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डांट से क्षुब्ध युवक ने रामगंगा में लगाई छलांग
मिर्जापुर।
Updated Sat, 29 Aug 2015 12:22 AM IST
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कुनिया शाहनजीरपुर गांव में माता-पिता की डांट से क्षुब्ध होकर एक युवक शुक्रवार सुबह उफनाई रामगंगा में कूद गया। उसे डूबते हुए देख लेने के बावजूद ग्रामीणों ने बचाने की हिम्मत नहीं जुटाई। दोपहर बाद मौके पर पहुंचे गोताखोरों ने रामगंगा में युवक की तलाश शुरू की, लेकिन देर शाम तक कुछ पता नहीं चल सका।
ग्रामीणोेें के मुताबिक राकेश कुमार सिंह और सीता देवी का इकलौता बेटा 22 वर्षीय आलोक सिंह गलत सोहबत में पड़ गया था। बृहस्पतिवार सुबह उन्होंने बेटे को डांट दिया था। इससे क्षुब्ध आलोक ने रात में ही रामगंगा में डूबने की बात कहकर घर में खूब झगड़ा किया था। रात भर घर वाले और पड़ोसी उसकी निगरानी करते रहे। शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े पांच बजे आलोक चारपाई से उठकर नदी की तरफ भागा। उसके पिता राकेश और पड़ोसी चाचा ओमप्रकाश ने उसे पकड़ने की कोशिश की। मगर आलोक सभी से खुद को छुड़ाकर नदी में कूद गया।
गांव के दर्जनों लोग और आलोक के परिवार वाले उसे नदी में डूबते उछलते देखते रहे, लेकिन किसी की भी हिम्मत उफनाती रामगंगा में कूदकर उसकी जान बचाने की नहीं हुई। गांव के भट्टा स्वामी वीरभान सिंह व सत्यवीर सिंह ने गांव पंखिया नगला से गोताखोरों को बुलाकर नदी में आलोक की तलाश करवाई। शाम पांच बजे तक आलोक का नदी में कोई पता नहीं चल सका।
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बाबा-दादी के प्यार में जिद्दी हो गया आलोक
गांव वालों ने बताया कि बाबा-दादी और मां-बाप के लाड़ प्यार में परिवार का इकलौता आलोक बेहद जिद्दी हो गया था। वह जिस काम की ठान लेता करके ही मानता था।
बिलखती रहीं बहनें
आत्महत्या करने के लिए नदी में छलांग लगाने वाला अविवाहित आलोक की दो बहनें बड़ी किरन और छोटी कोमल का रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व इकलौते भाई के इस तरह चले जाने से रो-रोकर बुरा हाल है। बहनों के करुण क्रंदन को देख कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था।
बुजुर्ग बाबा-दादी की हालत बिगड़ी
आलोक के बाबा रहीश पाल सिंह, दादी सियादेवी भी उसके गम में निढाल हैं। रहीशपाल 20 वर्ष पहले अपने छोटे बेटे मुकेश की आकस्मिक मौत से टूट चुके थे। उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वे बड़े बेटे राकेश और पौत्र आलोक के सहारे थे। पौत्र आलोक के नदी में कूद जाने से बुरी तरह टूट गए।
माता-पिता के सपने टूटे
राकेश ने अपने इकलौते बेटे आलोक को पढ़ाकर बड़ा अफसर बनाने के सपने देखे थे। इसके लिए आलोक को इंटर तक शहर के आवासीय विद्यालय में पढ़ाया। उसने भी मेहनत से पढ़ाई कर अच्छे अंकों से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बीएससी में यहीं के एक कॉलेज में एडमीशन करवाने के बाद आलोक बिगड़ गया।
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ग्रामीणोेें के मुताबिक राकेश कुमार सिंह और सीता देवी का इकलौता बेटा 22 वर्षीय आलोक सिंह गलत सोहबत में पड़ गया था। बृहस्पतिवार सुबह उन्होंने बेटे को डांट दिया था। इससे क्षुब्ध आलोक ने रात में ही रामगंगा में डूबने की बात कहकर घर में खूब झगड़ा किया था। रात भर घर वाले और पड़ोसी उसकी निगरानी करते रहे। शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े पांच बजे आलोक चारपाई से उठकर नदी की तरफ भागा। उसके पिता राकेश और पड़ोसी चाचा ओमप्रकाश ने उसे पकड़ने की कोशिश की। मगर आलोक सभी से खुद को छुड़ाकर नदी में कूद गया।
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गांव के दर्जनों लोग और आलोक के परिवार वाले उसे नदी में डूबते उछलते देखते रहे, लेकिन किसी की भी हिम्मत उफनाती रामगंगा में कूदकर उसकी जान बचाने की नहीं हुई। गांव के भट्टा स्वामी वीरभान सिंह व सत्यवीर सिंह ने गांव पंखिया नगला से गोताखोरों को बुलाकर नदी में आलोक की तलाश करवाई। शाम पांच बजे तक आलोक का नदी में कोई पता नहीं चल सका।
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बाबा-दादी के प्यार में जिद्दी हो गया आलोक
गांव वालों ने बताया कि बाबा-दादी और मां-बाप के लाड़ प्यार में परिवार का इकलौता आलोक बेहद जिद्दी हो गया था। वह जिस काम की ठान लेता करके ही मानता था।
बिलखती रहीं बहनें
आत्महत्या करने के लिए नदी में छलांग लगाने वाला अविवाहित आलोक की दो बहनें बड़ी किरन और छोटी कोमल का रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व इकलौते भाई के इस तरह चले जाने से रो-रोकर बुरा हाल है। बहनों के करुण क्रंदन को देख कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था।
बुजुर्ग बाबा-दादी की हालत बिगड़ी
आलोक के बाबा रहीश पाल सिंह, दादी सियादेवी भी उसके गम में निढाल हैं। रहीशपाल 20 वर्ष पहले अपने छोटे बेटे मुकेश की आकस्मिक मौत से टूट चुके थे। उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वे बड़े बेटे राकेश और पौत्र आलोक के सहारे थे। पौत्र आलोक के नदी में कूद जाने से बुरी तरह टूट गए।
माता-पिता के सपने टूटे
राकेश ने अपने इकलौते बेटे आलोक को पढ़ाकर बड़ा अफसर बनाने के सपने देखे थे। इसके लिए आलोक को इंटर तक शहर के आवासीय विद्यालय में पढ़ाया। उसने भी मेहनत से पढ़ाई कर अच्छे अंकों से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बीएससी में यहीं के एक कॉलेज में एडमीशन करवाने के बाद आलोक बिगड़ गया।