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मजबूरी है डग्गामार वाहनों का सहारा
शाहजहांपुर
Updated Sat, 20 Dec 2014 12:49 AM IST
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अक्सर हो रही सड़क दुर्घटनाओं से सबक न लेते हुए भी लोग डग्गामार वाहनों का सहारा लेने से बाज नहीं आ रहे। इसके लिए महज डग्गामार वाहनों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। डग्गामारी की वजह से हो रही सड़क दुर्घटनाओं में रोडवेज बसों की कमी, पुलिस और परिवहन विभाग की लापरवाही के साथ ही लोगों की अपने गंतव्य पर जल्दी पहुंचने की लालसा भी शामिल है।
शुक्रवार को हुई भीषण सड़क दुर्घटना में यही सारी बातें एक बार फिर से सामने आईं हैं, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी कुछ समय तक शोर-शराबा मचने के साथ सब कुछ पहले की तरह ही शांत हो जाएगा, ऐसा प्रतीत हो रहा है। मरने और घायल होने वालों में अधिकांश लोग सरकारी कर्मचारी, संविदा कर्मी या छात्र थे, जो समय से अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहते थे। इनमें से अधिकांश लोग रोडवेज बस अड्डे के पास से ही गाड़ी में बैठे थे। इससे भी यह साफ है कि उन लोगों ने पहले रोडवेज की सेवा लेनी चाही, लेकिन उस वक्त बस न होने और कार्यस्थल पर पहुंचने की जल्दी ने उन लोगों को डग्गामार वाहन में बैठने के लिए मजबूर कर दिया।
छह सवारियों का परमिट लेकर ठूंस दिए 22 लोग
शाहजहांपुर। डग्गामार वाहनों की ओवरलोडिंग की वजह से नौ लोग काल के गाल में समा गए। वहीं दस लोग घायल हो गए, जबकि तीन लोग मामूली चोटिल होने की वजह से चुपचाप अपने घरों में चले गए। इतनी भीषण सड़क दुर्घटना होने के पीछे क्षमता से अधिक सवारियों का बिठाया जाना भी माना जा रहा है।
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सिंधौली में जिस मैक्स वाहन का एक्सीडेंट हुआ, उसमें मात्र छह सवारियों को बैठाने का परमिट था, जबकि गाड़ी मेें 22 सवारियों को बिठाया गया था। क्षमता से 15 सवारियां अधिक बैठाने के बाद परिवहन विभाग या पुलिस कर्मी की इस ओर नजर नहीं पड़ी।
हादसे के बाद पुवायां रूट पर बढ़ीं रोडवेज बसें
शाहजहांपुर। सड़क यातायात के लिहाज से पुवायां रूट बेहद अहम है। पुवायां क्षेत्र में रेलवे लाइन का अभाव होने से इस मार्ग पर ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही रहता है। इसी रूट से जिले के खुटार, बंडा कसबों समेत मैलानी, पलिया स्टेशन जुड़े हैं, लेकिन दिन भर में सिर्फ आधा दर्जन बसों के दो-दो फेरे लग पाते हैं।
हालांकि, रोडवेज के अधिकारी पैसेंजर डिमांड का हवाला देते हुए पुवायां रूट पर छह बसों को पर्याप्त मानते हैं, लेकिन सच यह है कि दो बसों के छूटने के बीच के समय यात्रियों को अक्सर देर तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मुसाफिर स्टेशन गेट पर सवारियों की आवाज लगाने वालों के डग्गामार वाहनों में सवार हो लेते हैं। समय सारिणी का पालन नहीं होने से सभी मार्गों का यही हाल है। पिछली बसपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के उन मार्गों पर बसें चलाने की योजना बनाई, जो रोडवेज सेवा से अछूते हैं। सपा की सत्ता आने पर यह स्कीम भी ठंडे बस्ते में चली गई।
इधर, हादसे के बाद डग्गामारी विरोधी अभियान चला तो रूट से ऐसे वाहन गायब हो गए। यात्रियों को गंतव्य तक जाने में कठिनाई होते देख पुवायां मार्ग पर बसों की संख्या बढ़ाकर 12 कर दी गई। एआरएम रामबहादुर यादव के अनुसार विभागीय उच्चाधिकारियों से मिल दिशा निर्देश पर अमल करते हुए एडीएम और एआरटीओ को पत्र भेजकर सामूहिक चेकिंग कराने का अनुरोध किया जा चुका है। दोनों अधिकारियों से तिथि और समय बताने का आग्रह किया गया है।
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शुक्रवार को हुई भीषण सड़क दुर्घटना में यही सारी बातें एक बार फिर से सामने आईं हैं, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी कुछ समय तक शोर-शराबा मचने के साथ सब कुछ पहले की तरह ही शांत हो जाएगा, ऐसा प्रतीत हो रहा है। मरने और घायल होने वालों में अधिकांश लोग सरकारी कर्मचारी, संविदा कर्मी या छात्र थे, जो समय से अपने गंतव्य तक पहुंचना चाहते थे। इनमें से अधिकांश लोग रोडवेज बस अड्डे के पास से ही गाड़ी में बैठे थे। इससे भी यह साफ है कि उन लोगों ने पहले रोडवेज की सेवा लेनी चाही, लेकिन उस वक्त बस न होने और कार्यस्थल पर पहुंचने की जल्दी ने उन लोगों को डग्गामार वाहन में बैठने के लिए मजबूर कर दिया।
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छह सवारियों का परमिट लेकर ठूंस दिए 22 लोग
शाहजहांपुर। डग्गामार वाहनों की ओवरलोडिंग की वजह से नौ लोग काल के गाल में समा गए। वहीं दस लोग घायल हो गए, जबकि तीन लोग मामूली चोटिल होने की वजह से चुपचाप अपने घरों में चले गए। इतनी भीषण सड़क दुर्घटना होने के पीछे क्षमता से अधिक सवारियों का बिठाया जाना भी माना जा रहा है।
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सिंधौली में जिस मैक्स वाहन का एक्सीडेंट हुआ, उसमें मात्र छह सवारियों को बैठाने का परमिट था, जबकि गाड़ी मेें 22 सवारियों को बिठाया गया था। क्षमता से 15 सवारियां अधिक बैठाने के बाद परिवहन विभाग या पुलिस कर्मी की इस ओर नजर नहीं पड़ी।
हादसे के बाद पुवायां रूट पर बढ़ीं रोडवेज बसें
शाहजहांपुर। सड़क यातायात के लिहाज से पुवायां रूट बेहद अहम है। पुवायां क्षेत्र में रेलवे लाइन का अभाव होने से इस मार्ग पर ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही रहता है। इसी रूट से जिले के खुटार, बंडा कसबों समेत मैलानी, पलिया स्टेशन जुड़े हैं, लेकिन दिन भर में सिर्फ आधा दर्जन बसों के दो-दो फेरे लग पाते हैं।
हालांकि, रोडवेज के अधिकारी पैसेंजर डिमांड का हवाला देते हुए पुवायां रूट पर छह बसों को पर्याप्त मानते हैं, लेकिन सच यह है कि दो बसों के छूटने के बीच के समय यात्रियों को अक्सर देर तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मुसाफिर स्टेशन गेट पर सवारियों की आवाज लगाने वालों के डग्गामार वाहनों में सवार हो लेते हैं। समय सारिणी का पालन नहीं होने से सभी मार्गों का यही हाल है। पिछली बसपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के उन मार्गों पर बसें चलाने की योजना बनाई, जो रोडवेज सेवा से अछूते हैं। सपा की सत्ता आने पर यह स्कीम भी ठंडे बस्ते में चली गई।
इधर, हादसे के बाद डग्गामारी विरोधी अभियान चला तो रूट से ऐसे वाहन गायब हो गए। यात्रियों को गंतव्य तक जाने में कठिनाई होते देख पुवायां मार्ग पर बसों की संख्या बढ़ाकर 12 कर दी गई। एआरएम रामबहादुर यादव के अनुसार विभागीय उच्चाधिकारियों से मिल दिशा निर्देश पर अमल करते हुए एडीएम और एआरटीओ को पत्र भेजकर सामूहिक चेकिंग कराने का अनुरोध किया जा चुका है। दोनों अधिकारियों से तिथि और समय बताने का आग्रह किया गया है।