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फसली नुकसान से प्रभावित दो और किसानों की मौत
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 04 May 2015 11:48 PM IST
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फसली नुकसान से प्रभावित जिले में दो और किसानों की मौत हो गई। कस्बा गढ़िया रंगीन निवासी 45 वर्षीय ओम वीरेश ने सोमवार सुबह खेत के पास बबूल के पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। घरवालों के अनुसार ढाई एकड़ गेहूं की फसल खराब होने से वह काफी परेशान थे। उधर, जलालाबाद क्षेत्र के गांव बथुआमई में 50 वर्षीय रामनाथ की हार्ट अटैक से हालत बिगड़ने पर घरवालों ने उन्हें बरेली ले जाने की तैयारी की, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। इन्हें मिलाकर अब तक जिले में 69 किसानों की अस्वाभाविक मौत हो चुकी है।
हताशा में फांसी लगाने को मजबूर हुए ओम वीरेश
गढ़िया रंगीन। फसली नुकसान और पहले से चढ़े कर्ज से उपजी हताशा के चलते कसबा निवासी ओम वीरेश फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला खत्म करने को मजबूर हो गए। उनके चचेरे भाई सत्यपाल ने बताया कि ढाई एकड़ खेत में गेहूं की फसल पैदा करने के लिए ओम वीरेश ने स्टेट बैंक की तिलहर शाखा से 1.5 लाख रुपये क्रॉप लोन लिया था। जिला सहकारी बैंक और भूमि विकास बैंक की देनदारी भी चढ़ी थी।
सत्यपाल के अनुसार कर्ज चुकाने के लिए ओम वीरेश फसल कटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। रविवार को फसल की गहाई कराने पर केवल आठ क्विंटल गेहूं निकले। इसी संताप में डूबे ओम वीरेश चुपचाप घर लौट आए। खाना भी बेमन से खाया और रात करीब 11 बजे लघुशंका के बहाने घर से निकले तो सुबह तक वापस नहीं लौटे। भोर होने पर चाचा अरुण खेत की ओर गए तो वहां बबूल के पेड़ पर तहमद से बंधा उनका शव लटकता मिला। उनकी मौत से पत्नी वीरेमा देवी सहित बेटी और दोनों बेटों का रोते-रोते बुरा हाल हो गया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया है।
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रामनाथ के दिल पर भारी पड़ा कर्ज का बोझ
जलालाबाद। रविवार देर शाम क्षेत्र के गांव बसुआमई में फसली नुकसान से परेशान रामनाथ की सांसें थम गईं। घरवालों के अनुसार कर्ज चुकाने की चिंता उनके दिल पर भारी पड़ गई और इलाज के लिए बरेली ले जाते वक्त हार्ट अटेक से उनकी जान चली गई।
मृतक के बड़े बेटे रामनिवास के अनुसार धान में घाटा हो जाने के बाद उसके पिता ने बारह बीघा खेत में गेहूं की फसल तैयार की थी। इस दौरान उन्होंने गांव के ही लोगों से करीब दो लाख का कर्ज भी लिया था जिसे चुकाने के साथ ही अन्य घरेलू खर्चो की पूर्ति के लिए उनकी सारी उम्मीदें गेहूं की फसल पर टिकी थीं। अतिवृष्टि के चलते फसल खराब होने से बीते दिन गहाई कराने पर खेत में मात्र चार क्विंटल गेहूं निकले तो उन्हें गहरा धक्का लगा।
रविवार शाम को रामनाथ की अचानक तबियत बिगड़ गई। देर रात हालत ज्यादा खराब हो जाने पर घरवाले उन्हें इलाज के लिए बरेली लेकर जा रहे थे परंतु रास्ते में ही दिल का दौरा पड़ जाने से उन्होंने दम तोड़ दिया। मुखिया की मौत से घर में कोहराम मच गया। सोमवार दोपहर फर्रुखाबाद के घटिया घाट स्थित गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। रामनाथ अपने पीछे पत्नी समेत पांच बेटे व दो बेटियां छोड़ गए हैं।
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हताशा में फांसी लगाने को मजबूर हुए ओम वीरेश
गढ़िया रंगीन। फसली नुकसान और पहले से चढ़े कर्ज से उपजी हताशा के चलते कसबा निवासी ओम वीरेश फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला खत्म करने को मजबूर हो गए। उनके चचेरे भाई सत्यपाल ने बताया कि ढाई एकड़ खेत में गेहूं की फसल पैदा करने के लिए ओम वीरेश ने स्टेट बैंक की तिलहर शाखा से 1.5 लाख रुपये क्रॉप लोन लिया था। जिला सहकारी बैंक और भूमि विकास बैंक की देनदारी भी चढ़ी थी।
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सत्यपाल के अनुसार कर्ज चुकाने के लिए ओम वीरेश फसल कटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। रविवार को फसल की गहाई कराने पर केवल आठ क्विंटल गेहूं निकले। इसी संताप में डूबे ओम वीरेश चुपचाप घर लौट आए। खाना भी बेमन से खाया और रात करीब 11 बजे लघुशंका के बहाने घर से निकले तो सुबह तक वापस नहीं लौटे। भोर होने पर चाचा अरुण खेत की ओर गए तो वहां बबूल के पेड़ पर तहमद से बंधा उनका शव लटकता मिला। उनकी मौत से पत्नी वीरेमा देवी सहित बेटी और दोनों बेटों का रोते-रोते बुरा हाल हो गया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया है।
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रामनाथ के दिल पर भारी पड़ा कर्ज का बोझ
जलालाबाद। रविवार देर शाम क्षेत्र के गांव बसुआमई में फसली नुकसान से परेशान रामनाथ की सांसें थम गईं। घरवालों के अनुसार कर्ज चुकाने की चिंता उनके दिल पर भारी पड़ गई और इलाज के लिए बरेली ले जाते वक्त हार्ट अटेक से उनकी जान चली गई।
मृतक के बड़े बेटे रामनिवास के अनुसार धान में घाटा हो जाने के बाद उसके पिता ने बारह बीघा खेत में गेहूं की फसल तैयार की थी। इस दौरान उन्होंने गांव के ही लोगों से करीब दो लाख का कर्ज भी लिया था जिसे चुकाने के साथ ही अन्य घरेलू खर्चो की पूर्ति के लिए उनकी सारी उम्मीदें गेहूं की फसल पर टिकी थीं। अतिवृष्टि के चलते फसल खराब होने से बीते दिन गहाई कराने पर खेत में मात्र चार क्विंटल गेहूं निकले तो उन्हें गहरा धक्का लगा।
रविवार शाम को रामनाथ की अचानक तबियत बिगड़ गई। देर रात हालत ज्यादा खराब हो जाने पर घरवाले उन्हें इलाज के लिए बरेली लेकर जा रहे थे परंतु रास्ते में ही दिल का दौरा पड़ जाने से उन्होंने दम तोड़ दिया। मुखिया की मौत से घर में कोहराम मच गया। सोमवार दोपहर फर्रुखाबाद के घटिया घाट स्थित गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। रामनाथ अपने पीछे पत्नी समेत पांच बेटे व दो बेटियां छोड़ गए हैं।