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चीनी मिल के शीरा टैंक में उतरती मिली युवक की लाश
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तिलहर। किसान सहकारी चीनी मिल के टैंक में एक युवक का शव नग्नावस्था में शीरे के ऊपर उतराता मिला। सूचना पर चीनी मिल और पुलिस के तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए। शव को टैंक से बाहर निकाला गया तो शरीर पर हरे रंग की बनियान के अलावा कोई कपड़ा नहीं था। कई दिनों से टैंक में शव पड़े होने कारण फूल गया था। बाएं हाथ का पंजा मुड़ा हुआ था। शव देखकर उसके निर्मम हत्या कर फेंकने की आशंका लोग जता रहे थे। जबकि पुलिस किसी विक्षिप्त युवक के टैंक में अचानक गिर जाने का अंदेशा जता रही है। देर शाम तक युवक की पहचान नहीं हो सकी। उसकी उम्र करीब 38 साल बताई जा रही है।
बृहस्पतिवार सुबह छह बजे चीनी मिल के सुरक्षाकर्मी सुरेश ने जमीन पर बनाए गए शीरा से भरे टैंक में शव को उतराते हुए देखा। बाद में सुरक्षा अधिकारी विनोद वर्मा की सूचना पर मिल प्रबंधक शेर बहादुर सहित मिल के अन्य अधिकारी, सीओ मंगल सिंह रावत, कोतवाल सुनील अहलावत और नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। मजदूरों की सहायता से शव बाहर निकाला गया। युवक के शव पर एक हरे रंग की बनियान जिस पर एट्रैक्ट छपा था। इसके अलावा शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। पैरों की खाल उधड़ी हुई मिली। अंडकोष में सूजन थी। युवक का बाएं हाथ का पंजा मुड़ा हुआ था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। मिल के प्रधान प्रबंधक शेर बहादुर ने बताया कि किसी भी कर्मचारी के लापता होने की सूचना नहीं है। मिल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है। चीनी लदान के ट्रक और गन्ने के ट्रैक्टर ट्रॉली आते हैं। घटना कैसे हो गई कुछ पता नहीं चल रहा है। इस संबंध में कोतवाल सुनील अहलावत ने बताया कि कोई मानसिक मंदित गलती से गिर गया होगा। उसकी पहचान नहीं हो सकी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चीनी मिल की जर्जर मशीनें और ढांचा दे रहा घटनाओं को दावत
चीनी मिल का जर्जर ढांचा दशकों से घटनाओं को अंजाम दे रहा है। वर्ष 1994-95 में मिल में कार्यरत पूर्वांचल के एक फिटर की मिल के गन्ना कोल्हू में पिसने से मौत हो गई थी। घटना के बाद मिल के गन्ना जूस को बहा दिया गया था। वर्ष 2006-07 में क्षेत्र के गांव का रहने वाले एक मजदूर की सर्विस चैनल टैंक में डूब कर मौत हो गई थी। इन्हीं जर्जर मशीनों के कारण गत वर्ष 2019 में मिल के एक टैंक में वेल्डिंग करते समय वेल्डर की मौत हो गई थी। चीनी मिल के एक केमिस्ट अधिकारी मशीनों के निरीक्षण के दौरान फाउंडेशन की छत की सीमेंट चादर सिर पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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लोहे के और टैंक बने होते तो शायद यह घटना नहीं होती
मिल के चीफ केमिस्ट ने बताया कि 45 हजार क्विंटल शीरा के क्षमता के दो टैंक लोहे के बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि पर दो कच्चे जले हुए टैंक पड़े हैं। यही एक टैंक है जिसमें शीरा भरा था। एक और नए टैंक की खुदाई की जा रही है। भूमि पर खुले टैंक बनाना मिल प्रशासन की मजबूरी है क्योंकि लोहे के बंद टैंक बनाने के लिए लागत करीब एक करोड़ रुपये आती है। फेडरेशन से इतना पैसा मिलना नामुमकिन है।
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बृहस्पतिवार सुबह छह बजे चीनी मिल के सुरक्षाकर्मी सुरेश ने जमीन पर बनाए गए शीरा से भरे टैंक में शव को उतराते हुए देखा। बाद में सुरक्षा अधिकारी विनोद वर्मा की सूचना पर मिल प्रबंधक शेर बहादुर सहित मिल के अन्य अधिकारी, सीओ मंगल सिंह रावत, कोतवाल सुनील अहलावत और नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। मजदूरों की सहायता से शव बाहर निकाला गया। युवक के शव पर एक हरे रंग की बनियान जिस पर एट्रैक्ट छपा था। इसके अलावा शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। पैरों की खाल उधड़ी हुई मिली। अंडकोष में सूजन थी। युवक का बाएं हाथ का पंजा मुड़ा हुआ था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। मिल के प्रधान प्रबंधक शेर बहादुर ने बताया कि किसी भी कर्मचारी के लापता होने की सूचना नहीं है। मिल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है। चीनी लदान के ट्रक और गन्ने के ट्रैक्टर ट्रॉली आते हैं। घटना कैसे हो गई कुछ पता नहीं चल रहा है। इस संबंध में कोतवाल सुनील अहलावत ने बताया कि कोई मानसिक मंदित गलती से गिर गया होगा। उसकी पहचान नहीं हो सकी है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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चीनी मिल की जर्जर मशीनें और ढांचा दे रहा घटनाओं को दावत
चीनी मिल का जर्जर ढांचा दशकों से घटनाओं को अंजाम दे रहा है। वर्ष 1994-95 में मिल में कार्यरत पूर्वांचल के एक फिटर की मिल के गन्ना कोल्हू में पिसने से मौत हो गई थी। घटना के बाद मिल के गन्ना जूस को बहा दिया गया था। वर्ष 2006-07 में क्षेत्र के गांव का रहने वाले एक मजदूर की सर्विस चैनल टैंक में डूब कर मौत हो गई थी। इन्हीं जर्जर मशीनों के कारण गत वर्ष 2019 में मिल के एक टैंक में वेल्डिंग करते समय वेल्डर की मौत हो गई थी। चीनी मिल के एक केमिस्ट अधिकारी मशीनों के निरीक्षण के दौरान फाउंडेशन की छत की सीमेंट चादर सिर पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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लोहे के और टैंक बने होते तो शायद यह घटना नहीं होती
मिल के चीफ केमिस्ट ने बताया कि 45 हजार क्विंटल शीरा के क्षमता के दो टैंक लोहे के बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि पर दो कच्चे जले हुए टैंक पड़े हैं। यही एक टैंक है जिसमें शीरा भरा था। एक और नए टैंक की खुदाई की जा रही है। भूमि पर खुले टैंक बनाना मिल प्रशासन की मजबूरी है क्योंकि लोहे के बंद टैंक बनाने के लिए लागत करीब एक करोड़ रुपये आती है। फेडरेशन से इतना पैसा मिलना नामुमकिन है।