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डीएम सहित सात लोगों को कोर्ट से नोटिस
रोजा, शाहजहांपुर
Updated Sat, 25 Apr 2015 11:18 PM IST
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जिला उद्योग केंद्र द्वारा फर्जी वारिसान के आधार पर फैक्ट्री के हस्तांतरण मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन ने डीएम और जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सहित सात लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए हैं।
अदालत में दायर मुकदमे के अनुसार सरदार त्रिलोचन सिंह निवासी न्यू शिमलापुरी लुधियाना का आरोप है कि उनके पिता सोहन सिंह के नाम रोजा इंडस्ट्रियल स्टेट में एक भूखंड संख्या ए-13 आवंटित था। इस पर कृषि यंत्र बनाने की फैक्ट्री लगाई गई थी। उनका निधन 1994 में हो गया। वादी ने उक्त भूखंड को अपने नाम स्थानांतरित करने की बात कही थी, लेकिन जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने 17 साल तक मामले को लटकाए रखा।
वाद पत्र के अनुसार वर्ष 2011 में फर्जी वारिसान के आधार पर उक्त फैक्ट्री को डीआईसी के अधिकारियों से आरोपी ऋषिकेश पाल, चंद्रावती और उसके भाई यशपाल सिंह ने मिलकर इस फैक्ट्री का हस्तांतरण अपने नाम करा लिया। इस मामले में संयुक्त निदेशक उद्योग की शिकायत के बाद फर्जी वारिसान को पकड़ा गया था। इसमें जिला उद्योग केंद्र उपायुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए थे।
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त्रिलोचन सिंह का कहना है कि दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट नहीं हुई और एक छुटभैया नेता के दबाव में आकर अब उक्त फैक्ट्री का हस्तांतरण किसी तीसरे व्यक्ति को किया जा रहा है। उनकी मांग है कि फर्जी वारिसान के आधार हस्तांतरित किए गए आदेश को शूून्य घोषित किया जाए। दौरान मुकदमा उक्त फैक्ट्री के किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तांतरण पर रोक लगाई जाए। सिविल जज सीनियर डिवीजन ने इस मामले में डीएम और डीआईसी के महाप्रबंधक सहित सात लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
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अदालत में दायर मुकदमे के अनुसार सरदार त्रिलोचन सिंह निवासी न्यू शिमलापुरी लुधियाना का आरोप है कि उनके पिता सोहन सिंह के नाम रोजा इंडस्ट्रियल स्टेट में एक भूखंड संख्या ए-13 आवंटित था। इस पर कृषि यंत्र बनाने की फैक्ट्री लगाई गई थी। उनका निधन 1994 में हो गया। वादी ने उक्त भूखंड को अपने नाम स्थानांतरित करने की बात कही थी, लेकिन जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने 17 साल तक मामले को लटकाए रखा।
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वाद पत्र के अनुसार वर्ष 2011 में फर्जी वारिसान के आधार पर उक्त फैक्ट्री को डीआईसी के अधिकारियों से आरोपी ऋषिकेश पाल, चंद्रावती और उसके भाई यशपाल सिंह ने मिलकर इस फैक्ट्री का हस्तांतरण अपने नाम करा लिया। इस मामले में संयुक्त निदेशक उद्योग की शिकायत के बाद फर्जी वारिसान को पकड़ा गया था। इसमें जिला उद्योग केंद्र उपायुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए थे।
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त्रिलोचन सिंह का कहना है कि दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट नहीं हुई और एक छुटभैया नेता के दबाव में आकर अब उक्त फैक्ट्री का हस्तांतरण किसी तीसरे व्यक्ति को किया जा रहा है। उनकी मांग है कि फर्जी वारिसान के आधार हस्तांतरित किए गए आदेश को शूून्य घोषित किया जाए। दौरान मुकदमा उक्त फैक्ट्री के किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तांतरण पर रोक लगाई जाए। सिविल जज सीनियर डिवीजन ने इस मामले में डीएम और डीआईसी के महाप्रबंधक सहित सात लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी।