{"_id":"097eec8023fc9e454b55e488bb0b5360","slug":"the-farmer-hanged-in-delhi-madanapur-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली में फांसी पर लटका मदनापुर का किसान","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दिल्ली में फांसी पर लटका मदनापुर का किसान
शाहजहांपुर/मदनापुर।
Updated Tue, 28 Apr 2015 11:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फसली नुकसान की भरपाई के लिए मजदूरी की तलाश में दिल्ली गए मदनापुर क्षेत्र के गांव बरुआ निवासी सुरेंद्र पाल सिंह को वहां काम नहीं मिला तो शनिवार को उन्होंने नरेला इलाके के एक पार्क में फांसी लगा ली। यहां बता दें कि अब तक फसली नुकसान से प्रभावित जिले के 64 किसान अस्वाभाविक मौत का शिकार हो चुके हैं।
40 वर्षीय सुरेंद्र पाल के पास 12 बीघा खेती है। उन्होेंने खेत में गेहूं की बुवाई कराने के बाद पिछले दिनों फसल कटवाई तो गेहूं उम्मीद से आधा भी नहीें निकला। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह पत्नी पूनम समेत पांच अवयस्क बच्चों के साथ गत सप्ताह दिल्ली चले गए। वहां वह नरेला थाना क्षेत्र के सन्नौत इलाके की एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम कर चुके थे, इसलिए दोबारा उसी फैक्ट्री में काम मांगने गए।
कई दिन भटकने के बाद भी उन्ह्ें दिहाड़ी पर काम नहीं मिला तो निराश हो गए। बीते शनिवार को उन्होंने फैक्ट्री के पास स्थित छठ पूजा तालाब वाले पार्क परिसर में खड़े जामुन के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। मृतक के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार नरेला थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मंगलवार को सुबह सुरेंद्र का शव लेकर घरवाले आए तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इत्तला दिए जाने पर राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा तो दोपहर बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुरेंद्र अपने पीछे पत्नी समेत तीन बेटियां, शीतल, रोली, शैजल और दो बेटे मोनू और सोनू छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
40 वर्षीय सुरेंद्र पाल के पास 12 बीघा खेती है। उन्होेंने खेत में गेहूं की बुवाई कराने के बाद पिछले दिनों फसल कटवाई तो गेहूं उम्मीद से आधा भी नहीें निकला। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह पत्नी पूनम समेत पांच अवयस्क बच्चों के साथ गत सप्ताह दिल्ली चले गए। वहां वह नरेला थाना क्षेत्र के सन्नौत इलाके की एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम कर चुके थे, इसलिए दोबारा उसी फैक्ट्री में काम मांगने गए।
विज्ञापन
कई दिन भटकने के बाद भी उन्ह्ें दिहाड़ी पर काम नहीं मिला तो निराश हो गए। बीते शनिवार को उन्होंने फैक्ट्री के पास स्थित छठ पूजा तालाब वाले पार्क परिसर में खड़े जामुन के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। मृतक के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार नरेला थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मंगलवार को सुबह सुरेंद्र का शव लेकर घरवाले आए तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इत्तला दिए जाने पर राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा तो दोपहर बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। सुरेंद्र अपने पीछे पत्नी समेत तीन बेटियां, शीतल, रोली, शैजल और दो बेटे मोनू और सोनू छोड़ गए हैं।
विज्ञापन