{"_id":"22c1bb208699c8dd74e0550a983996cf","slug":"eight-years-running-fake-mobil-factory-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ साल से चल रही है नकली मोबिल फैक्ट्री ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आठ साल से चल रही है नकली मोबिल फैक्ट्री
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:45 PM IST
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शहर के घनी आबादी और संकरी गली वाले रंगमहला मोहल्ले में शनिवार को जिस नकली मोबिल आयल बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ, वह पड़ोसियों से लेकर मोहल्ले वालों और पुलिस को भी अचंभे में डालने वाला रहा। वजह यह कि मोहल्ले वाले भी अभी तक यही मान रहे थे कि सेठ जी के पास कई कंपनियों की थोक वितरण एजेंसी है। आरंभिक पड़ताल में पता चला है कि कोठी में यह फैक्ट्री और नकली मोबिल बनाकर खपाने का काम बीते करीब आठ साल से चल रहा था। पूरे मामले की पोल सेठ के यहां नकली तेल बनाने वाले नौकर ने खोली।
इस मामले में नामजद आरोपी सेठ मनोज अग्रवाल के नकली मोबिल बनाने का काम करने वाले विश्वस्त नौकर को बीते कुछ समय से पगार नहीं मिली थी। वह इसी बात को लेकर परेशान था और कई बार सेठ से अपना बकाया चल रहे पगार की मांग कर चुका था। सेठ कभी इसे पूरा पगार नहीं देता क्योंकि उसे भय है कि पूरी रकम दे देने पर यह काम छोड़कर भाग जाएगा और धंधा प्रभावित होने के साथ पोल खुलने का भय भी सता रहा था। शुक्रवार को इसने फिर सेठ से बकाया वेतन मांगा तो झिड़की मिली। कोठी से दूर दुकान पर इसने फिर वही राग छेड़ी तो सेठ ने वहीं पर इसे पीटा और बाद में घर ले जाकर पीटा। फिर यह बिलखते हुए क्षुब्ध होकर पुलिस के पास पहुंचा और नकली मोबिल फैक्ट्री का राज उगल दिया। फिर एसपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर केके तिवारी की अगुवाई वाली चौक कोतवाली की टीम, क्राइम ब्रांच प्रभारी हिमांशु निगम की टीम और स्वैट ने साझे तौर पर शनिवार दोपहरबाद छापा मारा।
कोठी में मनोज के साथ ही इसके भाई मुकेश और राकेश अग्रवाल भी सपरिवार रहते हैं। छापेमारी के दौरान परिवार की महिला सदस्य भी भौंचक्क थीं कि यह क्या हो गया। पकड़े जाने के भय से परिवार के सभी पुरुष सदस्य वहां से खिसक गए। कारोबारी संगठनों के पदाधिकारी सूचना पाकर पहुंचे लेकिन तब तक जब्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो चुके होने के चलते और मीडिया के पहुंच जाने पर वहां से चले गए।
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नकली मोबिल में चिकनाहट के लिए मिला रहे सर्फ
शाहजहांपुर। मिट्टी के तेल में ग्रीस का इस्तेमाल नकली मोबिल का मिश्रण गाढ़ा करने के लिए किया जा रहा था। साथ ही सीएल नामक केमिकल के साथ चिकनाई के लिए सर्फ का मिश्रण मिक्सिंग मशीन में डाला जाता था। फिर उसमें मैरुन कलर वाला पेंट एक तय मात्रा में मिलाते थे ताकि रंग एकदम मोबिल जैसा ही रहे। फिर छोटे - बड़े आकार वाले कैन में इसकी पैकिंग कर रैपर लगाए जाते थे। पुलिस के अनुसार, नकली मोबिल तैयार करने में कुल करीब सौ रुपये लागत आती थी और उसे बाजार में दुकानदारों के यहां 200 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा था जहां से आम ग्राहकों को यह 280 रुपये प्रति लीटर में बिकता था।
इस धंधे का जाल बाहर भी फैला है
शाहजहांपुर। नकली मोबिल बनाने की पकड़ी गई फैक्ट्री के पड़ताल में पता चला है कि यहां से दूरदराज के इलाकों में भी आपूर्ति होती रही है। अतीत में इसी सेठ का नाम कांट क्षेत्र में वर्ष 2014 में पकड़े गए नकली सर्फ के खेप में सामने आया था लेकिन तब विवेचना ठंडे बस्ते में पड़ गई थी।
मनोज ने भेजा अपना पक्ष
शाहजहांपुर। नकली मोबिल की फैक्ट्री चलाने वाले मनोज अग्रवाल फरार रहते हुए भी मीडिया के पास अपना पक्ष भेजा है। इसमें उन्होंने अपने धंधे को विधिक तौर पर सही होने का दावा किया है। कहा कि डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य का उत्पादन कहीं भी करने की छूट है। वह अपने कारोबार संबंधी आधिकारिक दस्तावेजों के साथ पुलिस के समक्ष हाजिर होंगे।
इंजन सीज कर देता है नकली मोबिल
शाहजहांपुर। गाडिय़ों में जितना काम डीजल और पेट्रोल का होता है, उससे अधिक काम मोबिल ऑयल का होता है। मोबिल गाडिय़ों की जान होता है। नकली मोबिल से पिस्टन के साथ इंजन भी सीज हो जाता है। इतना ही नहीं, ऑयल पंप खराब हो जाता है गाड़ी एक बार में स्टार्ट नहीं होती, गाड़ी धुआं अधिक देती है और सबसे खास बात यह कि नकली मोबिल ऑयल उड़ता बहुत है इसलिए वह गाडिय़ों में अधिक समय तक इंजन की देखभाल नहीं कर सकता और पूरी गाड़ी खराब कर देता है। गर्रा फाटक के समीप एचपी पेट्रोल पंप पर वर्कशॉप चलाने वाले मैकेनिक गुड्डू वारसी बताते हैं कि नकली मोबिल से गाडिय़ों की लाइफ काफी कम हो जाती है और इंजन तो बर्बाद ही हो जाता है।
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इस मामले में नामजद आरोपी सेठ मनोज अग्रवाल के नकली मोबिल बनाने का काम करने वाले विश्वस्त नौकर को बीते कुछ समय से पगार नहीं मिली थी। वह इसी बात को लेकर परेशान था और कई बार सेठ से अपना बकाया चल रहे पगार की मांग कर चुका था। सेठ कभी इसे पूरा पगार नहीं देता क्योंकि उसे भय है कि पूरी रकम दे देने पर यह काम छोड़कर भाग जाएगा और धंधा प्रभावित होने के साथ पोल खुलने का भय भी सता रहा था। शुक्रवार को इसने फिर सेठ से बकाया वेतन मांगा तो झिड़की मिली। कोठी से दूर दुकान पर इसने फिर वही राग छेड़ी तो सेठ ने वहीं पर इसे पीटा और बाद में घर ले जाकर पीटा। फिर यह बिलखते हुए क्षुब्ध होकर पुलिस के पास पहुंचा और नकली मोबिल फैक्ट्री का राज उगल दिया। फिर एसपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर केके तिवारी की अगुवाई वाली चौक कोतवाली की टीम, क्राइम ब्रांच प्रभारी हिमांशु निगम की टीम और स्वैट ने साझे तौर पर शनिवार दोपहरबाद छापा मारा।
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कोठी में मनोज के साथ ही इसके भाई मुकेश और राकेश अग्रवाल भी सपरिवार रहते हैं। छापेमारी के दौरान परिवार की महिला सदस्य भी भौंचक्क थीं कि यह क्या हो गया। पकड़े जाने के भय से परिवार के सभी पुरुष सदस्य वहां से खिसक गए। कारोबारी संगठनों के पदाधिकारी सूचना पाकर पहुंचे लेकिन तब तक जब्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो चुके होने के चलते और मीडिया के पहुंच जाने पर वहां से चले गए।
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नकली मोबिल में चिकनाहट के लिए मिला रहे सर्फ
शाहजहांपुर। मिट्टी के तेल में ग्रीस का इस्तेमाल नकली मोबिल का मिश्रण गाढ़ा करने के लिए किया जा रहा था। साथ ही सीएल नामक केमिकल के साथ चिकनाई के लिए सर्फ का मिश्रण मिक्सिंग मशीन में डाला जाता था। फिर उसमें मैरुन कलर वाला पेंट एक तय मात्रा में मिलाते थे ताकि रंग एकदम मोबिल जैसा ही रहे। फिर छोटे - बड़े आकार वाले कैन में इसकी पैकिंग कर रैपर लगाए जाते थे। पुलिस के अनुसार, नकली मोबिल तैयार करने में कुल करीब सौ रुपये लागत आती थी और उसे बाजार में दुकानदारों के यहां 200 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा था जहां से आम ग्राहकों को यह 280 रुपये प्रति लीटर में बिकता था।
इस धंधे का जाल बाहर भी फैला है
शाहजहांपुर। नकली मोबिल बनाने की पकड़ी गई फैक्ट्री के पड़ताल में पता चला है कि यहां से दूरदराज के इलाकों में भी आपूर्ति होती रही है। अतीत में इसी सेठ का नाम कांट क्षेत्र में वर्ष 2014 में पकड़े गए नकली सर्फ के खेप में सामने आया था लेकिन तब विवेचना ठंडे बस्ते में पड़ गई थी।
मनोज ने भेजा अपना पक्ष
शाहजहांपुर। नकली मोबिल की फैक्ट्री चलाने वाले मनोज अग्रवाल फरार रहते हुए भी मीडिया के पास अपना पक्ष भेजा है। इसमें उन्होंने अपने धंधे को विधिक तौर पर सही होने का दावा किया है। कहा कि डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य का उत्पादन कहीं भी करने की छूट है। वह अपने कारोबार संबंधी आधिकारिक दस्तावेजों के साथ पुलिस के समक्ष हाजिर होंगे।
इंजन सीज कर देता है नकली मोबिल
शाहजहांपुर। गाडिय़ों में जितना काम डीजल और पेट्रोल का होता है, उससे अधिक काम मोबिल ऑयल का होता है। मोबिल गाडिय़ों की जान होता है। नकली मोबिल से पिस्टन के साथ इंजन भी सीज हो जाता है। इतना ही नहीं, ऑयल पंप खराब हो जाता है गाड़ी एक बार में स्टार्ट नहीं होती, गाड़ी धुआं अधिक देती है और सबसे खास बात यह कि नकली मोबिल ऑयल उड़ता बहुत है इसलिए वह गाडिय़ों में अधिक समय तक इंजन की देखभाल नहीं कर सकता और पूरी गाड़ी खराब कर देता है। गर्रा फाटक के समीप एचपी पेट्रोल पंप पर वर्कशॉप चलाने वाले मैकेनिक गुड्डू वारसी बताते हैं कि नकली मोबिल से गाडिय़ों की लाइफ काफी कम हो जाती है और इंजन तो बर्बाद ही हो जाता है।