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नुकसान से आहत तीन और किसानों की थम गईं सांसें
शाहजहांपुर
Updated Mon, 20 Apr 2015 11:52 PM IST
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फसली नुकसान से आहत जिले के तीन और किसानों की पिछले 24 घंटे के दौरान सांसें थम गईं। पुवायां क्षेत्र के नगरा गांव में तीन लाख के बैंक कर्ज से दबे 70 वर्षीय हरवंश सिंह को साढ़े पांच एकड़ खेती में पर्याप्त फसल नहीं मिलने का गम ले डूबा। इसी क्षेत्र के गांव मझगवां में रह रहे 45 वर्षीय राम कुमार फसली नुकसान सह नहीं पाए और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। इसी तरह गढ़िया रंगीन के 40 वर्षीय रामशंकर बटाई पर ली गई खेती से पर्याप्त उपज नहीं मिलने के गम में चल बसे। उधर, तिलहर क्षेत्र के गांव खिरिया माल निवासी 25 वर्षीय वीरेंद्र सिंह को 16 बीघा खेत से उम्मीद के मुताबिक गेहूं नहीं मिला तो घर मेें पड़ी टीन में अगौंछा बांधकर फांसी पर झूल गए, लेकिन परिवार वालों ने शोर मचाकर उसे बचा लिया। जिले में अब तक नुकसान प्रभावित 36 किसान काल के गाल में समा चुके हैं।
बुजुर्ग हरवंश की खेत से लौटते बिगड़ गई हालत
पुवायां। गांव नगरा निवासी बुजुर्ग हरवंश सिंह अपने छोटे पुत्र रंजीत सिंह के साथ रहते थे। उन्होंने साढ़े पांच एकड़ गेहूं बोया था। फसल में लागत और अन्य खर्चों के लिए जिला सहकारी बैंक से ढाई लाख रुपए और नाहिल की बॉब शाखा से 50 हजार रुपए का कर्ज ले रखा था। दो दिन पूर्व गेहूं की कटाई हुई तो मात्र 30 क्विंटल गेहूं निकला। इससे वह काफी परेशान चल रहे थे। पुत्र रंजीत बाहर कंबाइन चलाने गया था। दो दिन पूर्व अचानक हरवंश सिंह तबियत खराब हुई और थोड़ी ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया। जानकारी पाकर पुत्र रंजीत सोमवार को वापस घर पहुंचा और तहसील प्रशासन को सूचना देकर सहायता की गुहार की। रंजीत के अनुसार उसके पिता की मौत का कारण ज्यादा कर्ज चढ़ जाना और फसल खराब होना ही है।
रामकुमार की असमय मौत से अनाथ हो गए बच्चे
मझिगवां/पुवायां। पुवायां के गांव भटिपुरा चंदू निवासी रामकुमार की गांव मझिगवां में ससुराल है। वह काफी समय से ससुराल में ही रहते थे। रामकुमार ने इस बार ढाई एकड़ गेहूं बोया था, लेकिन बारिश में गेहूं की फसल खराब हो गई। रामकुमार कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें श्वांस रोग भी था। पांच दिन पूर्व गेहूं कटवाया गया तो मात्र 18 क्विंटल गेहूं निकला। पत्नी राजकुमारी ने बताया कि गेहूं कम निकलने से पति काफी परेशान थे। सोमवार सुबह रोते हुए सांस फूलने से उनकी तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत करते हुए उन्होंने कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। रामकुमार की पत्नी के सामने आठ वर्षीय बेटी भाग्यश्री, छह माह के पुत्र धनराज को पालने की समस्या खड़ी हो गई है।
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खेत पर ही टूट गई रामशंकर के सांसों की लड़ी
गढ़ियारंगीन। कस्बा निवासी रामशंकर जाटव ने दो बीघा क्विंटल पर चार बीघा खेत ठेका पर लेकर गेहूं की फसल बोई थी। जेवर गिरवी रखकर खाद, बीज और पानी लगाया। सोचा था कि फसल अच्छी होगी। परिवार का गुजारा साल भर हो जायेगा, लेकिन बारिश ने सारे अरमान धो डाले। गेहूं का वजन हलका देखने पर उसने बाली हाथ से मसल कर देखी तो बहुत कमजोर दाने निकले। उसने वहां बैठे लोगों को गेहूं दिखाए और गमछा बिछा कर वहीं लेट गया। काफी देर तक नहीं उठा तो पड़ोसी खेत वालों ने मौके पर जाकर देखा और रामशंकर को आवाज लगाई। हिलाया-ढुलाया, लेकिन उसका शरीर निर्जीव हो चुका था। उसके परिवार के लोगों को खबर की तो पत्नी व अन्य परिजन रोते हुए खेत पर पहुंचे। शरीर गर्म था जीवन की आस में बरेली को लेकर चल दिए, लेकिन रास्ते में ही उसका शरीर ठंडा पड़ गया। पत्नी विरेशा देवी ने रोते हुए बताया कि ‘वो’ घर से ठीक-ठाक गेहूं काटने गए। मृतक अपने पीछे पांच अविवाहित बेटियां और एक अबोध बेटा छोड़ गया है। लेखपाल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने मौके पर जाकर ग्रामीणों से जानकारी ली और खेत पर जाकर फसल देखी।भी निरीक्षण किया। बताया कि दलित रामशंकर के पास कोई जमीन नही है। गांव के ही बबलू, वीरेंद्र का चार बीघा खेत दो क्विंटल बीघा पर लिया था। रामशंकर की मौत गेहूं काटते समय खेत पर हुई है। हर संभव सहायता दिलाई जाएगी।
फांसी पर लटका नुकसान से आहत किसान, गंभीर
तिलहर क्षेत्र के गांव खिरिया माल में फसली नुकसान से आहत किसान 25 वर्षीय वीरेंद्र सिंह ने सोमवार की सुबह फांसी लगाकर जान देने का प्रयास किया। परिवार वालों ने किसी तरह से वीरेंद्र को बचाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के मुताबिक वीरेंद्र की हालत गंभीर है।
वीरेंद्र के पिता मिल्कू सिंह की छह महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पांच भाइयों में वीरेंद्र दूसरे नंबर पर है। छोटी बहन पूजा शादी के लायक है। पांच भाइयों के बीच कुल छह बीघा जमीन है। रविवार को खेत में कटे गेंहू की गहाई हुई। छह बीघा खेत में कुल तीन क्विंटल गेंहू निकले। इतने कम गेंहू को देखकर वीरेंद्र परेशान हो गया। शाम को खेत से घर पहुंचा वीरेंद्र बहकी-बहकी बाते करने लगा। वीरेंद्र की वजह से परिवार के सभी लोग पूरी रात जागते रहे। सुबह घर वालों की आंख लग गई। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में पड़ी टीन में गमछा बांधकर फांसी पर लटकने का प्रयास किया। इसी बीच वीरेंद्र की भाभी नन्हीं ने देख लिया और चिल्लाने लगी। वीरेंद्र की मां ने आनन-फानन में हशिए से गमछा काट दिया। परिवार वाले तुरंत वीरेंद्र को लेकर जिला अस्पताल आए। डॉक्टरों के मुताबिक गले की नसों के दबने से वीरेंद्र के दिमाग पर भी असर हुआ है। वीरेंद्र की हालत गंभीर बनी हुई है।
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बुजुर्ग हरवंश की खेत से लौटते बिगड़ गई हालत
पुवायां। गांव नगरा निवासी बुजुर्ग हरवंश सिंह अपने छोटे पुत्र रंजीत सिंह के साथ रहते थे। उन्होंने साढ़े पांच एकड़ गेहूं बोया था। फसल में लागत और अन्य खर्चों के लिए जिला सहकारी बैंक से ढाई लाख रुपए और नाहिल की बॉब शाखा से 50 हजार रुपए का कर्ज ले रखा था। दो दिन पूर्व गेहूं की कटाई हुई तो मात्र 30 क्विंटल गेहूं निकला। इससे वह काफी परेशान चल रहे थे। पुत्र रंजीत बाहर कंबाइन चलाने गया था। दो दिन पूर्व अचानक हरवंश सिंह तबियत खराब हुई और थोड़ी ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया। जानकारी पाकर पुत्र रंजीत सोमवार को वापस घर पहुंचा और तहसील प्रशासन को सूचना देकर सहायता की गुहार की। रंजीत के अनुसार उसके पिता की मौत का कारण ज्यादा कर्ज चढ़ जाना और फसल खराब होना ही है।
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रामकुमार की असमय मौत से अनाथ हो गए बच्चे
मझिगवां/पुवायां। पुवायां के गांव भटिपुरा चंदू निवासी रामकुमार की गांव मझिगवां में ससुराल है। वह काफी समय से ससुराल में ही रहते थे। रामकुमार ने इस बार ढाई एकड़ गेहूं बोया था, लेकिन बारिश में गेहूं की फसल खराब हो गई। रामकुमार कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें श्वांस रोग भी था। पांच दिन पूर्व गेहूं कटवाया गया तो मात्र 18 क्विंटल गेहूं निकला। पत्नी राजकुमारी ने बताया कि गेहूं कम निकलने से पति काफी परेशान थे। सोमवार सुबह रोते हुए सांस फूलने से उनकी तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत करते हुए उन्होंने कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। रामकुमार की पत्नी के सामने आठ वर्षीय बेटी भाग्यश्री, छह माह के पुत्र धनराज को पालने की समस्या खड़ी हो गई है।
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खेत पर ही टूट गई रामशंकर के सांसों की लड़ी
गढ़ियारंगीन। कस्बा निवासी रामशंकर जाटव ने दो बीघा क्विंटल पर चार बीघा खेत ठेका पर लेकर गेहूं की फसल बोई थी। जेवर गिरवी रखकर खाद, बीज और पानी लगाया। सोचा था कि फसल अच्छी होगी। परिवार का गुजारा साल भर हो जायेगा, लेकिन बारिश ने सारे अरमान धो डाले। गेहूं का वजन हलका देखने पर उसने बाली हाथ से मसल कर देखी तो बहुत कमजोर दाने निकले। उसने वहां बैठे लोगों को गेहूं दिखाए और गमछा बिछा कर वहीं लेट गया। काफी देर तक नहीं उठा तो पड़ोसी खेत वालों ने मौके पर जाकर देखा और रामशंकर को आवाज लगाई। हिलाया-ढुलाया, लेकिन उसका शरीर निर्जीव हो चुका था। उसके परिवार के लोगों को खबर की तो पत्नी व अन्य परिजन रोते हुए खेत पर पहुंचे। शरीर गर्म था जीवन की आस में बरेली को लेकर चल दिए, लेकिन रास्ते में ही उसका शरीर ठंडा पड़ गया। पत्नी विरेशा देवी ने रोते हुए बताया कि ‘वो’ घर से ठीक-ठाक गेहूं काटने गए। मृतक अपने पीछे पांच अविवाहित बेटियां और एक अबोध बेटा छोड़ गया है। लेखपाल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने मौके पर जाकर ग्रामीणों से जानकारी ली और खेत पर जाकर फसल देखी।भी निरीक्षण किया। बताया कि दलित रामशंकर के पास कोई जमीन नही है। गांव के ही बबलू, वीरेंद्र का चार बीघा खेत दो क्विंटल बीघा पर लिया था। रामशंकर की मौत गेहूं काटते समय खेत पर हुई है। हर संभव सहायता दिलाई जाएगी।
फांसी पर लटका नुकसान से आहत किसान, गंभीर
तिलहर क्षेत्र के गांव खिरिया माल में फसली नुकसान से आहत किसान 25 वर्षीय वीरेंद्र सिंह ने सोमवार की सुबह फांसी लगाकर जान देने का प्रयास किया। परिवार वालों ने किसी तरह से वीरेंद्र को बचाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के मुताबिक वीरेंद्र की हालत गंभीर है।
वीरेंद्र के पिता मिल्कू सिंह की छह महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पांच भाइयों में वीरेंद्र दूसरे नंबर पर है। छोटी बहन पूजा शादी के लायक है। पांच भाइयों के बीच कुल छह बीघा जमीन है। रविवार को खेत में कटे गेंहू की गहाई हुई। छह बीघा खेत में कुल तीन क्विंटल गेंहू निकले। इतने कम गेंहू को देखकर वीरेंद्र परेशान हो गया। शाम को खेत से घर पहुंचा वीरेंद्र बहकी-बहकी बाते करने लगा। वीरेंद्र की वजह से परिवार के सभी लोग पूरी रात जागते रहे। सुबह घर वालों की आंख लग गई। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में पड़ी टीन में गमछा बांधकर फांसी पर लटकने का प्रयास किया। इसी बीच वीरेंद्र की भाभी नन्हीं ने देख लिया और चिल्लाने लगी। वीरेंद्र की मां ने आनन-फानन में हशिए से गमछा काट दिया। परिवार वाले तुरंत वीरेंद्र को लेकर जिला अस्पताल आए। डॉक्टरों के मुताबिक गले की नसों के दबने से वीरेंद्र के दिमाग पर भी असर हुआ है। वीरेंद्र की हालत गंभीर बनी हुई है।