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डॉक्टर न होने से प्रसव के लिए तड़पती रही महिला
खुदागंज।
Updated Sun, 30 Aug 2015 11:48 PM IST
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रक्षाबंधन पर सरकारी अस्पताल में ताला लटकता रहा। इसमें कोई इमरजेंसी डॉक्टर तक मौजूद नहीं रहा। जिसके चलते प्रसव पीड़ा से एक महिला काफी देर तड़पती रही। प्रसव रूम तो खुला मिला, लेकिन उसमें असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। काफी देर महिला इसी कमरे में पड़ी रही। डॉक्टर और स्टॉफ के न मिलने पर पति उसे वापस गांव ले गया।
कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 15 किलोमीटर दूर गांव गौरीखेड़ा से बुग्गी (भैंसा गाड़ी) पर लिटाकर भीमसेन वर्मा अपनी पत्नी रीना देवी को प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए अस्पताल लाया था। प्रसव रूम खुला था, लेकिन अस्पताल का स्टाफ रक्षाबंधन से अपने घर गया हुआ है। दर्द भरी चीखों को सुनकर आसपास के लोग जमा हो गये। रीना के पास न कोई आशा और न ही स्टाफ नर्स थी। भीमसेन ने अस्पताल के आसपास व अन्य लोगों से डॉक्टर और स्टाफ के बारे में पूछा, लेकिन कुछ जानकारी नहीं मिली। भीमसेन ने फिर उसी बुग्गी से रीना को वापस ले गया। लोगों का कहना है कि अस्पताल के बंदी के दिन भी प्रसव रूम खुला रहता है और उसमें असामाजिक तत्वों का उठना-बैठना रहता है।
रक्षा बंधन पर अवकाश अवश्य था, लेकिन इमरजेंसी डाक्टर को रहने के निर्देश दिए गए थे। यदि इस प्रकार की लापरवाही बरती गई हैै तो जांच की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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- डा. मोहम्मद शजर, प्रभारी चिकित्साधिकारी खुदागंज
अस्पताल में मैं अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के इलाज के लिए लाया था। अस्पताल में ताला लटक रहा था। प्रसव रूम खुला था, लेकिन स्टॉफ नहीं था। - भीमसेन वर्मा, पीड़ित महिला का पति
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कस्बा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 15 किलोमीटर दूर गांव गौरीखेड़ा से बुग्गी (भैंसा गाड़ी) पर लिटाकर भीमसेन वर्मा अपनी पत्नी रीना देवी को प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए अस्पताल लाया था। प्रसव रूम खुला था, लेकिन अस्पताल का स्टाफ रक्षाबंधन से अपने घर गया हुआ है। दर्द भरी चीखों को सुनकर आसपास के लोग जमा हो गये। रीना के पास न कोई आशा और न ही स्टाफ नर्स थी। भीमसेन ने अस्पताल के आसपास व अन्य लोगों से डॉक्टर और स्टाफ के बारे में पूछा, लेकिन कुछ जानकारी नहीं मिली। भीमसेन ने फिर उसी बुग्गी से रीना को वापस ले गया। लोगों का कहना है कि अस्पताल के बंदी के दिन भी प्रसव रूम खुला रहता है और उसमें असामाजिक तत्वों का उठना-बैठना रहता है।
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रक्षा बंधन पर अवकाश अवश्य था, लेकिन इमरजेंसी डाक्टर को रहने के निर्देश दिए गए थे। यदि इस प्रकार की लापरवाही बरती गई हैै तो जांच की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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- डा. मोहम्मद शजर, प्रभारी चिकित्साधिकारी खुदागंज
अस्पताल में मैं अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के इलाज के लिए लाया था। अस्पताल में ताला लटक रहा था। प्रसव रूम खुला था, लेकिन स्टॉफ नहीं था। - भीमसेन वर्मा, पीड़ित महिला का पति