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ऐसा मारा कि आंख की रोशनी ही चली गई, 10 साल कैद
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 09 Oct 2015 11:41 PM IST
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मेड़बंदी के विवाद में साढ़े 10 साल पहले सिंधौली थाना क्षेत्र के गांव बिलैया में दो भाइयों पर पड़ोसियों ने हमला कर ऐसी गंभीर चोट पहुंचाई कि घायल हुए दोनों भाइयों में से एक भारत सिंह की आंखों की रोशनी ही चली गई। आईपीसी की धारा 307 और 326 के तहत दर्ज हुए इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम प्रवीण कुमार ने शुक्रवारको दोषी सिद्ध आरोपी हरनाम को 10 साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
वाकया 16 अप्रैल 2005 को बिलैया गांव में सुबह नौ बजे का है। उस समय वादी सोमपाल सिंह का भाई भारत अपने खेत को जोत रहा था। उसने अपनी पुरानी मेड़ को जोतना शुरू किया तो पड़ोस के खेत वाले हरनाम, गुरबचन उर्फ सरनाम, धीरू और मुंशी कांता, बांका और लाठियों से लैस होकर वहां पहुंचे एवं गालियां देते हुए पूछा कि नई मेड़ छोड़कर पुरानी मेड़ क्यों जोत रहा है। वह जवाब देने वाला ही था कि आरोपियों ने हमला बोल दिया। तब तक खेत में पहुंचे वादी के दूसरे भाई करन सिंह पर भी हमलावरों ने धावा बोल दिया। दोनों भाइयों को गंभीर रूप से घायल कर खेत में छोड़कर हमलावर भाग निकले। घायलावस्था में दोनों को अस्पताल में भरती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान भारत सिंह के सिर और आंख पर चोट इतनी गहरी पाई गई कि उनकी आंखों की रोशनी जाती रही। तहरीर पाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट भी दायर कर दी। सरकारी वकील उमेश चंद गुर्जर की ओर से सात गवाह प्रस्तुत किए गए। न्यायाधीश ने सभी गवाहों को सुनने और साक्ष्यों को परखने के बाद शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। इस प्रकरण में कुल चार आरोपी दोषी सिद्ध पाए गए, लेकिन उनमें से सरनाम और मुंशी की सुनवाई के दौरान मौत गई थी, जबकि नाबालिग धीरू को किशोर अपराधी घोषित कर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
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वाकया 16 अप्रैल 2005 को बिलैया गांव में सुबह नौ बजे का है। उस समय वादी सोमपाल सिंह का भाई भारत अपने खेत को जोत रहा था। उसने अपनी पुरानी मेड़ को जोतना शुरू किया तो पड़ोस के खेत वाले हरनाम, गुरबचन उर्फ सरनाम, धीरू और मुंशी कांता, बांका और लाठियों से लैस होकर वहां पहुंचे एवं गालियां देते हुए पूछा कि नई मेड़ छोड़कर पुरानी मेड़ क्यों जोत रहा है। वह जवाब देने वाला ही था कि आरोपियों ने हमला बोल दिया। तब तक खेत में पहुंचे वादी के दूसरे भाई करन सिंह पर भी हमलावरों ने धावा बोल दिया। दोनों भाइयों को गंभीर रूप से घायल कर खेत में छोड़कर हमलावर भाग निकले। घायलावस्था में दोनों को अस्पताल में भरती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान भारत सिंह के सिर और आंख पर चोट इतनी गहरी पाई गई कि उनकी आंखों की रोशनी जाती रही। तहरीर पाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट भी दायर कर दी। सरकारी वकील उमेश चंद गुर्जर की ओर से सात गवाह प्रस्तुत किए गए। न्यायाधीश ने सभी गवाहों को सुनने और साक्ष्यों को परखने के बाद शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। इस प्रकरण में कुल चार आरोपी दोषी सिद्ध पाए गए, लेकिन उनमें से सरनाम और मुंशी की सुनवाई के दौरान मौत गई थी, जबकि नाबालिग धीरू को किशोर अपराधी घोषित कर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
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