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दलाल ने दो किसानों के खाते से निकाले 88 हजार रुपये
जलालाबाद।
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:19 PM IST
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मौसम की मार से बरबाद हुई फसलों को लेकर पहले से ही परेशान दो किसान भाइयों को बैंक के दलाल ने उनके नाम से फर्जी लोन निकालकर उन्हें एक और तगड़ा झटका दे दिया। बुधवार को लोन निकालने के लिए नो-डयूज लिखाने बैंक पहुंचे भाइयों को जब यह जानकारी हुई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। भुक्तभोगी ने इसकी शिकायत एसडीएम से कर मदद की गुहार लगाई है।
गांव ठिगरी के मजरा दौलतपुर के शिवकुमार को करीब दो साल पहले कुछ रुपयों की जरूरत हुई तो उन्होंने ग्रामीण बैंक से संपर्क किया। इसकी भनक लगते ही वहां सक्रिय एक दलाल उसके पीछे लग गया और शिवकुमार से कागजात आदि लेकर लोन दिलवा देने का भरोसा दिलाया। काफी दिनों के बाद उक्त दलाल ने बताया कि अभी बैंक लोन नहीं कर रही। अभी कुछ दिन पहले शिवकुमार ने पुन: लोन लेने की सोची और इससे संबंधित कागज बनवाने शुरूआत किए। बुधवार को अन्य बैंकों से नो डयूज कराने के बाद जब वह उक्त बैंक में पहुंचा तो उसे बताया गया कि उसके नाम से पहले से ही लोन है। इसका भुगतान होने पर ही नया मिल सकेगा। बताया गया कि उसके तथा उसके भाई रामकुमार के नाम से निकाले गए लोन का मय ब्याज 88 हजार रुपये बना है।
वर्ष 2013 में लोन निकाला गया, जो कागजात बैंक में जमा हैं वह ओरिजनल हैं। कई जगह शिवकुमार के हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा लोन संबंधी कई अन्य औपचारिकताएं भी पूरी गई हैं जो आवेदक के बिना जानकारी व मर्जी पूरी नहीं हो सकतीं। शिवकुमार को किसी ने बरगलाकर झूठी शिकायत कराई है।
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- हरिओम त्रिपाठी, मैनेजर ग्रामीण बैंक
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गांव ठिगरी के मजरा दौलतपुर के शिवकुमार को करीब दो साल पहले कुछ रुपयों की जरूरत हुई तो उन्होंने ग्रामीण बैंक से संपर्क किया। इसकी भनक लगते ही वहां सक्रिय एक दलाल उसके पीछे लग गया और शिवकुमार से कागजात आदि लेकर लोन दिलवा देने का भरोसा दिलाया। काफी दिनों के बाद उक्त दलाल ने बताया कि अभी बैंक लोन नहीं कर रही। अभी कुछ दिन पहले शिवकुमार ने पुन: लोन लेने की सोची और इससे संबंधित कागज बनवाने शुरूआत किए। बुधवार को अन्य बैंकों से नो डयूज कराने के बाद जब वह उक्त बैंक में पहुंचा तो उसे बताया गया कि उसके नाम से पहले से ही लोन है। इसका भुगतान होने पर ही नया मिल सकेगा। बताया गया कि उसके तथा उसके भाई रामकुमार के नाम से निकाले गए लोन का मय ब्याज 88 हजार रुपये बना है।
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वर्ष 2013 में लोन निकाला गया, जो कागजात बैंक में जमा हैं वह ओरिजनल हैं। कई जगह शिवकुमार के हस्ताक्षर हैं। इसके अलावा लोन संबंधी कई अन्य औपचारिकताएं भी पूरी गई हैं जो आवेदक के बिना जानकारी व मर्जी पूरी नहीं हो सकतीं। शिवकुमार को किसी ने बरगलाकर झूठी शिकायत कराई है।
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- हरिओम त्रिपाठी, मैनेजर ग्रामीण बैंक