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हत्या की नीयत से चोट करने पर सात साल कैद
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 23 Sep 2015 11:09 PM IST
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हत्या करने की नीयत से धारदार हथियारों से हमला कर अचेत करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शैलेंद्र पांडेय ने बुधवार को दोषी पाए गए दो बालिग अभियुक्तों को सात साल की सजा और 23-23 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस जुर्माने की राशि में से 25 हजार रुपये घायल को बतौर प्रतिकर देने का निर्देश दिया है। अन्य दो किशोर का उम्र पाते हुए उनके बारे में विधिक निर्णय हेतु उनका मामला किशोर न्याय बोर्ड को सुपुर्द कर दिया।
घटना 30 सितंबर 2009 की रात करीब नौ बजे हुई थी। तब वादी त्रिलोक सिंह का बेटा बलबीर पुवायां से अपनी आल्टो कार से बंडा थाना क्षेत्र के गांव बसंतापुर लौट रहा था। गांव से पहले ही अपने फार्म में उसे जानवरों के घुसने का शक हुआ था तो कार रोक ली और जानवरों को भगाने के लिए खेत में गया। तभी कच्चे रास्ते पर शिवनगरा के पास अज्ञात लोगों ने उस पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। उसे गंभीर रूप से घायल और अचेत हाल में छोड़कर हमलावर भाग निकले थे। तब शिवनगरा के परमजीत सिंह, धरमपाल सिंह और सुखपाल सिंह ने घायल हालत में बलबीर को रास्ते पर पड़ा देखा तो तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां गंभीर हालत देखते हुए उसे बरेली रेफर कर दिया गया। वादी की तहरीर पर एक अक्तूबर 2009 को बंडा थाना में घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज हुई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को आरोपी पाया। इनमें शिवनगर निवासी सर्वेश, अजय, रामू उर्फ बड़े और सामू उर्फ छोटे शामिल थे। इनमें बड़े और छोटे को न्यायालय ने उम्र के लिहाज से किशोर पाया एवं दो बालिग आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रखी। सरकारी वकील संजय सिंह तोमर ने दोषियों के खिलाफ आठ गवाह सुनवाई के दौरान पेश किए।
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14 साल पहले हुई हत्या मेें उम्रकैद
शाहजहांपुर। करीब 14 साल पहले तिलहर के गांव गोपालपुर जदीद में रात करीब आठ बजे ताबड़तोड़ फायरिंग कर राकेश सिंह की हुई हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा ने बुधवार को सुनवाई पूरी की। उन्होंने दोषी सिद्ध आरोपी नेत्रपाल सिंह यादव को उम्र कैद की सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना किया है।
घटना 21 सितंबर 2001 की रात को गांव में फूल सिंह की दुकान के सामने हुई थी। मृतक के बड़े भाई राम किशोर ने तब पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि तीन माह पहले गांव के ही नेत्रपाल का पानी का पंखा खुल गया था। उसका शक इसके भाई राकेश पर किया गया था और उस मामले का फैसला भी हो गया लेकिन उसी की रंजिश मनाते हुए यह हत्या की गई। घटना से पहले राकेश कोल्हू से गुड़ लेकर घर वापस आ रहा था तभी नेत्रपाल ने तमंचे से ताबड़तोड़ फायर झोंक दिया। गांव के ही महिपाल सिंह और मेहमानी में आए जदुवीर सिंह ने टार्च की रोशनी करते हुए हमलावर को ललकारा तो वह इन दोनों पर तमंचा तानता हुआ भाग निकला। रिपोर्ट लिखे जाने तक लाश मौके पर पड़ी हुई थी।
पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में सौंपी। वादी की ओर से सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा ने पैरवी की जबकि अभियुक्त के वकील ने प्रस्तुत केस विरल से विरलतम मामलों ने नहीं आने के कारण सजा के प्रति उदारता बरतने का अनुरोध किया था।
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घटना 30 सितंबर 2009 की रात करीब नौ बजे हुई थी। तब वादी त्रिलोक सिंह का बेटा बलबीर पुवायां से अपनी आल्टो कार से बंडा थाना क्षेत्र के गांव बसंतापुर लौट रहा था। गांव से पहले ही अपने फार्म में उसे जानवरों के घुसने का शक हुआ था तो कार रोक ली और जानवरों को भगाने के लिए खेत में गया। तभी कच्चे रास्ते पर शिवनगरा के पास अज्ञात लोगों ने उस पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। उसे गंभीर रूप से घायल और अचेत हाल में छोड़कर हमलावर भाग निकले थे। तब शिवनगरा के परमजीत सिंह, धरमपाल सिंह और सुखपाल सिंह ने घायल हालत में बलबीर को रास्ते पर पड़ा देखा तो तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां गंभीर हालत देखते हुए उसे बरेली रेफर कर दिया गया। वादी की तहरीर पर एक अक्तूबर 2009 को बंडा थाना में घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज हुई।
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विवेचना के दौरान पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को आरोपी पाया। इनमें शिवनगर निवासी सर्वेश, अजय, रामू उर्फ बड़े और सामू उर्फ छोटे शामिल थे। इनमें बड़े और छोटे को न्यायालय ने उम्र के लिहाज से किशोर पाया एवं दो बालिग आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रखी। सरकारी वकील संजय सिंह तोमर ने दोषियों के खिलाफ आठ गवाह सुनवाई के दौरान पेश किए।
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14 साल पहले हुई हत्या मेें उम्रकैद
शाहजहांपुर। करीब 14 साल पहले तिलहर के गांव गोपालपुर जदीद में रात करीब आठ बजे ताबड़तोड़ फायरिंग कर राकेश सिंह की हुई हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा ने बुधवार को सुनवाई पूरी की। उन्होंने दोषी सिद्ध आरोपी नेत्रपाल सिंह यादव को उम्र कैद की सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना किया है।
घटना 21 सितंबर 2001 की रात को गांव में फूल सिंह की दुकान के सामने हुई थी। मृतक के बड़े भाई राम किशोर ने तब पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि तीन माह पहले गांव के ही नेत्रपाल का पानी का पंखा खुल गया था। उसका शक इसके भाई राकेश पर किया गया था और उस मामले का फैसला भी हो गया लेकिन उसी की रंजिश मनाते हुए यह हत्या की गई। घटना से पहले राकेश कोल्हू से गुड़ लेकर घर वापस आ रहा था तभी नेत्रपाल ने तमंचे से ताबड़तोड़ फायर झोंक दिया। गांव के ही महिपाल सिंह और मेहमानी में आए जदुवीर सिंह ने टार्च की रोशनी करते हुए हमलावर को ललकारा तो वह इन दोनों पर तमंचा तानता हुआ भाग निकला। रिपोर्ट लिखे जाने तक लाश मौके पर पड़ी हुई थी।
पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में सौंपी। वादी की ओर से सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा ने पैरवी की जबकि अभियुक्त के वकील ने प्रस्तुत केस विरल से विरलतम मामलों ने नहीं आने के कारण सजा के प्रति उदारता बरतने का अनुरोध किया था।