{"_id":"5f36e1588ebc3e3ce65e0f2c","slug":"darbari-lal-sharma-hoisted-the-tricolor-for-the-first-time-shahjahanpur-news-bly4163140181","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरबारी लाल शर्मा ने पहली बार फहराया था तिरंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दरबारी लाल शर्मा ने पहली बार फहराया था तिरंगा
विज्ञापन
शाहजहांपुर। अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति के बाद जब देश की आजादी की घोषणा हुई, उस रात 12 बजे तहसील सदर परिसर में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। तिरंगा फहराने का सौभाग्य बरेली निवासी कांग्रेस के एक दिग्गज नेता को मिला। आजादी के जश्न की अध्यक्षता भी उन्होंने ही की थी। उनका नाम था दरबारी लाल शर्मा। दरबारी लाल ने 14-15 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजे ध्वजारोहण करने पहले देश के आजाद होने की जब घोषणा की, तो जनसमुदाय खुशी से झूम उठा था। इस दौरान भारत माता के जयघोष के साथ काफी देर तालियां बजती रहीं। एक-दूसरे को बधाई देने का सिलसिला तो कई दिनों तक चला।
स्वतंत्रता के उस पहले जश्न के गवाह बने थे, जिले के इतिहासकार डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने डॉ. मेहरोत्रा से विशेष बातचीत की और उनसे पहले स्वतंत्रता समारोह के बारे में जानकारी जुटाई। वयोवृद्ध डॉ. मेहरोत्रा ने अतीत के पन्ने पलटते हुए बताया कि 14-15 अगस्त की रात 12 बजे तहसील परिसर में राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया गया था। इस ऐतिहासिक कार्य के लिए बरेली के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दरबारी लाल शर्मा को आमंत्रित किया गया था, उन्हीं की अध्यक्षता में आजादी का पहला जश्न मनाया गया था। प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजार, स्कूलों को रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया। चारों ओर उल्लास का माहौल था। लोगों में खुशी और उत्साह देखते ही बनता था।
डॉ. मेहरोत्रा बताते हैं कि उस समय वह 10वीं के छात्र थे। रात में जश्न मनाने के लिए वह तहसील पहुंचे थे। दरबारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुए जलसे में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंडित शिव कुमार मिश्र, महासचिव ठाकुर मनोहर सिंह, स्वतंत्रता सेनानी वसंत लाल खन्ना, बाबूराम मुनीम, बाल किशन टंडन समेत बड़ी संख्या में विशिष्टजन मौजूद थे। उपस्थित जनसमुदाय के भारत माता के जयघोष से वातावरण गूंज रहा था। रात के ठीक 12 बजते ही दरबारी लाल शर्मा ने जैसे ही तिरंगा फहराया तो तहसील परिसर तालियों से गूंज उठा। काफी देर तक तालियां बजती रहीं।
विज्ञापन
ध्वजारोहण के बाद दरबारी लाल शर्मा ने देश के आजाद होने की घोषणा की और अपने उद्बोधन में जनसमुदाय को बधाई देते हुए कहा कि अब हमें देश के अपने हिसाब से मिलजुल कर चलाना है और आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाना है। एक नई चेतना से लबरेज शहर आजादी के जश्न में झूम उठा। 15 अगस्त को स्कूल-कॉलेजों के अलावा सभी सरकारी दफ्तरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। शहर दुल्हन की तरह सजा आजादी का जश्न कई दिनों तक मनाता रहा।
विज्ञापन
स्वतंत्रता के उस पहले जश्न के गवाह बने थे, जिले के इतिहासकार डॉ. नानक चंद्र मेहरोत्रा। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने डॉ. मेहरोत्रा से विशेष बातचीत की और उनसे पहले स्वतंत्रता समारोह के बारे में जानकारी जुटाई। वयोवृद्ध डॉ. मेहरोत्रा ने अतीत के पन्ने पलटते हुए बताया कि 14-15 अगस्त की रात 12 बजे तहसील परिसर में राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया गया था। इस ऐतिहासिक कार्य के लिए बरेली के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दरबारी लाल शर्मा को आमंत्रित किया गया था, उन्हीं की अध्यक्षता में आजादी का पहला जश्न मनाया गया था। प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजार, स्कूलों को रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया। चारों ओर उल्लास का माहौल था। लोगों में खुशी और उत्साह देखते ही बनता था।
विज्ञापन
डॉ. मेहरोत्रा बताते हैं कि उस समय वह 10वीं के छात्र थे। रात में जश्न मनाने के लिए वह तहसील पहुंचे थे। दरबारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुए जलसे में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंडित शिव कुमार मिश्र, महासचिव ठाकुर मनोहर सिंह, स्वतंत्रता सेनानी वसंत लाल खन्ना, बाबूराम मुनीम, बाल किशन टंडन समेत बड़ी संख्या में विशिष्टजन मौजूद थे। उपस्थित जनसमुदाय के भारत माता के जयघोष से वातावरण गूंज रहा था। रात के ठीक 12 बजते ही दरबारी लाल शर्मा ने जैसे ही तिरंगा फहराया तो तहसील परिसर तालियों से गूंज उठा। काफी देर तक तालियां बजती रहीं।
विज्ञापन
ध्वजारोहण के बाद दरबारी लाल शर्मा ने देश के आजाद होने की घोषणा की और अपने उद्बोधन में जनसमुदाय को बधाई देते हुए कहा कि अब हमें देश के अपने हिसाब से मिलजुल कर चलाना है और आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाना है। एक नई चेतना से लबरेज शहर आजादी के जश्न में झूम उठा। 15 अगस्त को स्कूल-कॉलेजों के अलावा सभी सरकारी दफ्तरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। शहर दुल्हन की तरह सजा आजादी का जश्न कई दिनों तक मनाता रहा।