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बंडा में दंपति ने जहर खाकर जान दी

Sat, 23 May 2015 11:16 PM IST
बंडा (शाहजहांपुर)
बंडा (शाहजहांपुर) Updated Sat, 23 May 2015 11:16 PM IST
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The couple lives in Banda consuming poison
क्षेत्र के गांव इंदलपुर में 38 वर्षीय राकेश कुमार पाल और उसकी पत्नी नीतू पाल ने जहर खाकर जान दे दी। दंपति की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजे हैं। मृतक के पिता शिवचरन के अनुसार गरीबी के चलते बेटे-बहू ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया है।
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शिवचरन मूल रूप से पीलीभीत के थाना बिलसंडा के गांव भदारी का रहने वाला था। उसके पास दो एकड़ जमीन थी। इकलौते पुत्र राकेश की पीलीभीत के गांव आसपुर में शादी हुई। उसके दो बच्चे 13 वर्ष का यशपाल और उससे छोटी पुत्री सरोजा देवी है। लगभग दस वर्ष पूर्व हत्या के मामले में राकेश जेल गया तो शिवचरन ने भदारी में जमीन-मकान बेचकर बंडा के गांव इंदलपुर में टिन आदि डालकर एक नया मकान बना लिया और रहने लगे। इंदलपुर में उन्होंने साढ़े तीन बीघा जमीन भी खरीदी। इस दौरान राकेश की पत्नी बच्चों सहित मायके जाकर रहने लगी। पौने दो वर्ष पूर्व राकेश जमानत पर बाहर आया और मजदूरी कर गुजर बसर करने लगा।
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शिवचरन के अनुसार पुत्र और बहू गरीबी के चलते बेहद परेशान थे। तीन बीघा खेत में खड़ी गेहूं की फसल भी बारिश में बर्बाद हो गई थी, जिस कारण राशन तक खरीदना पड़ रहा था। सुबह देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला तो शिवचरन ने बेटे, बहू को आवाज दी। जवाब नहीं मिलने पर वह दीवार पर चढ़ा तो बेटे का शव आंगन में पड़ा देख शोर मचाया। आसपास के तमाम लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचे। राकेश आंगन में और बहू नीतू पाल कमरे के अंदर मृत पड़ी थी। इकलौते बेटे और बहू को मृत देख शिवचरन गश खाकर गिर पड़े। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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गांव के लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दंपति के बीच संबंध ठीक नहीं थे। नीतू मायके जाने की जिद कर रही थी। जबकि राकेश उसे मना कर रहा था। राकेश तीन बहनों के बीच अकेला भाई था। एसओ रजी अहमद ने बताया कि दंपति के शव पोस्टमार्टम को भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अभी आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं है।


घर में मिला एक-एक
किलो आटा-चावल
बंडा। राकेश बेहद गरीबी में जीवन यापन कर रहा था। जेल से आने के बाद वह एक दम बदल गया था। अब वह गांव के लोगों से बेहद प्रेम व्यवहार से पेश आता था। दंपति की मौत से गांव के लोग गमगीन हैं। राकेश के घर शुक्रवार शाम करेले की सब्जी और रोटी बनी थी। राकेश उसकी पत्नी नीतू और पिता शिवचरन ने खाना खाया और सोने चले गए। सुबह राकेश और उसकी पत्नी का शव घर में पड़ा मिला। राकेश के पिता के पास तीन बीघा खेत है। खेत में खाने भर को अनाज मिल जाता था और सब्जी आदि की व्यवस्था राकेश की मजदूरी से हो जाती थी। बेहद गरीबी के चलते राकेश के बच्चे अपनी ननिहाल में रहते थे और पत्नी नीतू पाल भी अधिकतर मायके में रहकर गुजर करती थी। नीतू होली पर ससुराल आई थी और तबसे यहीं थी। गेहूं की फसल बारिश में नष्ट हो जाने से अनाज आदि भी बाजार से खरीदना पड़ रहा था। इससे राकेश परेशान रहता था।
शाम को दोनों ने खाना खाया और उसके बाद जहर खाकर मौत को गले लगा लिया। राकेश के घर में एक पीपे में एक किलो चावल और एक पीपे में एक किलो आटा गरीबी की कहानी बयां करने के लिए काफी है। बताया जाता है कि गरीबी के चलते दंपति के बीच संबंधों में खटास चल रही थी।



नहीं हो सका मां और
पिता का अंतिम दर्शन
बंडा। राकेश का पुत्र यशपाल और पुत्री सरोजा देवी अपने मामा के पास रहती है। दंपति की मौत की जानकारी पाकर बच्चों का मामा दोनों को लेकर इंदलपुर आया। तब तक दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका था। इसके बाद मामा दोनों बच्चों को लेकर घर लौट गया।


सुसाइड नोट मिलने की चर्चा
बंडा। चर्चा है कि राकेश के पास से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने वैवाहिक संबंधों के बारे में राज की कई बातें लिखी हैं और आत्महत्या का कारण भी लिखा है। बताया जाता है कि सुसाइड नोट को मौके से गायब कर दिया गया। उधर, पुलिस किसी सुसाइड नोट मिलने की जानकारी से इंकार कर रही है। दंपति की आत्महत्या को लेकर गांव में तमाम तरह की चर्चाएं हैं।



रोशनलाल की हत्या
में हुई थी सजा
बंडा। पीलीभीत के गांव भदारी में रहते समय राकेश के चाचा से गांव के रोशनलाल की विवाद हो गया था। इसके बाद रोशनलाल की हत्या हो गई। इस मामले में राकेश को नामजद किया गया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शिवचरन ने इकलौते पुत्र की जमानत का काफी प्रयास किया, लेकिन वह जेल से नहीं छूट सका और जेल में रहने के दौरान ही उसे आजीवन कारावास की सजा हो गई। इस दौरान मुकदमेबाजी में शिवचरन की नौ बीघा जमीन बिक गई। राकेश की पत्नी नीतू पाल सजा के बाद दोनों बच्चों के साथ मायके जाकर रहने लगी। इस दौरान राकेश की पत्नी नीतू ने इधर-उधर नौकरी भी की। सजा के बाद शिवचरन ने दौड़भाग कर हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने लगभग 21 माह पूर्व राकेश को जमानत पर छोड़े जाने का आदेश दिया था। आधा बीघा खेत बेचकर शिवचरन पुत्र को जमानत पर घर लाए थे।
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