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सप्लाई विभाग के तीन ‘खिलाड़ी’ निलंबित
शाहजहांपुर
Updated Sat, 31 Jan 2015 11:32 PM IST
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सप्लाई विभाग में समय-समय पर गड़बड़ियां सामने आती रही हैं, मगर अबकी से तीन कर्मचारी बुरी तरह फंस गए। हाईकोर्ट के आदेशों की भी धज्जियां उड़ाने वाले और अपने अफसरों को गुमराह करने वाले तिलहर के सप्लाई इंस्पेक्टर रामपाल समेत तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इन तीनों पर जलालाबाद तहसील में रहते हुए वहां के गांव छिदकुरी में आबादी कम होने के बावजूद फर्जी राशन कार्ड बनवाकर दो कोटेदार नियुक्त कराने का आरोप है।
निलंबित होने वाले दो अन्य कर्मचारियों में जलालाबाद आपूर्ति कार्यालय के लिपिक राजकुमार और सदर में तैनात आपूर्ति लिपिक अंकुर सक्सेना शामिल हैं। निलंबन आदेश प्रभावी होेने के साथ ही सप्लाई इंस्पेक्टर को खाद्य आयुक्त कार्यालय से संबद्घ कर दिया गया है। इधर, डीएम ने दोनों निलंबित लिपिकों को क्रमश: तिलहर और जलालाबाद के आपूर्ति कार्यालयों से अटैच करके उनके मामलों की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। डीएसओ बीके शुक्ला के अनुसार तीनों निलंबित कर्मचारियों के विरुद्घ शासन स्तर पर हुई शिकायतों की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि सप्लाई इंस्पेक्टर रामपाल का चार्ज एक अन्य लिपिक को देकर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया, लेकिन दोनों बाबुओं ने कार्यभार सौंपने की औपचारिकता अभी पूरी नहीं की है। इन तीनों पर यह कार्रवाई भ्रष्टाचार, न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में की गई है।
यह था मामला
विकास खंड की ग्राम पंचायत छिदकुरी में एक राशन की दुकान थी। इसका कोटेदार अमरपाल है, लेकिन प्रधान के दबाव में इंस्पेक्टर रामपाल, बाबू राजकुमार और अंकित सक्सेना ने ग्राम पंचायत अधिकारी टीएन मिश्रा के साथ मिलकर 2800 से 5200 यूनिट कर फर्जी राशन कार्ड बना कर दूसरी राशन दुकान का प्रस्ताव एसडीएम जलालाबाद के पास 31 दिसंबर 2012 को भेज दिया। उनके प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत में दूसरी दुकान दिनेश कोटेदार के नाम एसडीएम ने बना दी, लेकिन पुरानी दुकान के कोटेदार अमरपाल ने इसकी शिकायत तत्कालीन डीएम से की। उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने पर कोटेदार अमरपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। वहां से जवाब मांगा गया तो एसडीएम ने जलालाबाद के ही आपूर्ति कार्यालय से रिपोर्ट मांग ली। तब इस दफ्तर के कर्मचारियों ने मामला दबा दिया। इस पर अमरपाल फिर से हाईकोर्ट गया, पूरी बात रखे जाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। शासन में मामला पहुंचा तो डीएम से रिपोर्ट मांगी गई और पुन: राशन यूनिटों का सर्वे कराने का आदेश दिया।
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डीएम के आदेश पर एसडीएम जंगबहादुर सिंह यादव ने अपनी देखरेख में सर्वे कराया तो 5200 की जगह 2800 ही यूनिट निकले। उन्होंने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी। उनके आदेश पर एसडीएम ने उक्त ग्राम पंचायत अधिकारी टीएन मिश्रा को यूनिट बढ़ाकर भेजने के आरोप में नौ जनवरी को निलंबित कर दिया। इसके बाद डीएम ने 15 जनवरी को तीन सदस्यीय कमेटी गठित करके विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा। इस टीम में प्रभारी सीडीओ डीपी त्रिपाठी, डीएसओ बीके शुक्ला और जिला खाद्य विपणन अधिकारी कौशल देव शामिल थे। टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने तीनों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति भेज दी थी। इस रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए थे। डीएम की संस्तुति पर शासन ने खाद्य निदेशालय को मामला भेज दिया। इसके बाद निदेशालय ने तीनों कर्मचारियों खाद्य आयुक्त अजय चौहान ने निलंबित कर दिया। वहीं दोनों बाबुओं राजकुमार और अंकुर सक्सेना को डीएम ने निलंबित कर दिया।
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निलंबित होने वाले दो अन्य कर्मचारियों में जलालाबाद आपूर्ति कार्यालय के लिपिक राजकुमार और सदर में तैनात आपूर्ति लिपिक अंकुर सक्सेना शामिल हैं। निलंबन आदेश प्रभावी होेने के साथ ही सप्लाई इंस्पेक्टर को खाद्य आयुक्त कार्यालय से संबद्घ कर दिया गया है। इधर, डीएम ने दोनों निलंबित लिपिकों को क्रमश: तिलहर और जलालाबाद के आपूर्ति कार्यालयों से अटैच करके उनके मामलों की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। डीएसओ बीके शुक्ला के अनुसार तीनों निलंबित कर्मचारियों के विरुद्घ शासन स्तर पर हुई शिकायतों की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि सप्लाई इंस्पेक्टर रामपाल का चार्ज एक अन्य लिपिक को देकर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया, लेकिन दोनों बाबुओं ने कार्यभार सौंपने की औपचारिकता अभी पूरी नहीं की है। इन तीनों पर यह कार्रवाई भ्रष्टाचार, न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में की गई है।
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यह था मामला
विकास खंड की ग्राम पंचायत छिदकुरी में एक राशन की दुकान थी। इसका कोटेदार अमरपाल है, लेकिन प्रधान के दबाव में इंस्पेक्टर रामपाल, बाबू राजकुमार और अंकित सक्सेना ने ग्राम पंचायत अधिकारी टीएन मिश्रा के साथ मिलकर 2800 से 5200 यूनिट कर फर्जी राशन कार्ड बना कर दूसरी राशन दुकान का प्रस्ताव एसडीएम जलालाबाद के पास 31 दिसंबर 2012 को भेज दिया। उनके प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत में दूसरी दुकान दिनेश कोटेदार के नाम एसडीएम ने बना दी, लेकिन पुरानी दुकान के कोटेदार अमरपाल ने इसकी शिकायत तत्कालीन डीएम से की। उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने पर कोटेदार अमरपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। वहां से जवाब मांगा गया तो एसडीएम ने जलालाबाद के ही आपूर्ति कार्यालय से रिपोर्ट मांग ली। तब इस दफ्तर के कर्मचारियों ने मामला दबा दिया। इस पर अमरपाल फिर से हाईकोर्ट गया, पूरी बात रखे जाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। शासन में मामला पहुंचा तो डीएम से रिपोर्ट मांगी गई और पुन: राशन यूनिटों का सर्वे कराने का आदेश दिया।
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डीएम के आदेश पर एसडीएम जंगबहादुर सिंह यादव ने अपनी देखरेख में सर्वे कराया तो 5200 की जगह 2800 ही यूनिट निकले। उन्होंने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी। उनके आदेश पर एसडीएम ने उक्त ग्राम पंचायत अधिकारी टीएन मिश्रा को यूनिट बढ़ाकर भेजने के आरोप में नौ जनवरी को निलंबित कर दिया। इसके बाद डीएम ने 15 जनवरी को तीन सदस्यीय कमेटी गठित करके विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा। इस टीम में प्रभारी सीडीओ डीपी त्रिपाठी, डीएसओ बीके शुक्ला और जिला खाद्य विपणन अधिकारी कौशल देव शामिल थे। टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने तीनों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति भेज दी थी। इस रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए थे। डीएम की संस्तुति पर शासन ने खाद्य निदेशालय को मामला भेज दिया। इसके बाद निदेशालय ने तीनों कर्मचारियों खाद्य आयुक्त अजय चौहान ने निलंबित कर दिया। वहीं दोनों बाबुओं राजकुमार और अंकुर सक्सेना को डीएम ने निलंबित कर दिया।