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मछलियों की जैव विविधता को खतरा
शाहजहांपुर, ब्यूरो
Updated Mon, 20 Mar 2017 11:35 PM IST
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मछलियों की जैव विविधता को खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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नदियों में बढ़ते प्रदूषण से पैदा हो रही है समस्या
जीएफ कॉलेज के नेशनल सेमिनार में प्रोफेसर नीलिमा का उद्बोधन
सर्वश्रेष्ठ शोधपत्रों के लिए शोधार्थियों को किया गया सम्मानित
जीएफ कॉलेज में जंतु विज्ञान विभाग की ओर से चल रहे दो दिवसीय नेशनल सेमिनार के समापन के अंतिम दिन मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की एनीमल साइंस की प्रो. नीलिमा गुप्ता ने श्रेष्ठ शोधपत्रों को पुरस्कृत किया। उन्होंने शोधार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
बायो डिग्रेडेशन ऑफ वाइल्ड लाइफ, इन्वायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी विषय पर प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या एवं प्रदूषण ही वन्य जीव पर्यावरण एवं जैव विविधता के विघटन के मुख्य कारक हैं। रामगंगा का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि नदी में प्रदूषण का बढ़ता स्तर मछलियों की जैव विविधता के लिए खतरा बन गया है। विशेष रूप से मुरादाबाद और फर्रूखाबाद के बीच मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ रहा प्रदूषण चिंता का विषय है।
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मुख्य वक्ता छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के प्रोफेसर वीपी सिंह ने गौरैया संरक्षण की अपील करते हुए उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में बाघों की स्थिति पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। इस बीच उन्होंने पग मार्ग, कैमरा ट्रैपिंग, आणविक वर्गीकरण विज्ञान आदि विधियों के द्वारा बाघों की गणना के बारे में उपयोगी जानकारी दी। महाविद्यालय के प्रोफेसर अकील अहमद शोध-संगोष्ठियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिनसे विद्यार्थियों को उच्च लक्ष्य हासिल करने में सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी शोध व्यर्थ है, जो आमजन के लिए उपयोगी न हो।
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सेमिनार में मौखिक प्रस्तुतिकरण में पंतनगर की बोनिता पंत को प्रथम, देहरादून के सलमान और विजयवर्धन पांडेय ने द्वितीय, लखनऊ के वैभव मिश्रा ने तृतीय, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रदर्शन में अवार्ड नैनीताल के नेेत्रपाल शर्मा, निर्णायक की भूमिका लखनऊ विवि के डॉ. अरशद और डॉ. सुचित स्वरूप तथा जीएफ कॉलेज के डॉ. रेहानुर्रहमान और डॉ. सैयद मुर्शिद हुसैन, डॉ. अबुल हसनात ने निभाई। डॉ. अब्दुल मोमिन और डॉ. अरीब अंजुम रहमान के संचालन में हुए सेमिनार में आयोजन सचिव डॉ. जमील अहमद ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में डॉ. फरोग खुमार, डॉ. अरशद अली, डॉ. शिव प्रताप सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. शबीना परवीन, डॉ. फैयाज अहमद, सैयद अनीस अहमद, डॉ. स्वप्निल यादव आदि का योगदान रहा।