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यात्रियों को लूटकर मार डालने वाला गिरोह दबोचा
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Thu, 26 May 2016 11:46 PM IST
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यात्रियों को लूटकर मार डालने वाला गिरोह दबोचा
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रेल और बस यात्रियों को आधी रात के बाद बहला - फुसलाकर सुनसान इलाके में ले जाकर तमंचे और चाकू के बल पर लूटने के बाद विरोध करने वाले का गमछे से गला घोंटकर खन्नौत नदी किनारे लाल पुल के नीचे फेंक देने वाले गिरोह को शाहजहांपुर जीआरपी ने जिला पुलिस के साथ मिलकर बुधवार रात को रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर स्थित कठौआ पुल के पास धर दबोचा। गिरफ्तार सरगना जितेंद्र उर्फ बब्बन यादव शहर से सटे गांव नियामतपुर का निवासी है और इसने यात्रियों को लूटने की करीब 500 घटनाएं और 15 हत्याएं कबूली हैं। साथ ही बीते जनवरी माह में मालगोदाम रोड पर व्यापारी से चार लाख रुपये लूटने की बात भी इसने कबूली है। एडीजी रेलवे गोपाल लाल मीणा ने इस गिरोह की गिरफ्तारी पर शाहजहांपुर जीआरपी की टीम को 20 हजार रुपये नगद का पुरस्कार घोषित किया। गिरफ्तार शातिरों में बब्बन के अलावा सिंधौली थाना क्षेत्र के महोलिया मंडी निवाली मुनेश उर्फ कल्लू, हरदोई के शाहबाद निवासी वीरेश उर्फ पंडित और खुटार के नरायनपुर गांव निवासी विनोद उर्फ टुइयां शामिल हैं। इनके पास से एक बाइक, दो तमंचा, चार कारतूस, चाकू और नौ हजार रुपये नगद बरामद हुए हैं। बब्बन के खिलाफ शाहजहांपुर जीआरपी के अलावा सिंधौली और अन्य थानों में कुल करीब 20 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पूछताछ में इसने बताया कि इसका यह नया गिरोह है। इससे पहले करीब आधा दर्जन गिरोह बनाया था लेकिन साथियों के पुलिस के हत्थे चढ़ जाने पर गिरोह बदल दिया। इसके अपराध का एक खास तरीका था। अपने सदस्यों के साथ दिन में आराम करता था। रात को रेलवे स्टेशन से लेकर रोडवेज बस अड्डे के आसपास सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी आदि को जाने के लिए भटकने वाले यात्रियों को निशाने पर लेता था। खुद को परेशान यात्री दर्शाते हुए उन्हें किफायती किराए में हथौड़ा मार्ग या मोड़ के पास से सवारी उपलब्ध कराने के बहाने साथ लेकर आगे बढ़ता था। रेलवे लाइन किनारे वाले मार्ग से होकर यह खन्नौत नदी किनारे की ओर श्मशान भूमि के पास शिकार को ले जाता था। वहां सन्नाटे में इसके साथी भी यात्री पर झपट पड़ते थे और सामान, नगदी व मोबाइल आदि लूट लेते थे। जो आसानी से मान जाता था, उसे तो जिंदा छोड़ देते थे लेकिन जो तनिक भी विरोध या आनाकानी करता था, उसका मौके पर पीछे से गमछा फेंककर गला घोंट देता था। फिर लाल पुल के नीचे रेल लाइन किनारे मृतक का चेहरा पत्थर से कूंचकर फेंक देता था ताकि ट्रेन से गिरकर मौत होना प्रतीत हो।
अय्याशी के लिए शातिर लुटेरा बना बब्बन
शहर से सटे गांव नियामतपुर निवासी जितेंद्र यादव उर्फ बब्बन के खिलाफ सिंधौली थाना में वर्ष 1995 में पहली बार आपराधिक केस दर्ज हुआ था। उसके बाद तो यह कभी पुलिस के हत्थे नहीं लगा। अपनी अय्याशी के लिए घर से अपेक्षित रुपये न मिलने पर इसने लूटपाट का रास्ता अपनाया। सबसे पहले ढकिया हामिद नगर निवासी हिस्ट्रीशीटर चंदू उर्फ लालाराम के संपर्क में आया और ग्राम पैना निवासी अरविंद मौर्या उर्फ ठाकुर, तिवलकपुर निवासी राधेश्याम व शमशुद्दीन बाबा के साथ मिलकर गिरोह बनाया। उन्हीं के साथ लूटपाट का यह शातिराना तरीका सीखा। परिवारवाले इसके करतूतों से आजिज आ गए। परिवार के लोग जिले की सियासत में अच्छी रसूख रखने वाले हैं। उन्होंने इसे संपत्ति से भी बेदखल कर दिया। पूछताछ में पुलिस को बब्बन ने बताया कि रोजाना रात को 20 हजार रुपये जुटाने का लक्ष्य होता था और कभी ज्यादा मोटा असामी मिल तो और बात होती थी। यात्रियों से लूटे जाने वाले महंगे मोबाइल का सिम निकालकर फेंक देता था लेकिन खुद या इसके गिरोह वाले कभी उसका इस्तेमाल नहीं करते थे। ये उस मोबाइल को किसी राहगीर या दुकानदार को सस्ते में बेच दिया करते थे। पुराने गिरोह के सदस्यों के जेल चले जाने के बाद इसने यह नया गिरोह बनाया था। इनके साथ बीते कुछ माह में करीब 150 लूटपाट की घटनाएं इसने कबूली हैं। दो दिन पहले पलिया जा रहे दो यात्रियों से मोबाइल और रुपये छीन लिए थे।
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अय्याशी के लिए शातिर लुटेरा बना बब्बन
शहर से सटे गांव नियामतपुर निवासी जितेंद्र यादव उर्फ बब्बन के खिलाफ सिंधौली थाना में वर्ष 1995 में पहली बार आपराधिक केस दर्ज हुआ था। उसके बाद तो यह कभी पुलिस के हत्थे नहीं लगा। अपनी अय्याशी के लिए घर से अपेक्षित रुपये न मिलने पर इसने लूटपाट का रास्ता अपनाया। सबसे पहले ढकिया हामिद नगर निवासी हिस्ट्रीशीटर चंदू उर्फ लालाराम के संपर्क में आया और ग्राम पैना निवासी अरविंद मौर्या उर्फ ठाकुर, तिवलकपुर निवासी राधेश्याम व शमशुद्दीन बाबा के साथ मिलकर गिरोह बनाया। उन्हीं के साथ लूटपाट का यह शातिराना तरीका सीखा। परिवारवाले इसके करतूतों से आजिज आ गए। परिवार के लोग जिले की सियासत में अच्छी रसूख रखने वाले हैं। उन्होंने इसे संपत्ति से भी बेदखल कर दिया। पूछताछ में पुलिस को बब्बन ने बताया कि रोजाना रात को 20 हजार रुपये जुटाने का लक्ष्य होता था और कभी ज्यादा मोटा असामी मिल तो और बात होती थी। यात्रियों से लूटे जाने वाले महंगे मोबाइल का सिम निकालकर फेंक देता था लेकिन खुद या इसके गिरोह वाले कभी उसका इस्तेमाल नहीं करते थे। ये उस मोबाइल को किसी राहगीर या दुकानदार को सस्ते में बेच दिया करते थे। पुराने गिरोह के सदस्यों के जेल चले जाने के बाद इसने यह नया गिरोह बनाया था। इनके साथ बीते कुछ माह में करीब 150 लूटपाट की घटनाएं इसने कबूली हैं। दो दिन पहले पलिया जा रहे दो यात्रियों से मोबाइल और रुपये छीन लिए थे।
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