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बहू की हत्यारी सास को उम्रकैद
शाहजहांपुर।
Updated Tue, 25 Jul 2017 10:51 PM IST
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Life sentence for daughter-in-law killer mother-in-law
- फोटो : Life sentence for daughter-in-law killer mother-in-law
शहर के मोहल्ला एमनजई जलालनगर में गैर इरादतन हत्या के एक मामले में सुनवाई करते हुए तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने दोष सिद्ध होने पर मृतका की सौतेली सास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पचास हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में से 40 हजार रुपये बतौर प्रतिकर मृतका के पति वसीम को देने का आदेश दिया है।
थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला एमनजई जलालनगर निवासी वसीम ने सौतेली मां साजदा और साजदा के पिता कमर अली के खिलाफ सदर थाने में 24 जुलाई, 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि इन लोगों ने वसीम की पत्नी रुखसाना बेगम को मिट्टी का तेल छिड़क कर जला दिया। घटना के समय वसीम काम से बाहर गया हुआ था। घर में पत्नी रुखसाना, भाई फहीम और सौतेली मां साजदा थीं। सुबह साजदा के पिता कमर अली घर आए, तो साजदा ने रुखसाना से रुपये मांगे लेकिन उसने पति की अनुमति के बिना रुपये देने से इंकार कर दिया। इसी बात पर साजदा झगड़े पर अमादा हो गईं और आवेश में आकर साजदा ने अपने पिता कमर अली की मदद से रुखसाना को मिट्टी का तेल छिड़क कर जला दिया। आग बुझाने में वसीम के बहनोई जमील के दोनों हाथ जल गए। रुखसाना की 13 सितंबर, 2008 को प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का आरोप पत्र 22 अक्तूबर, 2008 को कोर्ट भेज दिया। सरकारी वकील अमित सिंह वर्मा की ओर से पेश किए गए आठ गवाहों के बयान सुनने, साक्ष्यों को परखने और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने साजदा को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंड़ित किया। आरोपी कमर अली की मुकदमे का फैसला आने से पहले ही मौत हो चुकी है।
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थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला एमनजई जलालनगर निवासी वसीम ने सौतेली मां साजदा और साजदा के पिता कमर अली के खिलाफ सदर थाने में 24 जुलाई, 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि इन लोगों ने वसीम की पत्नी रुखसाना बेगम को मिट्टी का तेल छिड़क कर जला दिया। घटना के समय वसीम काम से बाहर गया हुआ था। घर में पत्नी रुखसाना, भाई फहीम और सौतेली मां साजदा थीं। सुबह साजदा के पिता कमर अली घर आए, तो साजदा ने रुखसाना से रुपये मांगे लेकिन उसने पति की अनुमति के बिना रुपये देने से इंकार कर दिया। इसी बात पर साजदा झगड़े पर अमादा हो गईं और आवेश में आकर साजदा ने अपने पिता कमर अली की मदद से रुखसाना को मिट्टी का तेल छिड़क कर जला दिया। आग बुझाने में वसीम के बहनोई जमील के दोनों हाथ जल गए। रुखसाना की 13 सितंबर, 2008 को प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का आरोप पत्र 22 अक्तूबर, 2008 को कोर्ट भेज दिया। सरकारी वकील अमित सिंह वर्मा की ओर से पेश किए गए आठ गवाहों के बयान सुनने, साक्ष्यों को परखने और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने साजदा को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंड़ित किया। आरोपी कमर अली की मुकदमे का फैसला आने से पहले ही मौत हो चुकी है।
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