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अभी गायब है गीता की मौत का आधा सच

Thu, 10 Sep 2015 11:57 PM IST
अल्हागंज
अल्हागंज Updated Thu, 10 Sep 2015 11:57 PM IST
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Gita is still missing Half true death
क्षेत्र के गांव रामपुर में आबादी से बाहर खेतों के बीच खाली पड़े अनूप के खंडहरनुमा मकान में पेड़ से लटकती मिली गीता की अर्धनग्न लाश की घटना के संबंध में जितनी भी कहानी सामने आई है, उसमें उसकी हत्या किए जाने या मारकर लटकाए जाने की बात साफ है, लेकिन मारने वाले का ब्योरा गायब है। गीता की बदचलनी की बात भी दबे या खुले जुबान से सामने आई है एवं पुलिस अधिकारी भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं, लेकिन बृहस्पतिवार की सुबह वे कहां थे या कहां हैं जिनपर दुराचार कर हत्या करने का आरोप मृतका का पति लगा रहा है, यह भी एक रहस्य है। थानेदार प्रदीप सिंह ने चारों नामजद आरोपियों के अपने-अपने घरों पर ही होने का दावा किया गया, लेकिन दोपहर में आरोपियों में कोई घर पर नहीं मिला।
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सुबह करीब चार बजे तक गीता घर पर थी। उसके बाद ही वह शौच को गई और नहीं लौटी। पूरे गांव में उसके गायब होने और उस संबंधी दबी जुबान से कई तरह की चर्चाएं उसके चाल-चलन को लेकर भी होने लगीं। इतने में शौच को गए ग्रामीणों में से किसी ने पेड़ से लटकती लाश देखी तो सभी उधर को ही दौड़ पड़े। ग्रामीण पहली नजर में मृतका को मारकर कम ऊंचाई वाले बकैना के पेड़ की डाल से लाश लटकाने की कहानी का तर्क प्रस्तुत करने लगे। कहा कि मृतका की न तो आंखें बाहर को निकली हुई थीं और ना ही जीभ ही बाहर थी, जैसा कि अक्सर फांसी के मामले में होता है। चेहरे पर तमाम खरोंच के निशान का हवाला देकर मुंह दबाकर मारने की कहानी बताई गई, लेकिन पोस्टमार्टम में हैंगिग से मौत होने की पुष्टि ने इस हत्या में शामिल हत्यारों के एकाधिक होने का स्पष्ट संकेत दिया है।
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मौके पर पत्नी की लाश देखकर जिस तरह पछाड़ खाकर पति धीरेंद्र बिलख रहा था, उससे पहली नजर में वह निरीह नजर आ रहा था, लेकिन मृतका के पिता रामाधार और चाचा रामस्वरूप में जिस दृढ़ता से दामाद पर रुपये उगाहने और बेटी के साथ आए-दिन मारपीट करने का आरोप लगाया है उसके आधार पर रात को थाने में केस दर्ज किया जा रहा है, उससे तो सीधे तौर पर धीरेंद्र ही शक के दायरे में है। इस क्रम में पुलिस का एक अहम तर्क यह भी है कि गीता ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत अपने साथ गत एक सितंबर को घर में घुसकर किए गए सामूहिक दुराचार का जो मामला दर्ज कराया है, उस प्रार्थना पत्र पर न तो गीता के अंगूठे के निशान हैं और ना ही उसके हस्ताक्षर। हालांकि रामाधार ने अपने बयान में अपनी बेटी को पढ़ी - लिखी और हस्ताक्षर करने में सक्षम बताया है। कोर्ट ने इसी मामले में अल्हागंज थाने से 13 सितंबर को रिपोर्ट तलब कर रखी है और उसी दिन पीड़ित का बयान भी लिया जाना तय किया था, लेकिन अब पीड़ित तो इस दुनिया में नहीं रही लेकिन इस केस में गांव के ही रामबरन, सोनू और नन्हें समेत चार नामजद हैं।
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