के मघईटोला निवासी कैटर्स अनिल की पत्नी गिरीशा ने पेट के दर्द के दर्द को गंभीरता से नहीं लिया। जब जांच कराई तो कैंसर के लक्षण सामने आए। हिम्मत रखते हुए इलाज शुरू करा ऑपरेशन कराकर कैंसर को हरा दिया। 42 गिरीशा को 2020 में पेट में दर्द होना शुरू हुआ। पहले उन्हें लगा कि पित्त में पथरी के चलते दर्द हो रहा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में चेकअप कराने पर डाक्टर ने पेट का कैंसर होने की आशंका जताई। यह सुनकर पूरा परिवार परेशान हो गया। अनिल ने गिरीशा को हौसला दिया, साथ ही लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार शुरू कराया। तीन कीमोथैरेपी के बाद 2021 में ऑपरेशन कराया। नियमित दवा के सेवन और परहेज के बाद अब गिरीशा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी दवा भी बंद हो चुकी हैं। हालांकि, हर दो महीने के बाद जांच कराने जरूर जाती हैं।
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दो साल जीवित रहने का डाक्टर ने दिया था समय, अब हैं स्वस्थ्य
फोटो नंबर 15
तारीन जलालनगर निवासी संजय की बहन मधु राठौर ने कैंसर जैसी बीमारी को हराकर नया जीवन प्राप्त कर लिया। लखनऊ में जांच कर डाक्टर ने ऑपरेशन के दो साल जीवित रहने की बात कही थी, लेकिन मधु ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से तिब्बती पद्धति से इलाज कराकर कैंसर पर विजय हासिल कर ली। संजय ने अपनी पत्नी मधु की शादी बदायूं में राजेश राठौर के साथ की थी। राजेश सिलाई का काम करते थे। 2018 में मधु की पीठ में दर्दीक्षण कराया। फिर लखनऊ में केजीएमसी ले गए। मधु को ब्रेस्ट कैंसर था, यह फैलते हुए बैक बोन तक पहुंच गया। राजेश की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर संजय अपनी बहन को यहां ले आए। डाक्टरों ने ऑपरेशन के बाद दो साल तक मधु के जीवित रहने की बात कही थी। जिस पर संजय ने मधु को धर्मशाला में तिब्बती पद्धति से इलाज शुरू कराया। अब मधु पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। हालांकि, उनकी दवा अभी चल रही है।
ये हैं लक्षण
- शरीर का घाव नहीं भरना
- गांठ का कम नहीं होना।
- खून का रिसाव दवा से ठीक न होना।
- वजन कम होना, बुखार और भूख में कमी
- हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना।
शरीर के किसी भी अंग में कैंसर का रोग हो सकता है। आमतौर पर मुंह, गर्भाशय, फेफड़ों और लीवर में कैंसर सबसे ज्यादा होता है। 40 की उम्र के बाद लोगों को कैंसर जैसी बीमारी घेरना शुरू कर देती है। प्रकृति चीजों से दूरी और रसायनयुक्त चीजों को खाने से बीमारी हो जाती है। 35 साल के बाद प्रत्येक व्यक्ति को एक साल में एक बार और 40 की आयु के बाद हर छह महीने में अपना चेकअप जरूर कराना चाहिए। बीमारी का पता लगने पर कैंसर जल्दी ठीक हो सकता है। - डॉ. एमएल अग्रवाल, फिजिशियन-राजकीय मेडिकल कॉलेज।
-हर चार फरवरी को लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। जागरूक होने पर शुरुआती स्टेज में पता चलने पर कैंसर से आसानी से लड़ा जा सकता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में डायग्नोसिस और जागरूकता की व्यवस्था है। यदि कैंसर फैला नहीं है तो सर्जरी यहां की जा सकती है। भविष्य में कैंसर जैसे रोग के लिए सुविधाओं को राजकीय मेडिकल कॉलेज में बढ़ाया जाएगा। 16 फरवरी को शासन में होने वाली चर्चा में इस विषय को रखेंगे। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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शाहजहांपुर। शुक्रवार को विश्व कैंसर दिवस है। हौसले, जज्बे और मजबूत संकल्प से कैंसर जैसी घातक बीमारी को मात दी जा सकती है। समय से इलाज शुरू कर एक नहीं, बल्कि कई लोगों ने कैंसर को शिकस्त दी है। मौत की दहशत से गुजर चुके कैंसर के यह मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। हालांकि, जीवन के ट्रैक पर दौड़ते रहने के लिए रूटीन चेकअप हर दो महीने में कराना पड़ता है।
दहशत में नहीं खोया धैर्य, अरविंद ने दो बार दी कैंसर को शिकस्त
ओसीएफ फैक्टरी में कार्यरत मोहल्ला झंडा कलां निवासी रंगकर्मी अरविंद कुमार शर्मा (चोला) ने दो बार कैंसर को हराया। 2016 में अरविंद कुमार शर्मा ने बात करने में दिक्कत होने पर डाक्टर को दिखाया। दवा खाने के बाद भी फायदा न होने पर बरेली में डाक्टर को दिखाया। जांच में मुंह के कैंसर की शुरुआती स्टेज सामने आई। कैंसर का नाम सुनकर पत्नी अलका और बच्चे घबरा गए। अरविंद ने खुद को संभाला और मुंबई में टेस्ट कराया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में ऑपरेशन कराया। रेडिएशन और कीमोथैरेपी के बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए, लेकिन पांच साल बाद 2021 में एक बार फिर कैंसर ने उनकी राह में रोड़ा बनने की कोशिश की। अरविंद बताते हैं कि एक मार्च 2021 को फिर से सर्जरी कराई। पति को कैंसर से बचाते हुए पत्नी अलका कोविड पॉजिटिव हो गईं और अप्रैल में जिंदगी की जंग हार गईं। अरविंद चोला कहते हैं कि बीमारी से डरने की नहीं, बल्कि लड़ने की जरूरत है।
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कैंसर पर विजय पाकर जिंदगी के ट्रैक पर दौड़ रहीं गिरीशा
शहर के मघईटोला निवासी कैटर्स अनिल की पत्नी गिरीशा ने पेट के दर्द के दर्द को गंभीरता से नहीं लिया। जब जांच कराई तो कैंसर के लक्षण सामने आए। हिम्मत रखते हुए इलाज शुरू करा ऑपरेशन कराकर कैंसर को हरा दिया। 42 गिरीशा को 2020 में पेट में दर्द होना शुरू हुआ। पहले उन्हें लगा कि पित्त में पथरी के चलते दर्द हो रहा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में चेकअप कराने पर डाक्टर ने पेट का कैंसर होने की आशंका जताई। यह सुनकर पूरा परिवार परेशान हो गया। अनिल ने गिरीशा को हौसला दिया, साथ ही लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार शुरू कराया। तीन कीमोथैरेपी के बाद 2021 में ऑपरेशन कराया। नियमित दवा के सेवन और परहेज के बाद अब गिरीशा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी दवा भी बंद हो चुकी हैं। हालांकि, हर दो महीने के बाद जांच कराने जरूर जाती हैं।
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दो साल जीवित रहने का डाक्टर ने दिया था समय, अब हैं स्वस्थ्य
फोटो नंबर 15
तारीन जलालनगर निवासी संजय की बहन मधु राठौर ने कैंसर जैसी बीमारी को हराकर नया जीवन प्राप्त कर लिया। लखनऊ में जांच कर डाक्टर ने ऑपरेशन के दो साल जीवित रहने की बात कही थी, लेकिन मधु ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से तिब्बती पद्धति से इलाज कराकर कैंसर पर विजय हासिल कर ली। संजय ने अपनी पत्नी मधु की शादी बदायूं में राजेश राठौर के साथ की थी। राजेश सिलाई का काम करते थे। 2018 में मधु की पीठ में दर्दीक्षण कराया। फिर लखनऊ में केजीएमसी ले गए। मधु को ब्रेस्ट कैंसर था, यह फैलते हुए बैक बोन तक पहुंच गया। राजेश की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर संजय अपनी बहन को यहां ले आए। डाक्टरों ने ऑपरेशन के बाद दो साल तक मधु के जीवित रहने की बात कही थी। जिस पर संजय ने मधु को धर्मशाला में तिब्बती पद्धति से इलाज शुरू कराया। अब मधु पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। हालांकि, उनकी दवा अभी चल रही है।
ये हैं लक्षण
- शरीर का घाव नहीं भरना
- गांठ का कम नहीं होना।
- खून का रिसाव दवा से ठीक न होना।
- वजन कम होना, बुखार और भूख में कमी
- हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना।
शरीर के किसी भी अंग में कैंसर का रोग हो सकता है। आमतौर पर मुंह, गर्भाशय, फेफड़ों और लीवर में कैंसर सबसे ज्यादा होता है। 40 की उम्र के बाद लोगों को कैंसर जैसी बीमारी घेरना शुरू कर देती है। प्रकृति चीजों से दूरी और रसायनयुक्त चीजों को खाने से बीमारी हो जाती है। 35 साल के बाद प्रत्येक व्यक्ति को एक साल में एक बार और 40 की आयु के बाद हर छह महीने में अपना चेकअप जरूर कराना चाहिए। बीमारी का पता लगने पर कैंसर जल्दी ठीक हो सकता है। - डॉ. एमएल अग्रवाल, फिजिशियन-राजकीय मेडिकल कॉलेज।
-हर चार फरवरी को लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। जागरूक होने पर शुरुआती स्टेज में पता चलने पर कैंसर से आसानी से लड़ा जा सकता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में डायग्नोसिस और जागरूकता की व्यवस्था है। यदि कैंसर फैला नहीं है तो सर्जरी यहां की जा सकती है। भविष्य में कैंसर जैसे रोग के लिए सुविधाओं को राजकीय मेडिकल कॉलेज में बढ़ाया जाएगा। 16 फरवरी को शासन में होने वाली चर्चा में इस विषय को रखेंगे। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज

मधु ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

गिरीशा राठौर ।- फोटो : SHAHJAHANPUR